गिरफ्तारी दिखाए बिना श्रवण को पीटती रही छत्तीसगढ़ पुलिस, चोटों ने खोला पूरा राज
छत्तीसगढ़ के चर्चित कस्टोडियल डेथ केस में द सूत्र के इन्वेस्टिगेशन में बड़ा खुलासा हुआ है। केस डायरी में श्रवण सूर्यवंशी की गिरफ्तारी 18 जनवरी 2024 दर्ज है, और मौत 22 जनवरी को हुई। लेकिन, पीएम रिपोर्ट में शरीर पर 6 दिन पुराने तक चोट के निशान मिले हैं। ऐसे मे स्पष्ट हो रहा है कि 16 जनवरी से ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। और पुलिस बिना गिरफ्तारी दिखाए दो दिनों तक पीटती रही। इधर मौत के बाद बिलासपुर जेल प्रबंधन ने भी मौत का कारण छिपा लिया था। लेकिन एक ज्यूडिशयल इन्क्वायरी ने सारी पोल खोल दी।
चोटों ने बदल दी पूरी कहानी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले की सबसे अहम कड़ी सामने रखी। श्रवण के शरीर पर छह चोटें मिलीं। मेडिकल रिपोर्ट में इनकी उम्र करीब 2 से 6 दिन बताई गई। सिर, कलाई, पैर, जांघ और गर्दन पर चोटों के निशान थे। सवाल सीधा है, अगर गिरफ्तारी 18 जनवरी को हुई तो कुछ चोटें उससे पहले की कैसे हो गईं?
सिर की चोट बनी मौत की वजह
पोस्टमार्टम में सिर के पिछले हिस्से में घाव, सूजन और ब्लीडिंग मिली। दाहिनी कलाई के ऊपर भी सूजन थी। दोनों पैरों, जांघ और गर्दन पर नीले-हरे रंग के चोट के निशान दर्ज हुए। मेडिकल बोर्ड ने मौत का कारण सख्त और भौंथरी वस्तु से सिर पर लगी चोट की जटिलताओं से हुआ कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताया। यानी मेडिकल रिकॉर्ड मौत को सिर्फ बीमारी से जोड़ने वाली कहानी को कमजोर करता है।
शराब छोड़ने की थ्योरी पर सवाल
मौत के बाद जेल प्रशासन ने शराब छोड़ने को तबीयत बिगड़ने की प्राथमिक वजह बताया था। कहा गया कि श्रवण शराब पीता था और अचानक शराब बंद होने से उसकी हालत खराब हुई। लेकिन पोस्टमार्टम में सिर की चोट सामने आई। चोटों की उम्र भी दर्ज थी। ऐसे में शराब छोड़ने वाली थ्योरी पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
न्यायिक जांच ने भी खोली परत
22 जनवरी 2024 को जेल अधीक्षक ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र भेजकर न्यायिक जांच की मांग की। जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी को सौंपी गई। 22 जुलाई 2024 को विस्तृत रिपोर्ट सामने आई। इसमें भी राय दी गई कि श्रवण की मौत सिर की चोट से पैदा हुई जटिलताओं के कारण हुई प्रतीत होती है। यानी मेडिकल और न्यायिक जांच, दोनों एक ही दिशा में इशारा कर रहे थे।
रिपोर्ट मिली, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
अब सवाल राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर है। न्यायिक जांच रिपोर्ट 22 जुलाई 2024 को सामने आ चुकी थी। इसके बावजूद बाद में अगर यह कहा गया कि रिपोर्ट मिली ही नहीं, तो यह दावा खुद सवालों में घिर जाता है। कोर्ट ने भी अधिकारियों के इस तरह अनजान बने रहने पर गंभीर आपत्ति जताई है। सवाल हैकृरिपोर्ट मौजूद थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी टाइमलाइन
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वहां पेश केस डायरी में गिरफ्तारी, रिमांड, जेल में भर्ती, अस्पताल भेजे जाने और मौत की टाइमलाइन दर्ज है। इसी रिकॉर्ड के साथ पोस्टमार्टम और चोटों का विवरण भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट पहले भी पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राज्यों को नियमों के पालन की याद दिलाता रहा है। डीजीपी नियुक्ति के मामलों में भी प्रकाश सिंह फैसले और तय प्रक्रिया का पालन जरूरी माना गया है।
अब सवाल सिर्फ मौत का नहीं
मामला अब सिर्फ यह नहीं है कि श्रवण की मौत कैसे हुई। सवाल यह भी है कि उसकी असली हिरासत कब से थी? चोटें कब लगीं? गिरफ्तारी की तारीख सही है या नहीं? न्यायिक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और मौत को शराब छोड़ने से जोड़ने का आधार क्या था? श्रवण नहीं है, लेकिन उसकी चोटें रिकॉर्ड में हैं। पोस्टमार्टम रिकॉर्ड में है। न्यायिक जांच रिपोर्ट भी रिकॉर्ड में है। अब इन रिकॉर्ड से जवाब निकलना चाहिए।
इसलिए डीजीपी कहलाए अयोग्य
जिला पुलिस और जेल का सारा महकमा इस मामले को दबाने मंें जुट गया। इधर राज्य स्तर के अधिकारियों ने भी जांच और कार्रवाई करना उचित नहीं समझा। हाईकोर्ट में भी मामला सस्ते में निपट गया। जिसके बाद डीजीपी सहित पूरा गृह विभाग चैन की सांस ले रहा था कि मृतक की पत्नी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं। जहां पूरे मामले की बारिकी से जांच हुई और जब परते उधड़ी तो सुप्रीम कोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी को लताड़ लगा दी।
हिरासत का हर मिनट अहम
कस्टोडियल डेथ में हिरासत का हर मिनट अहम होता है। यहां गिरफ्तारी की तारीख, चोटों की उम्र, पोस्टमार्टम और न्यायिक जांच रिपोर्ट एक-दूसरे से टकराते दिख रहे हैं। अगर जांच निष्पक्ष है तो इन सवालों के जवाब भी रिकॉर्ड से ही निकलेंगे। सबसे बड़ा सवाल यही हैकृइतने साफ मेडिकल और न्यायिक रिकॉर्ड के बावजूद जिम्मेदारी तय करने में इतनी देर क्यों हुई?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में युवक की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में CBI ने जांच शुरु कर दी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 4 सदस्यीय टीम जांच के लिए पहुंची। चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने में रिकॉर्ड खंगाला और केस डायरी के साथ मजिस्ट्रियल जांच के दस्तावेज भी लिए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल भी पहुंची।
FAQ
- श्रवण सूर्यवंशी कौन था और यह मामला क्या है?
श्रवण सूर्यवंशी छत्तीसगढ़ का रहने वाला एक व्यक्ति था, जिसकी पुलिस हिरासत/जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले को छत्तीसगढ़ का एक चर्चित कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) केस माना जा रहा है। - श्रवण सूर्यवंशी मौत मामले में पुलिस रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तारीखों में क्या अंतर है?
पुलिस की केस डायरी के अनुसार श्रवण को 18 जनवरी 2024 को गिरफ्तार दिखाया गया था और उसकी मौत 22 जनवरी 2024 को हुई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर 6 दिन पुरानी तक के चोटों के निशान मिले, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस ने उसे 16 जनवरी से ही अवैध हिरासत में ले रखा था। - श्रवण सूर्यवंशी मौत मामले में जेल प्रशासन ने मौत की क्या वजह बताई थी?
जेल प्रशासन ने शुरुआत में दावा किया था कि श्रवण शराब पीने का आदी था और अचानक शराब छोड़ने (अल्कोहल विड्रॉल) की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया।
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