काम में सुस्ती पर भड़के मुख्य सचिव, 21 कलेक्टर्स की लगी क्लास
छत्तीसगढ़ में सरकारी परियोजनाओं की धीमी रफ्तार अब अफसरों पर भारी पड़ती दिख रही है। मुख्य सचिव विकासशील ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग लेकर अफसरों और निर्माण एजेंसियों को सख्त चेतावनी दे दी। ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने साफ कहा कि विकास कार्यों में अब किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
देरी पर सख्त हुए मुख्य सचिव
बैठक में कई परियोजनाओं की प्रगति उम्मीद से धीमी मिलने पर मुख्य सचिव का कड़ा रुख देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन कामों में बाधाएं आ रही हैं, उन्हें तुरंत दूर किया जाए। साथ ही नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट भी दी जाए। मुख्य सचिव ने दो टूक कहा कि जो निर्माण एजेंसियां लापरवाही करेंगी, उन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर दंडात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। बैठक के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस सख्ती की चर्चा तेज हो गई।
इन 5 परियोजनाओं पर सबसे ज्यादा फोकस
बैठक में ई-प्रगति पोर्टल पर दर्ज पांच अहम परियोजनाओं की विशेष समीक्षा की गई। सरकार इन प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा में पूरा करना चाहती है।
प्रमुख परियोजनाएं
बिलासपुर के उसलापुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल
बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में महिला हॉस्टल परियोजना
बिलासपुर में 4G मोबाइल टॉवर स्थापना कार्य
मोबाइल टॉवरों के लिए विद्युत अधोसंरचना निर्माण
गरियाबंद की सिकारसर-कोडार रिसीवर लिंक कैनाल परियोजना
अब हर हफ्ते देना होगा फोटो सबूत
मुख्य सचिव ने मॉनिटरिंग सिस्टम को और सख्त बनाने के निर्देश दिए। सभी विभागों को कहा गया है कि हर सप्ताह परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर अपलोड की जाए। इसके साथ फोटो जियोटैग करना भी अनिवार्य होगा।
इस फैसले के बाद अब सिर्फ कागजों में प्रगति दिखाना आसान नहीं रहेगा। वरिष्ठ अधिकारी सीधे ग्राउंड की तस्वीरें देखकर काम की वास्तविक स्थिति समझ सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े 21 जिले
बैठक में मंत्रालय स्तर के कई बड़े विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अफसर शामिल थे। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 21 जिलों के कलेक्टर भी जुड़े। मुख्य सचिव ने एक-एक जिले की स्थिति पर सवाल किए और प्रगति रिपोर्ट मांगी।
बस्तर से सरगुजा तक अफसरों पर दबाव
बैठक में बस्तर संभाग के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जैसे जिले शामिल रहे। इसके अलावा कोरबा और रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिलों की परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। सरगुजा संभाग के बलरामपुर, जशपुर, सूरजपुर, कोरिया और एमसीबी जिले भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। वहीं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जैसे नए जिलों की रिपोर्ट भी ली गई।
क्यों अहम मानी जा रही यह मॉनिटरिंग
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में कई परियोजनाएं वर्षों तक फाइलों में अटक जाती हैं। इससे लागत बढ़ती है और जनता को समय पर फायदा नहीं मिल पाता। अब मुख्य सचिव स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग होने से अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। इससे लालफीताशाही कम होने और काम की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
महिलाओं और किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
बिलासपुर के वर्किंग वुमेन हॉस्टल परियोजना पूरी होने से कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास मिलेगा। वहीं गरियाबंद की लिंक कैनाल परियोजना किसानों के लिए राहत बन सकती है।
सरकार का फोकस अब साफ है
योजनाएं सिर्फ फाइलों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए। यही वजह है कि अब अफसरों से लेकर ठेकेदारों तक सभी पर दबाव बढ़ गया है।
FAQ
- मुख्य सचिव ने अफसरों को क्या निर्देश दिए?
मुख्य सचिव ने हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए। जियोटैग फोटो देना भी अनिवार्य किया गया। - किन परियोजनाओं की समीक्षा हुई?
वर्किंग वुमेन हॉस्टल, महिला हॉस्टल, 4G मोबाइल टॉवर और लिंक कैनाल परियोजनाओं की समीक्षा हुई। - कितने जिलों के कलेक्टर बैठक में जुड़े?
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 21 जिलों के कलेक्टर बैठक में शामिल हुए। - लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर क्या होगा?
मुख्य सचिव ने नियमानुसार कार्रवाई और दंडात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी। - जियोटैग फोटो सिस्टम क्यों लागू किया गया?
ताकि परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति सीधे ग्राउंड स्तर पर देखी जा सके। कागजों वाली प्रगति का पुराना जादू अब कमजोर पड़ने वाला है।
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