कांग्रेसी के पार्षद पति ने बनाई गैंग, गुटखा का लालच देकर 50 लाख की ठगी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 50 लाख की ठगी के मामले ने प्रशासनिक के साथ सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल केस में कांग्रेस पार्षद के पति समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान 49 लाख 50 हजार रुपए नकद और दो कारें भी जब्त की गई हैं। मामला सिर्फ गबन का नहीं, बल्कि संगठित साजिश का बनता जा रहा है।
सुनियोजित तरीके से खेल
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कंपनी का ड्राइवर और अकाउंटेंट करीब 50 लाख रुपए लेकर देवपुरी जा रहे थे। रास्ते में गीतांजलि नगर के पास ड्राइवर ने गुटखा लेने का बहाना बनाया और गाड़ी रुकवाई। इसके बाद अकाउंटेंट को नीचे उतार दिया गया और कैश लेकर फरार हो गया। पहली नजर में यह लूट जैसा मामला दिखा, लेकिन जांच में कहानी पलट गई।
जब पुलिस ने परतें खोलनी शुरू कीं
पुलिस ने जांच शुरु किया तो अंदर से साजिश की पूरी स्क्रिप्ट निकलकर सामने आई। मुख्य आरोपी कृष्णा साहू को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग की थी। यानी यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि पहले से तय किया गया गबन था।
7 आरोपियों को धर दबोचा
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 7 आरोपियों को धर दबोचा। इनमें एक महिला भी शामिल है। गिरफ्तार आरोपियों में कनैया राणा, साविता साहू, भुनेश्वर साहू, ओम प्रकाश साहू, विष्णु प्रसाद पटेल और टीकम पटेल के नाम सामने आए हैं। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
पार्षद पति आमनेश साहू का नाम
सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब इस पूरे कांड में कांग्रेस पार्षद दुर्गा साहू के पति आमनेश साहू का नाम सामने आया। राजनीतिक कनेक्शन ने इस केस को और संवेदनशील बना दिया है। सवाल उठ रहा है की क्या यह सिर्फ एक गबन है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?
49 लाख 50 हजार रुपए कैश बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से 49 लाख 50 हजार रुपए कैश बरामद कर लिया है। यानी लगभग पूरी रकम रिकवर हो चुकी है। लेकिन यह रकम कैसे और किन चौनलों के जरिए घूम रही थी, इसकी जांच अभी जारी है।
कहानी अभी बाकी है
बताया जा रहा है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। जांच आगे बढ़ेगी तो और नाम सामने आ सकते हैं। क्योंकि जिस तरह से यह पूरा कांड प्लान किया गया, उससे साफ है कि यह सिर्फ 7 लोगों का खेल नहीं हो सकता।
इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी में इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी इतनी आसानी से कैसे हो गई? क्या कंपनी के अंदरूनी सिस्टम में खामियां थीं या जानबूझकर आंखें मूंदी गईं? और सबसे बड़ा सवाल यह है की राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल इस खेल में कितना हुआ?
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