दंतेवाड़ा में नक्सलियों का बड़ा विस्फोटक डंप बरामद, टली बड़ी साजिश
Dantewada। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम तोड़मा के घने जंगलों में
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 195वीं वाहिनी और जिला पुलिस बल के संयुक्त जवानों ने एक बड़े नक्सली डंप को खोज निकाला है। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए भारी मात्रा में विस्फोटक, आईईडी बम और अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं।
खुफिया इनपुट पर जंगलों में घेराबंदी
बस्तर के अंदरूनी इलाकों में नक्सलियों की मौजूदगी और उनके किसी बड़े हमले की योजना को लेकर सुरक्षा बलों को लगातार खुफिया जानकारियां मिल रही थीं। इसी कड़ी में 6 जून को दंतेवाड़ा पुलिस और सीआरपीएफ को एक पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ। सूचना मिलते ही
दोनों बलों के जवानों ने बिना वक्त गंवाए एक संयुक्त रणनीति तैयार की और बारसूर थाना क्षेत्र के ग्राम तोड़मा के बीहड़ और घने जंगलों की तरफ कूच कर दिया। मानसून की दस्तक के बीच इन दुर्गम रास्तों पर आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जवानों ने पूरी सतर्कता बरतते हुए नक्सलियों के कोर इलाके में को चारों तरफ से घेर लिया।
तलाशी के दौरान मिला संदिग्ध डंप और बम
जवानों की टीमें जब सुबह के वक्त जंगल के भीतर गहन सर्चिंग अभियान चला रही थीं, तभी करीब 8:40 बजे एक जगह पर जमीन के नीचे और झाड़ियों के बीच कुछ संदिग्ध हलचल और बनावट दिखाई दी। जवानों ने फौरन अपनी पोजीशन ली और उस संदिग्ध स्थान की घेराबंदी मजबूत की।
खतरे को भांपते हुए मौके पर तत्काल बम डिस्पोजल स्क्वाड (BDS) को बुलाया गया। बीडीएस की टीम ने जब मेटल डिटेक्टर और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से जांच शुरू की, तो वहां नक्सलियों द्वारा छुपाए गए दो खतरनाक प्रेशर कुकर आईईडी (IED) और एक बेहद वजनी करीब 10 किलोग्राम का पाइप बम बरामद हुआ।
मौके पर ही विस्फोटकों को किया गया डिफ्यूज
नक्सलियों ने इन आईईडी और पाइप बम को इस तरह से प्लांट किया था कि अगर सुरक्षा बलों का पैर लग जाती, तो एक भयानक तबाही मच सकती थी। बम निरोधक दस्ते ने बेहद सूझबूझ और पेशेवर तरीके से काम करते हुए दोनों प्रेशर कुकर आईईडी और 10 किलो के पाइप बम को सुरक्षित रूप से निकाला।
इसके बाद बिना कोई जोखिम लिए, जंगल के ही एक सुरक्षित हिस्से में इन सभी विस्फोटकों को नियंत्रित ब्लास्ट के जरिए मौके पर ही निष्क्रिय (डिफ्यूज) कर पूरी तरह नष्ट कर दिया।
सर्चिंग में मिला हथियारों का जखीरा
शुरुआती कामयाबी के बाद सुरक्षा बलों ने यह भांप लिया कि इस इलाके में नक्सलियों का कोई बड़ा ठिकाना या डंप हो सकता है। इसके बाद सीआरपीएफ और दंतेवाड़ा पुलिस के जवानों ने पूरे इलाके में अतिरिक्त सर्चिंग ऑपरेशन शुरू किया। कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद जवानों को नक्सलियों का एक बहुत बड़ा जखीरा हाथ लगा। इस डंप से नक्सलियों के सैन्य साजो-सामान, संचार उपकरण, हथियार और भारी मात्रा में डेटोनेटर बरामद हुए।
बरामद घातक हथियारों और सामग्री की सूची
हथियार और मैगजीन: नक्सलियों के डंप से एक बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर), एक .303 रायफल, और एक एयर रायफल बरामद की गई है। इसके साथ ही .303 रायफल की मैगजीन, इंसास रायफल की मैगजीन और कई चार्जर क्लिप भी मिले हैं।
