छत्तीसगढ़ से नक्सली खात्मे की उलटी गिनती शुरु, डेडलाइन को बस एक सप्ताह बाकी
RAIPUR : छत्तीसगढ़ नक्सलवाद खात्मे की ओर है। यह दावा गृहमंत्री विजय शर्मा ने किया है। विजय शर्मा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में 31 मार्च तक सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। यानी जो तारीख 31 मार्च तय की गई है उस पर नक्सलवाद से छत्तीसगढ़ मुक्त हो जाएगा। इस तारीख अब केवल एक सप्ताह ही बचा है। यानी नक्सली खात्मे की उलटी गिनती शुरु हो गई हैं। विजय शर्मा कहते हैं कि इसके बाद भी सावधानी बरतना बेहद जरुरी है। अभी हैप्पी न्यू ईयर न कहकर एहतियात रखना आवश्यक है।
नक्सलवाद के खात्मे की उलटी गिनती
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर तय समयसीमा अब बेहद करीब आ गई है। केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित 31 मार्च 2026 की डेडलाइन में महज एक सप्ताह का समय बचा है। ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों ही स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और अंतिम चरण की कार्रवाई तेज कर दी गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह ने पहले ही ऐलान किया था कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में बड़े ऑपरेशन चलाए गए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है।
गृहमंत्री का दावा
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि राज्य में नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है और तय समयसीमा तक इसका खात्मा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च की तारीख पर छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत बनी रहेगी। विजय शर्मा ने साफ किया कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने लगातार दबाव बनाए रखा है। जंगलों और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन तेज किए गए हैं, जिससे नक्सली संगठन कमजोर पड़े हैं। कई बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने से संगठन की कमर टूट चुकी है।
हैप्पी न्यू ईयर नहीं एहतियात रखें
गृहमंत्री ने कहा कि इसके बाद भी हैप्पी न्यू ईयर नहीं बल्कि सावधानी बरतने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद एक विचारधारा से जुड़ा मुद्दा है, ऐसे में इसके पूरी तरह खत्म होने के बाद भी सतर्कता जरूरी रहेगी। सुरक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि भले ही सशस्त्र गतिविधियां कम हो जाएं, लेकिन नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में विकास, विश्वास और प्रशासन की मजबूत पकड़ बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, जहां एक ओर सुरक्षा अभियान चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े विकास कार्यों को गति दी जा रही है।
सरकार के पुनर्वास ने किया काम
इस मामले में सरकार की पुनर्वास नीति ने बड़ा काम किया है। सुरक्षाबलों के शौर्य और पुनर्वास के कंधे ने नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए मजबूर किया है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली पुनर्वास कर बेहतर जीवन जी रहे हैं। वहीं हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली के इनकाउंटर से नक्सलियों के हौसले भी पस्त पड़ गए। सरेंडर नक्सलियों में बड़े इनाम वाले बड़े नक्सली नेता भी शामिल हैं।
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