डिजिटल CR व्यवस्था में फंसे कर्मचारी, फाइल लेकर साहबों के पीछे घूम रहे अधिकारी
5 पॉइंट्स में समझें पूरी खबर
- ऑनलाइन CR सिस्टम में केवल तीन स्तर शामिल किए गए
- समीक्षा और संभागीय अधिकारियों के लिए कॉलम नहीं बनाए गए
- कर्मचारी अब भी फाइल लेकर जिलों के चक्कर काट रहे
- अधिकारियों के तबादलों से प्रक्रिया और जटिल हो गई
- अधूरी CR के कारण प्रमोशन और DPC प्रभावित हो रही
तीन कॉलम बनाए, पूरी प्रक्रिया भूल गए
ऑनलाइन CR पोर्टल में केवल तीन स्तर शामिल किए गए हैं। पहला प्रतिवेदित अधिकारी। यानी कर्मचारी या अधिकारी स्वयं। इसके लिए संभागीय स्तर और जिला स्तर पर सहमति जरूरी होती है। कई मामलों में कलेक्टर या राज्य स्तरीय मुख्यालय से भी समीक्षा कराई जाती है। लेकिन ऑनलाइन पोर्टल में इनके लिए अलग कॉलम ही नहीं बनाया गया।
यानी सिस्टम अधूरा तैयार किया गया। इस वजह से पूरी प्रक्रिया फिर ऑफलाइन मोड में चली जाती है। फाइलें हाथों-हाथ घूम रही हैं। डिजिटल प्रक्रिया सिर्फ नाम की रह गई है।
फाइल लेकर खुद पहुंच रहे कर्मचारी
ऑनलाइन प्रक्रिया अधूरी होने से कर्मचारी और अधिकारी खुद फाइल लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं।कई बार समीक्षा अधिकारी दूसरे जिले में पदस्थ होते हैं। ऐसे में कर्मचारी को उसी जिले तक जाना पड़ता है। अगर समय पर हस्ताक्षर नहीं हुए तो पूरी CR अटक जाती है। इसलिए कई कर्मचारी निजी खर्च पर यात्रा कर रहे हैं। कुछ मामलों में कर्मचारी छुट्टी लेकर फाइल पूरी करवाने में लगे हैं। ताकि उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट अधूरी न रह जाए।
तबादलों ने और बढ़ाई परेशानी
सरकारी सिस्टम में हर साल तबादले होते हैं। कलेक्टर बदलते हैं। संभागीय अधिकारी बदलते हैं। समीक्षा अधिकारी भी दूसरे जिलों में चले जाते हैं। लेकिन CR उसी अधिकारी से पूरी करवानी होती है जिसने संबंधित अवधि में काम देखा हो। यही वजह है कि एक जिले की फाइल दूसरे जिले तक घूम रही है। कई कर्मचारी रायपुर से बिलासपुर। दुर्ग से जगदलपुर। या अंबिकापुर तक फाइल लेकर जा रहे हैं। सिर्फ इसलिए ताकि CR पूरी हो सके।
अधूरी CR से प्रमोशन अटक रहा
CR केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं है। यह कर्मचारी के करियर से जुड़ा सबसे अहम रिकॉर्ड होता है। विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC में CR को आधार माना जाता है। अगर रिपोर्ट अधूरी रह गई तो प्रमोशन रुक सकता है।
कई कर्मचारियों के केस लंबित बताए जा रहे हैं। वरिष्ठता सूची प्रभावित हो रही है। कुछ विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया भी धीमी पड़ी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खामी का नुकसान कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
समय सीमा तय, लेकिन सिस्टम पीछे
सरकार ने CR प्रक्रिया के लिए तय समय सीमा भी निर्धारित की है। लेकिन मौजूदा स्थिति में इन तारीखों का पालन मुश्किल हो रहा है।
CR प्रक्रिया का पूरा कैलेंडर
- 30 अप्रैल तक कर्मचारी और अधिकारियों को फॉर्म दिया जाना है
- 15 मई तक स्वयं मूल्यांकन भरना होता है
- 15 जून तक प्रतिवेदक अधिकारी मूल्यांकन करता है
- 15 जुलाई तक समीक्षा पूरी होना जरूरी है
- 16 अगस्त तक अंतिम रिपोर्ट शासन को भेजनी होती है
लेकिन ऑफलाइन फाइलों और हस्ताक्षर की प्रक्रिया के कारण कई मामलों में देरी हो रही है।
ई-गवर्नेंस के दावों पर उठे सवाल
सरकार लगातार ई-ऑफिस और पेपरलेस व्यवस्था का दावा करती है। लेकिन CR जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया अब भी आधी ऑनलाइन और आधी ऑफलाइन चल रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पोर्टल बनाते समय पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को समझा ही नहीं गया। अगर समीक्षा अधिकारियों और संभागीय स्तर के लिए अलग कॉलम नहीं जोड़े गए तो यह समस्या आगे भी बनी रहेगी। तकनीक लागू करने से पहले विभागीय जरूरतों का अध्ययन नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि ऑनलाइन व्यवस्था ने काम आसान करने के बजाय और जटिल बना दिया।
अंदरखाने बढ़ रही नाराजगी
सरकारी विभागों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू करने से पहले ट्रायल होना चाहिए था। कुछ अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल बनाने वाली एजेंसी को पूरी प्रक्रिया समझाई ही नहीं गई। अब कर्मचारी डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ पुरानी फाइल संस्कृति भी झेल रहे हैं। यानी काम दोगुना हो गया है।
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