छत्तीसगढ़ में रिटायर्ड अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी, छह माह में पूरी होगी भ्रष्टाचार मामलों की जांच
RAIPUR : छत्तीसगढ़ सरकार अब सेवानिवृत्त हो चुके भ्रष्ट और दागी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। राज्य शासन ने ऐसे मामलों में लंबी देरी और नियमों की जटिलताओं को देखते हुए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लोक आयोग के सुझाव पर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सभी विभागों से इस विषय पर अभिमत मांगा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
बच जाते हैं रिटायर्ड अफसर :
वर्तमान नियमों के अनुसार किसी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के चार वर्ष बाद तक ही विभागीय जांच की जा सकती है। इसके बाद पुराने मामलों में कार्रवाई संभव नहीं रह जाती। कई मामलों में जांच प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण आरोपी अधिकारी कार्रवाई से बच निकलते हैं। सरकार का मानना है कि इसी कानूनी खामी का लाभ उठाकर कई अधिकारी जवाबदेही से दूर हो जाते हैं।
लोक आयोग की सिफारिश:
छतीसगढ़ लोक आयोग ने इस विसंगति को दूर करने के लिए जांच प्रक्रिया की समय-सीमा घटाकर छह माह करने की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि यदि समयबद्ध तरीके से जांच पूरी हो, तो भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी और सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी।
सरकार ने भेजा पत्र:
इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी कर सुझाव मांगे हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार चाहती है कि जांच और दंडात्मक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी समाप्त हो और दोषियों के खिलाफ समय रहते निर्णय लिया जा सके।
ये होगी कार्रवाई:
नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने या उसमें कटौती करने की कार्रवाई भी तेज हो सकती है। इसके लिए अब राज्यपाल से अनुमति लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही, शासन को हुए आर्थिक नुकसान की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकारी धन की क्षति की भरपाई करने में मदद मिलेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
लंबित मामलों की तत्काल जांच:
लोक आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में छह माह से कम समय बचा हो, उनके खिलाफ लंबित मामलों में तत्काल जांच प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे अधिकारी रिटायरमेंट के बाद कानूनी तकनीकी कारणों का फायदा नहीं उठा पाएंगे।
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए दिशा-निर्देशों में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियम 8, 9 और 65 का विशेष उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों के तहत भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी धन के गबन में दोषी पाए जाने वाले लोक सेवकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का रास्ता साफ किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार पर सख्ती:
प्रशासनिक हलकों में इस पहल को सरकार के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो भ्रष्टाचार के मामलों में जांच प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामकारी बन सकेगी। साथ ही, सेवानिवृत्ति के बाद कार्रवाई से बच निकलने की प्रवृत्ति पर भी रोक लग पाएगी।
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