कारतूस और गोला-बारूद: भारी मात्रा में बीजीएल कारतूस के खाली केस, 12 बोर के जिंदा कारतूस (AMN), और .303 के ब्लैंक कारतूसों का बड़ा स्टॉक बरामद हुआ है। इसके अलावा एक अदद 51 एमएम का जिंदा बम और उसके दो खाली खोल भी मिले हैं।
ब्लास्टिंग और डेटोनेटर सामग्री: 128 नग इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 48 नग गैर-विद्युत (नॉन-इलेक्ट्रिक) विस्फोटक, भारी मात्रा में गन पाउडर, कोर्डेक्स वायर (विस्फोटक तार) और धमाके को ट्रिगर करने वाली इलेक्ट्रिक बेल जब्त की गई है।
तकनीकी और संचार उपकरण: नक्सलियों के बीच बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाले 4 नग वायरलेस सेट (बैटरी सहित) मिले हैं। इसके साथ ही सर्किट बनाने के लिए 9 नग इलेक्ट्रिक कंट्रोल यूनिट, 35 नग पेंसिल बैटरी (12 वोल्ट), 7 नग इलेक्ट्रिक स्विच, मल्टीमीटर, कैमरा फ्लैश और करीब 20 मीटर लंबा टेलीफोन का तार बरामद किया गया है।
दैनिक उपयोग और नक्सली साहित्य: जवानों ने मौके से एक दूरबीन, नक्सलियों की वर्दी गोला-बारूद रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली 4 थैलियां और कांबेट बेल्ट भी बरामद की है। इन सबके साथ ही भारी मात्रा में नक्सली साहित्य और प्रचार सामग्री भी जब्त की गई है, जिसका उपयोग वे ग्रामीणों को भड़काने और संगठन का विस्तार करने के लिए करते थे।
बेहतर तालमेल और टीमवर्क से मिली बड़ी सफलता
दंतेवाड़ा के स्थानीय पुलिस प्रशासन और सीआरपीएफ के उच्च अधिकारियों ने इस पूरे ऑपरेशन की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक टीम की नहीं, बल्कि दोनों बलों के बीच बेहतरीन तालमेल, खुफिया सूचनाओं के सटीक
और त्वरित आदान-प्रदान और मजबूत टीमवर्क का परिणाम है। बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के इस तरह के सप्लाई नेटवर्क और डंप को तोड़ना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं हथियारों के दम पर वे विकास कार्यों में बाधा डालते हैं और सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करते हैं।
नियमित रूप से जारी रहेंगे नक्सल विरोधी अभियान
इस बड़ी कामयाबी के बाद दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) ने मीडिया को बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के पैर उखाड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान अब और अधिक आक्रामक किए जाएंगे। पुलिस अधीक्षक ने साफ किया कि आने वाले दिनों में अंदरूनी और
सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की गश्त और उपस्थिति को और ज्यादा मजबूत किया जाएगा, ताकि नक्सली दोबारा वहां अपना पैर न पसार सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षा बल चैन से नहीं बैठेंगे।
FAQ
- कौन-कौन सा विस्फोटक बरामद हुआ?
प्रेशर कुकर आईईडी, पाइप बम (10 किलो), डेटोनेटर, गैर-विद्युत विस्फोटक, 51 एमएम बम। - ऑपरेशन कैसे हुआ?
खुफिया सूचना के आधार पर जंगल में तलाशी, संदिग्ध विस्फोटक की पहचान और तुरंत निष्क्रिय किया गया। - अभियान का असर क्या पड़ा?
नक्सलियों का बड़ा विस्फोटक जखीरा नष्ट हुआ और सुरक्षा बलों ने संभावित खतरे को रोका।
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