धमतरी में गिरा शिक्षा का स्तर, 12 प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस
NEWS IN SHORT
धमतरी में खराब बोर्ड रिजल्ट पर प्रशासन का बड़ा एक्शन।
कलेक्टर की फटकार के बाद 12 प्राचार्यों को नोटिस।
स्कूलों में नियमित टेस्ट के बावजूद गिरा शिक्षा का स्तर।
औचक निरीक्षण बंद होने और सीमित कोचिंग से बिगड़ी व्यवस्था।
सुधार के लिए छात्रों का चार श्रेणियों में होगा वर्गीकरण।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ केधमतरी जिले में बोर्ड परीक्षा के निराशाजनक नतीजों के बाद प्रशासन ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। शिक्षा स्तर में आई भारी गिरावट और लापरवाही को देखते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने शिक्षा विभाग की आपात बैठक ली। कलेक्टर की सख्त नाराजगी के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अभय कुमार जायसवाल ने एक साथ 12 स्कूलों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है, जिससे पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
गिरते स्तर पर कलेक्टर की नाराजगी
धमतरी जिले में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए 'मिशन अव्वल' चलाया जा रहा था, लेकिन हाल ही में घोषित हुए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने इस मिशन की पोल खोलकर रख दी है। जिले के 10 से अधिक स्कूलों का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत से भी कम रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक तैनात थे, वहां भी आधे से अधिक बच्चे फेल हो गए।
समीक्षा बैठक के दौरान जब डीईओ ने बताया कि स्कूलों में हर महीने टेस्ट लिए जा रहे थे, तो कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि नियमित टेस्ट के बावजूद ऐसा कमजोर रिजल्ट क्यों आया? उन्होंने अधिकारियों और प्राचार्यों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य और पढ़ाई के साथ लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इन स्कूलों के प्राचार्यों को मिला नोटिस
कलेक्टर के निर्देश पर डीईओ ने बारना, दोनर, सोनझरी, सोरम, सेजेस कुरूद, देवपुर नगरी, बिरझुली और मोहरेंगा सहित कुल 12 स्कूलों के प्राचार्यों को नोटिस थमाया है। इन सभी स्कूलों का बोर्ड रिजल्ट बेहद खराब रहा है।
कमजोर मॉनिटरिंग और सीमित कोचिंग बनी वजह
इस गिरावट के पीछे कमजोर मॉनिटरिंग को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले 2-3 वर्षों से अधिकारियों द्वारा स्कूलों का औचक निरीक्षण बंद हो गया था, जिससे व्यवस्था में मनमानी बढ़ गई। इसके अलावा, बोर्ड परीक्षा के लिए चलाई जाने वाली स्पेशल कोचिंग भी बेहद सीमित दिनों (साल 2024 में 19 दिन और 2025 में केवल 21 दिन) के लिए ही आयोजित की गई, जिससे समय पर कोर्स पूरा नहीं हो सका।
सुधार के लिए नई रणनीति
भविष्य में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब अन्य सफल जिलों के मॉडल का अध्ययन कर एक नई कार्ययोजना तैयार की है:
चार श्रेणियों में वर्गीकरण: छात्रों को उनकी क्षमता के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा और उसी के अनुरूप विशेष रणनीति से तैयारी कराई जाएगी।
विशेष प्रश्न बैंक : कमजोर, मध्यम और मेधावी छात्रों के लिए अलग-अलग स्तर के क्वेश्चन बैंक तैयार किए जाएंगे।
डिजिटल पढ़ाई (यूट्यूब) : 9वीं और 11वीं के होनहार छात्रों को बोर्ड मेरिट में लाने के लिए यूट्यूब आधारित वीडियो कंटेंट का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे प्रमुख विषयों के 450 से अधिक वीडियो क्लिप तैयार किए गए हैं।
ब्लू प्रिंट पर फोकस : आगामी परीक्षाओं के लिए पूरी पढ़ाई बोर्ड के आधिकारिक ब्लू प्रिंट के आधार पर कराई जाएगी।
टाइमलाइन
- सत्र 2024-25: बोर्ड परीक्षा के लिए केवल 19-21 दिन की सीमित स्पेशल कोचिंग दी गई।
- मई 2026: नतीजे घोषित; 12 स्कूलों का रिजल्ट 50% से कम रहा।
- नतीजों के बाद: कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने गिरते स्तर पर नाराजगी जताते हुए आपात बैठक ली।
- बैठक के दौरान: हर महीने टेस्ट के बाद भी खराब रिजल्ट आने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगी।
- वर्तमान: कलेक्टर के निर्देश पर DEO ने 12 प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- आगे की योजना: छात्रों का वर्गीकरण, डिजिटल कंटेंट और ब्लू प्रिंट आधारित पढ़ाई की नई रणनीति लागू।
निष्कर्ष
धमतरी जिले में 'मिशन अव्वल' की विफलता और बोर्ड परीक्षाओं के निराशाजनक परिणामों ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है। कलेक्टर की सख्त नाराजगी और 12 प्राचार्यों को नोटिस जारी होना यह साफ करता है कि अब प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। आने वाले समय में नई रणनीति से सुधार की उम्मीद है।
FAQ
- धमतरी में अचानक क्या बड़ी कार्रवाई हुई?
खराब बोर्ड रिजल्ट (50% से कम) आने पर 12 स्कूलों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। - 'मिशन अव्वल' का संबंध किस क्षेत्र से है?
यह धमतरी जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने और बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम लाने के लिए चलाया गया अभियान है। - छत्तीसगढ़ में 'सेजेस' (SEGES) का पूरा नाम क्या है?
स्वामी आत्मानंद एक्सीलेंट गवर्नमेंट इंग्लिश स्कूल (Swami Atmanand Government Excellent English School)। - बोर्ड परीक्षाओं के लिए ब्लू प्रिंट का क्या महत्व होता है?
ब्लू प्रिंट से यह पता चलता है कि परीक्षा में किस चैप्टर से कितने अंकों के और कैसे (वैकल्पिक, लघु उत्तरीय या दीर्घ उत्तरीय) प्रश्न पूछे जाएंगे।
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