कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के भाई पर आरोप, 2 करोड़ में हड़पी 10 करोड़ की जमीन

Arun Tiwari | Aug 14, 2026, 15:35 IST
देवेंद्र यादव भिलाई हाउसिंग बोर्ड जमीन घोटाला
कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के भाई धर्मेंद्र यादव पर भिलाई में हाउसिंग बोर्ड की 10 करोड़ रुपये की जमीन 2 करोड़ में हथियाने का आरोप लगा है। सरकार ने जांच समिति गठित की है।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के विधायक देवेंद्र यादव के भाई पर हाउसिंग बोर्ड की जमीन हथियाने के आरोप लगे हैं। सरकार को मिली शिकायतों में कहा गया है कि धर्मेंद्र यादव ने हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर 10 करोड़ की जमीन को 2 करोड़ रुपए में खरीद लिया।



यह 15 हजार वर्ग फीट की जमीन भिलाई औद्योगिक नगर में है। शिकायत में यह आवंटन रद्द करने की मांग की गई है। सरकार ने इस मामले में जांच समिति गठित की है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की जाएगी। यह मामला अभी लंबित है।



क्या है पूरा मामला :

औद्योगिक क्षेत्र भिलाई के कालीबाड़ी क्षेत्र में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की जमीन के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में शिकायत करते हुए 15,171 वर्गफीट जमीन के आवंटन की प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से आवंटन करने की मांग की गई है।



शिकायत में गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों पर मिलीभगत और नियमों की अनदेखी करते हुए जमीन आवंटित करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सरकार को मिली शिकायत में कहा गया है कि हाउसिंग बोर्ड की इस जमीन के आवंटन में अधिकारियों ने षड्यंत्र के तहत विधि-विरुद्ध तरीके से प्रक्रिया अपनाई।



आरोप है कि जमीन का आवंटन भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक देवेंद्र यादव के परिवार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।



विधायक के भाई को जमीन देने का आरोप :

शिकायत में दावा किया गया है कि भिलाई हाउसिंग बोर्ड की जमीन धर्मेंद्र यादव को आवंटित करने में गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों की मिलीभगत रही। शिकायत के अनुसार, अधिकारियों ने विधि-विरुद्ध तरीके से प्रक्रिया आगे बढ़ाई और जमीन आवंटन की निविदा में विधायक देवेंद्र यादव के परिवार को शामिल कर जमीन आवंटित की गई।



शिकायतकर्ता ने इस मामले में अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया के कारण छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को राजस्व की हानि हुई।



10 करोड़ की जमीन 2 करोड़ में खरीदी:

शिकायत में कहा गया है कि जिस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य 10 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है, उसे महज 2 करोड़ 52 लाख 51 हजार रुपये में आवंटित किया गया। शिकायत में इसे जमीन की वास्तविक कीमत की तुलना में बेहद कम राशि बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि सरकारी जमीन को कौड़ियों के भाव देने से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।



शिकायत में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की गई है कि जमीन के मूल्य का निर्धारण किस आधार पर किया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय बनाने की मांग की गई है कि आवंटन प्रक्रिया में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था।



शिकायतकर्ता ने गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों के खिलाफ जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही 15,171 वर्गफीट जमीन के मौजूदा आवंटन को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए जमीन आवंटित करने की मांग रखी गई है।



सरकार का जवाब :

इस पूरे मामले पर सरकार ने अपना जवाब दिया है। वित्त और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के मुताबिक इस मामले में जांच समिति गठित की गई है। जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल मामला लंबित है।



हाउसिंग बोर्ड या करॅप्शन बोर्ड :

हाउसिंग बोर्ड के 55 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। दो विधायकों ने भी अधिकारियों की शिकायतें की हैं। यह शिकायतें पिछले तीन साल के दौरान सामने आई हैं। महासमुंद और जैजैपुर विधायक ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन शिकायतों पर जांच की कार्यवाही की है।



इन प्रमुखअधिकारियों की शिकायतें :

  • धर्मेश साहू,पूर्व आयुक्त, विभागीय स्तर पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन
  • अजीत पटेल,उपायुक्त, कार्यवाही लंबित
  • राजेश नायर,विक्रम यादव,विशाल मिश्रा, कार्यवाही प्रक्रियाधीन
  • आनंद मिश्रा पर ठेकेदारों से अवैध वसूली और भ्रष्टाचार, प्रकरण लंबित
  • पूनमचंद्र अग्रवाल,उपायुक्त,जांच लंबित

निष्कर्ष :

हाउसिंग बोर्ड में बड़े पैमाने पर शिकायतें आई हैं। सरकार का कहना है कि इन शिकायतों की जांच करा कार्यवाही की जा रही है। लेकिन सबसे जरुरी बात है कि गरीबों को सस्ते घर देने का जिम्मा संभालने वाला बोर्ड ही सबसे बड़े भ्रष्टाचार में डूबा रहेगा तो सुशासन का सपना कैसे पूरा होगा।



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