45 डिग्री तापमान में धधका धमतरी का जंगल, मची भारी तबाही
NEWS IN SHORT
- धमतरी के बिरगुड़ी वन क्षेत्र में भीषण आग लगी।
- तापमान 45 डिग्री होने से आग तेजी से फैली।
- ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए वन विभाग को सूचना दी।
- सूखी पत्तियों और तेज हवाओं ने मुश्किलें बढ़ा दीं।
- महुआ बीनने वालों की लापरवाही से आग की आशंका है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में नौतपा की दस्तक से पहले ही सूरज की तपिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री के जानलेवा तापमान के बीच धमतरी जिले के बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र से एक बड़ी दुर्घटना सामने आई है। यहाँ शुक्रवार सुबह अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते इस जंगल की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और वन विभाग के कंपार्टमेंट नंबर 435 का एक बहुत बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया। आग की लपटें इतनी गगनचुंबी थीं कि कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में धुएं का काला गुबार साफ देखा जा सकता था।
ग्रामीणों ने दिखाई सतर्कता
इस भीषण आपदा के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने सूझबूझ और सतर्कता का परिचय दिया। करइया और सारंगपुरी जंगल क्षेत्र के ग्रामीणों ने सबसे पहले जंगल के बीच से उठता हुआ भारी धुआं देखा। स्थिति की गंभीरता और वन्य जीवों के खतरे को भांपते हुए उन्होंने बिना वक्त गंवाए तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन अमला और फायर फाइटिंग टीम (दमकल कर्मी) भारी साजो-सामान के साथ मौके के लिए रवाना हुई और युद्धस्तर पर आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
सूखी पत्तियां और तेज हवाओं ने बढ़ाई मुश्किलें
जंगल की इस आग को बुझाने में प्रकृति भी बाधा बनती दिखी। भीषण गर्मी के कारण पूरा जंगल सूखा हुआ था। जमीन पर गिरी सूखी पत्तियां, सूखी लकड़ियां और दोपहर में चलने वाली तेज हवाओं ने घी का काम किया, जिससे आग तेजी से पूरे जंगल में फैलती चली गई। वन विभाग के कर्मचारियों को आग पर काबू पाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस घटना में भारी मात्रा में बहुमूल्य वनस्पति, औषधीय पौधे और छोटे वन्यजीवों (जैसे सरीसृप, पक्षी और उनके घोंसले) के जलकर नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। संकट की इस घड़ी में स्थानीय ग्रामीण भी अपनी जान जोखिम में डालकर वन अमले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आग बुझाने में सहयोग कर रहे हैं।
महुआ बीनने वालों की लापरवाही पर उठे सवाल
वन अधिकारियों ने कहा की आग लगने के वास्तविक कारणों की बारीकी से जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर यह आशंका है कि महुआ बीनने वालों या किसी राहगीर द्वारा जलती हुई बीड़ी-सिगरेट फेंकने की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ होगा। फिलहाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता आग को पूरी तरह नियंत्रित करने और इसे आसपास के दूसरे कंपार्टमेंट्स में फैलने से रोकने की है।"
वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीम देर शाम तक मौके पर डटी हुई थी और आग को पूरी तरह से काबू में करने के प्रयास जारी थे। इस घटना ने एक बार फिर गर्मी के मौसम में जंगलों की सुरक्षा और महुआ संग्रहण के दौरान बरती जाने वाली लापरवाहियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र की आग प्रशासन और नागरिकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 45 डिग्री तापमान और मानवीय लापरवाही ने मिलकर बहुमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचाया है। भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए ग्रामीणों में जागरूकता और वन विभाग की त्वरित निगरानी प्रणाली को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
यह खबरें भी पढ़ें...
डाक सेवा में एमपी का जलवा: यूपी-महाराष्ट्र को पछाड़कर मध्य प्रदेश बना नंबर वन
भारत का इकलौता डॉक्टर हनुमान मंदिर, जहां पवनपुत्र करते हैं भक्तों का इलाज
छत्तीसगढ़ सरकार ने JSW इस्पात के लिए आसान किया रास्ता, 1.40 हेक्टेयर जमीन को बनाया संरक्षित वन
राजभवन ट्राइबल सेल की शिफ्टिंग टली, मंत्री विजय शाह का 2.66 करोड़ का ऑफिस बना रोड़ा