साइबर ठगों का नया तरीका: 10 रुपए के गैस बिल के बहाने लाखों की ठगी

Jitendra Shrivastava | Apr 16, 2026, 23:51 IST
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cyber crime
Photograph: (THESOOTR)

NEW DELHI. साइबर ठगों ने गैस बिल का झांसा देकर लाखों की ठगी की है। पीएनजी ग्राहकों को एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जिससे उनका मोबाइल ठगों के कब्जे में चला जाता है।

News In Short

  • साइबर ठगों ने गैस बिल के नाम पर लाखों की ठगी की।
  • ठगों ने एपीके फाइल डाउनलोड करवाई, फिर मोबाइल पर कंट्रोल किया।
  • 10 रुपए के गैस बिल का झांसा देकर ठगी की गई।
  • गैस उपभोक्ताओं की डिजिटल भुगतान बढ़ने से ठगी आसान हुई।
  • पुलिस और गैस कंपनी ने ग्राहकों को अलर्ट किया है।

News In Detail

युद्ध के चलते भारत में भी गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में साइबर ठगों ने एक नया तरीका खोजा है, जिसमें पीएनजी गैस बिल के नाम पर ठगी की जा रही है।

ठगों ने ग्राहकों को 10 रुपए के बिल के बारे में बताया और उनसे एपीके फाइल (apk file) डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही यह फाइल डाउनलोड होती है, ठगों को फोन का पूरा कंट्रोल मिल जाता है और वे बैंक डिटेल्स चुराकर पैसे उड़ा लेते हैं। अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं।

गैस बिल के नाम पर ठगी

मुंबई में साइबर ठगों ने गैस बिल के नाम पर एक नया ठगी का तरीका शुरू किया है। ठगों ने खासकर महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के उपभोक्ताओं को निशाना बनाया है।

एक सामान्य गैस बिल का बहाना बनाकर ये ठग लोगों से कम राशि जैसे 10 से 12 रुपये का भुगतान करने के लिए कहते हैं। यह राशि इतनी कम होती है कि लोग बिना शक के तुरंत भुगतान कर देते हैं।

एपीके फाइल भेजकर ठगी

जब उपभोक्ता यह राशि भुगतान करते हैं, तो ठग एक एपीके फाइल भेजते हैं, जिसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही यह फाइल फोन में इंस्टॉल होती है, ठगों को फोन का रिमोट एक्सेस मिल जाता है। इसके बाद वे ओटीपी, बैंक डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी चुराकर खाता खाली कर लेते हैं।

बुजुर्ग से लेकर जवान हो रहे शिकार

साइबर ठगों का तरीका बेहद चालाक होता है, और यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी शक के बेहद सरल और विश्वसनीय लगती है। इस ठगी से हर वर्ग और उम्र के लोग शिकार हो रहे हैं। ताड़देव, भायखला, मुलुंड, नवी मुंबई और अन्य जगहों से ऐसी ठगी की रिपोर्ट्स आई हैं। एक व्यापारी से 11.82 लाख रुपए, एक बुजुर्ग से 8.59 लाख रुपये चुराए गए।

साइबर ठगों का संगठित नेटवर्क

पुलिस का कहना है कि साइबर ठगों का नेटवर्क संगठित और तेजी से फैल रहा है। इन ठगों का मुख्य उद्देश्य लोगों के डर और जल्दबाजी का फायदा उठाना है, ताकि वे बिना सोच-विचार के ठगी का शिकार हो जाएं। गैस उपभोक्ताओं की बढ़ती डिजिटल भुगतान निर्भरता भी इस अपराध को बढ़ावा दे रही है।

चेतावनी और अपील

सायबर अधिकारियों का कहना है कि यह साइबर ठगी का तरीका समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। गैस कंपनियों और पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

पुलिस और गैस कंपनियों की अपील है कि अगर कोई ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

FAQ

  1. साइबर ठगों का गैस बिल के नाम पर ठगी का तरीका क्या है?
    साइबर ठग गैस बिल के नाम पर उपभोक्ताओं से कम राशि का भुगतान करवाते हैं और फिर एपीके फाइल भेजकर उनके फोन का कंट्रोल प्राप्त कर लेते हैं, जिससे पैसे चुराए जाते हैं।
  2. क्या यह ठगी केवल गैस उपभोक्ताओं के साथ हो रही है?
    नहीं, यह ठगी केवल गैस उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। अन्य डिजिटल भुगतान करने वाले लोग भी ठगी का शिकार हो रहे हैं।
  3. अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करना चाहिए?
    अगर आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
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