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NEWS IN SHORT
- सुकमा जिले के गोगुंडा क्षेत्र में 29 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया।
- सभी माओवादी दरभा डिवीजन की केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े थे।
- आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की पूना मार्गेम पुनर्वास योजना के तहत हुआ।
- सशस्त्र कैडर के साथ माओवादी सपोर्ट सिस्टम के सदस्य भी शामिल।
- 2026 का यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नक्सली सरेंडर माना जा रहा है।
NEWS IN DETAIL
29 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के गोगुंडा क्षेत्र में सक्रिय 29 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है। ये सभी माओवादी दरभा डिवीजन की केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे और लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे थे।
सामूहिक आत्मसमर्पण से नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा है और यह क्षेत्र अब नक्सल मुक्त होने के अंतिम चरण में पहुंच गया है।
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पुलिस-प्रशासन की रणनीति लाई रंग
आत्मसमर्पण एसपी किरण चव्हाण, एएसपी रोहित शाह और सीआरपीएफ 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे के समक्ष हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन माओवादियों पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और वे लंबे समय से सुरक्षा बलों की रडार पर थे।
लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों, प्रशासन की सक्रियता और पुनर्वास नीति ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
गोगुंडा में सुरक्षा कैंप बना निर्णायक मोड़
गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद हालात तेजी से बदले। 1 जनवरी को कलेक्टर, एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इससे क्षेत्र में भरोसे का माहौल बना और माओवादियों ने आत्मसमर्पण का फैसला लिया।
Sootr Knowledge
- पूना मार्गेम योजना आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए बनाई गई है।
- दरभा डिवीजन बस्तर क्षेत्र का सबसे सक्रिय माओवादी नेटवर्क रहा है।
- आत्मसमर्पण में सशस्त्र कैडर और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम दोनों शामिल थे।
- नए सुरक्षा कैंप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
- प्रशासन-ग्रामीण संवाद से माओवादी प्रभाव कमजोर हुआ है।
IMP FACTS
- स्थान: गोगुंडा क्षेत्र, सुकमा जिला
- आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी: 29
- संगठन: दरभा डिवीजन, केरलापाल एरिया कमेटी
- वर्ष 2026 का सबसे बड़ा सामूहिक सरेंडर
- सरेंडर योजना: पूना मार्गेम पुनर्वास नीति
आगे क्या
- आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास और कौशल प्रशिक्षण।
- गोगुंडा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा अभियान और तेज होंगे।
- अन्य सक्रिय माओवादियों को भी सरेंडर के लिए प्रेरित किया जाएगा।
निष्कर्ष
सुकमा के गोगुंडा में 29 नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। सुरक्षा बलों की रणनीति, प्रशासन की सक्रियता और पुनर्वास नीति ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। यह संकेत है कि सुकमा अब नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ रहा है।
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