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5 पॉइंट्स में समझें पूरी खबर
- दंतेवाड़ा में लोन वर्राटू अभियान के तहत 63 नक्सलियों का सरेंडर।
- आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला नक्सली शामिल।
- पश्चिम बस्तर डिवीजन सचिव मोहन कड़ती ने पत्नी संग आत्मसमर्पण किया।
- सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर एक करोड़ से अधिक का इनाम था।
- नक्सल संगठन को बड़ा झटका, क्षेत्र में शांति की उम्मीद बढ़ी।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों को एक बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान के तहत आज 63 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इसे राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
बड़े नक्सली नेताओं ने छोड़ा हथियार
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती का नाम सबसे प्रमुख है। मोहन कड़ती ने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया है। बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। इससे स्पष्ट है कि ये नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी नेतृत्व संरचना और नेटवर्क कमजोर पड़ेगा।
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छत्तीसगढ़ के बाहर के नक्सली भी शामिल
खास बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में केवल छत्तीसगढ़ के नक्सली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से जुड़े नक्सली भी शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की रणनीति का असर राज्य की सीमाओं से बाहर तक दिखाई दे रहा है।
लोन वर्राटू अभियान के तहत नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिसमें अब लगातार सफलता मिल रही है।
सुरक्षा बलों की रणनीति लाई रंग
सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन एंटी-नक्सल ऑपरेशन, लगातार दबाव, बेहतर खुफिया तंत्र और मनोवैज्ञानिक रणनीति के चलते नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है। इसी दबाव के कारण बड़ी संख्या में नक्सली अब हथियार डालने को मजबूर हो रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
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क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीद
इस बड़ी सफलता के बाद दंतेवाड़ा और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा हालात सुधरने की उम्मीद है। नक्सल हिंसा में कमी आने से विकास कार्यों को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों में विश्वास बढ़ेगा।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो राज्य को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
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