CSVTU में कुर्सियों का खेल, रिश्तेदारी से प्रतिनियुक्ति तक उठे सवाल

VINAY VERMA | Aug 10, 2026, 19:16 IST
CSVTU में भाई-भतीजावाद और डेपुटेशन से जुड़ा विवाद
स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) में पूर्व व वर्तमान कुलपतियों और कुलसचिवों पर स्वजन-पक्षपात, बिना आदेश प्रभार, 9.44 लाख रूपए पीएचडी फीस फर्जीवाड़े, 2017 भर्ती अटकाने व अवैध कंसल्टेंसी फीस के गंभीर आरोप लगे हैं।

स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय यानी CSVTU एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बीते कुछ सालों में यहां तकनीकी शिक्षा से ज्यादा कुर्सी, जुगाड़ और रिश्तेदारी का खेल चलता रहा। पूर्व कुलपति एमके वर्मा से लेकर कुलसचिव रहे केके वर्मा और उनके बाद की नियुक्तियों तक कई फैसलों पर सवाल उठे हैं। दावा है कि विश्वविद्यालय में पदों का इस्तेमाल पसंदीदा लोगों को उपकृत करने के लिए हुआ। आरोपो के बाद मामला राजभवन तक पहुंच गया है।



रिश्तेदारी से कुर्सी तक

सबसे गंभीर आरोप एमके वर्मा और केके वर्मा को लेकर लगाए गए हैं। दोनों के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में रिश्तेदारी को खूब तवज्जो मिली। केके वर्मा के रजिस्ट्रार पद से रिटायर होने के बाद अक्टूबर 2023 में डॉ. अंकित अरोड़ा को रजिस्ट्रार का प्रभार दे दिया गया। जबकि इसके लिए शासन स्तर से कोई स्पष्ट नियुक्ति आदेश नहीं था। फिर भी वे करीब दो साल तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे। इस दौरान अंकित अरोड़ा ने अपनी पत्नी को भी विश्वविद्यालय में पदस्थ कराया। लेकिन जब डॉ. अंकित के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें तेज हुई तब जाकर उन्हें नवंबर 2025 में अंबिकापुर भेज दिया गया।



कुलपति की कंसल्टेंसी पर भी सवाल

एमके वर्मा के कार्यकाल को लेकर सबसे गंभीर आरोप आर्थिक लाभ से जुड़े हैं। शिकायतों में दावा किया गया कि कुलपति रहते हुए उन्हें सरकारी भवनों की स्ट्रक्चर डिजाइन से कंसल्टेंसी के रूप में 20 लाख रुपए से ज्यादा भुगतान हुआ। कुलपति ने यह राशि अपने बैंक खाते में प्राप्त की, जबकि इस काम के लिए उनकी विशेषज्ञता और पात्रता पर भी सवाल हैं। ड्रोन सर्वे से जुड़े काम में भी कंसल्टेंसी फीस लेने के आरोप लगाए गए हैं। एमके वर्मा के खिलाफ बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका और राजभवन में शिकायत है। याचिकाकर्ता ने पुलिस जांच की मांग की है।



नई टीम, नई कुर्सी का खेल?

डॉ. अरुण अरोड़ा के कुलपति बनने के बाद विश्वविद्यालय में नई टीम बनाने की कवायद शुरू हुई। रजिस्ट्रार पद के लिए डॉ. राजेश लालवानी का नाम बताया गया। डॉ. राजेश लालवानी को कुलसचिव बनाने का आदेश जारी हुआ। वे उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हैं और अभी परिवीक्षा अवधि में हैं। यह अवधि नवंबर 2027 में पूरी होने की बात कही जा रही है। वित्त विभाग के नियमों में प्रोबेशन के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं देने और तबादले पर रोक का प्रावधान था। इसके बावजूद उन्हें प्रतिनियुक्ति पर तकनीकी शिक्षा विभाग में लाकर कुलसचिव बनाया गया।



पीएचडी फीस में 9.44 लाख का मामला

CSVTU में पीएचडी पाठ्यक्रम की फीस को लेकर करीब 9.44 लाख रुपए के कथित फर्जीवाड़े का मामला भी सामने आया। आरोप है कि शोधार्थियों से सबमिशन फीस के नाम पर 30-30 हजार रुपए लिए गए और उन्हें फर्जी रसीदें दी गईं। आरोप के अनुसार रकम विश्वविद्यालय खाते में जमा नहीं हुई। मामला कुलपति के संज्ञान में आने के बाद जांच समिति बनाई गई।



भर्ती परीक्षा हुई, रिजल्ट आज तक नहीं

पुराने कार्यकाल को लेकर आरोपों की सूची और लंबी है। 2017 में विश्वविद्यालय ने अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला। हजारों युवाओं ने फीस जमा कर आवेदन किया। परीक्षा भी आयोजित हुई। लेकिन आज तक न परिणाम जारी हुआ, न परीक्षा निरस्त की गई। अभ्यर्थियों की रकम और भविष्य दोनों अधर में लटक गए। इसी दौरान बड़ी संख्या में दैनिक वेतनभोगियों की नियुक्ति किए जाने के आरोप भी लगे। सवाल है कि जब नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो फिर मनमानी नियुक्तियों की जरूरत क्यों पड़ी?



सारे आरोप झूठे

CSVTU के पूर्व कुलपति एमके वर्मा ने कहा कि यूनिवर्सिटी में कई असामाजिक तत्व थे। जिन पर कई मामलों को लेकर मैंने कार्रवाई की थी, वे मेरे खिलाफ में लामबंद होकर मेरी बदनामी करना चाहते हैं, सारे आरोप झूठें हैं, काम करने वालों पर हमेशा ही अंगुली उठाई जाती है।



5 बड़े सवाल

रिश्तेदारी के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं?


प्रोबेशन में महत्वपूर्ण कुर्सी कैसे मिली?


पीएचडी फीस की रकम कहां गई?


भर्ती परीक्षा का रिजल्ट अब तक क्यों नहीं?


कंसल्टेंसी भुगतान की जांच कब होगी?



FAQ

  1. स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना कब हुई थी?
    उत्तर: CSVTU भिलाई (छत्तीसगढ़) में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 2005 में राज्य के तकनीकी संस्थानों को एक मंच पर लाने और तकनीकी शिक्षा के संवर्धन हेतु की गई थी।
  2. CSVTU में पीएचडी (Ph.D.) फीस से जुड़ा कौन-सा वित्तीय मामला सामने आया है?
    उत्तर: शोधार्थियों से पीएचडी सबमिशन फीस के रूप में प्रति छात्र ₹30,000 एकत्र कर फर्जी रसीदें देने और लगभग ₹9.44 लाख की राशि विश्वविद्यालय खाते में जमा न कराए जाने का मामला सामने आया है।
  3. वर्ष 2017 की CSVTU भर्ती प्रक्रिया से संबंधित मुख्य मुद्दा क्या है?
    उत्तर: 2017 में विभिन्न प्रशासनिक/तकनीकी पदों हेतु विज्ञापन जारी कर परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो परिणाम घोषित किए गए और न ही परीक्षा निरस्त कर अभ्यर्थियों की फीस लौटाई गई।

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