ओवरटाइम भुगतान घोटाला : CSMCL के पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। ओवरटाइम भुगतान घोटाला :छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने CSMCL के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। उन्हें 17 जुलाई को हिरासत में लेने के बाद विशेष न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने त्रिपाठी को 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
यह मामला कथित तौर पर करोड़ों रुपए के अनियमित भुगतान से जुड़ा है। जांच एजेंसियां अब त्रिपाठी से भुगतान स्वीकृति प्रक्रिया, मैनपावर एजेंसियों की भूमिका और कथित कमीशन नेटवर्क से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर सकती हैं।
ED से मिले इनपुट के बाद शुरू हुई जांच
मामले की जांच की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद हुई थी। 29 नवंबर 2023 को ईडी रायपुर ने तीन लोगों के पास से 28.80 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। इसके बाद ईडी ने इससे संबंधित जानकारी राज्य सरकार को भेजी।
इसी इनपुट के आधार पर EOW-ACB ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच का दायरा बढ़ने पर CSMCL में कर्मचारियों और मैनपावर एजेंसियों से जुड़े विभिन्न भुगतानों की पड़ताल की गई।
2019-20 से 2023-24 के भुगतान जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को कई मदों में अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप है। इनमें ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त चार कार्यदिवस और सर्विस चार्ज शामिल हैं।
जांच में कुल 182.98 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान का आरोप सामने आया है। इसमें 101.20 करोड़ रुपए ओवरटाइम भुगतान से जुड़े बताए गए हैं। इसके अलावा 12.21 करोड़ रुपए बोनस, 54.46 करोड़ रुपए अतिरिक्त चार कार्यदिवस और 15.11 करोड़ रुपए सर्विस चार्ज के रूप में भुगतान किए जाने की जांच हो रही है।
मामले को कथित ₹172 करोड़ के ओवरटाइम भुगतान घोटाले के रूप में भी बताया जा रहा है। हालांकि जांच में विभिन्न भुगतान मदों को जोड़कर 182.98 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान का आंकड़ा सामने रखा गया है।
पांच मैनपावर एजेंसियों की भूमिका की जांच
EOW-ACB कई मैनपावर एजेंसियों से जुड़े लेनदेन की भी जांच कर रही है। इनमें सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस के नाम शामिल बताए गए हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन एजेंसियों को भुगतान किस प्रक्रिया और किस आधार पर स्वीकृत किया गया। साथ ही वास्तविक कर्मचारियों तक कितनी राशि पहुंची और भुगतान में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
आरोप है कि अतिरिक्त भुगतान की राशि का एक हिस्सा कथित कमीशन के रूप में सिंडिकेट से जुड़े लोगों तक पहुंचा। जांच एजेंसियां फिलहाल वित्तीय लेनदेन और कथित धन प्रवाह से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट हो चुकी है दाखिल
इस मामले में EOW-ACB पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें अनवर ढेबर, नवीन प्रताप सिंह तोमर, तिजऊराम निर्मलकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत नरबले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एन. उदय राव, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं।
पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। अब अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी भुगतान की मंजूरी देने वाले अधिकारियों और इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
IMP FACT
आरोप: ₹172 करोड़ के कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले का मामला
गिरफ्तार: CSMCL के पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी
जांच एजेंसी: EOW-ACB
गिरफ्तारी तारीख: 17 जुलाई 2026
रिमांड: 20 जुलाई 2026 तक
कुल अतिरिक्त भुगतान जांच में: ₹182.98 करोड़
ओवरटाइम भुगतान: ₹101.20 करोड़
बोनस भुगतान: ₹12.21 करोड़
अतिरिक्त 4 कार्यदिवस भुगतान: ₹54.46 करोड़
सर्विस चार्ज भुगतान: ₹15.11 करोड़
जांच अवधि: 2019-20 से 2023-24
ED इनपुट: 29 नवंबर 2023 को ₹28.80 लाख नकद बरामदगी
चार्जशीट: 12 आरोपियों के खिलाफ दाखिल
जांच में शामिल: 5 मैनपावर एजेंसियां
मुख्य जांच: भुगतान मंजूरी, एजेंसियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल
निष्कर्ष
CSMCL के कथित ओवरटाइम और अतिरिक्त भुगतान मामले में पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जांच एक नए चरण में पहुंच गई है। 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से भुगतान प्रक्रिया और कथित कमीशन नेटवर्क से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
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