जैतपुरी में वन कर्मियों पर हमला, महिलाओं को बनाया ढाल
NEWS IN SHORT
- उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन पर हमला।
- अतिक्रमणकारियों ने कार्रवाई रोकने के लिए महिलाओं को आगे किया।
- हिंसक झड़प में कई महिला वनकर्मियों को चोटें आईं।
- कुल 166 अतिक्रमणकारियों में से 4 आरोपी गिरफ्तार हुए।
- शेष 162 आरोपियों ने पांच दिन में सरेंडर की बात कही।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कानून व्यवस्था को धता बताते हुए अतिक्रमणकारियों ने वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। जिले के अंतिम छोर पर स्थित जैतपुरी गांव में सोमवार को उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध कब्जे और पेड़ों की कटाई के मामले में कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। इस हिंसक झड़प में टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के साथ धक्का-मुक्की की गई और कई वनकर्मियों की वर्दी तक फाड़ दी गई।
सुनियोजित तरीके से महिलाओं को किया आगे
मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम जब आरोपियों को हिरासत में लेने गांव पहुंची, तो अतिक्रमणकारियों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत महिलाओं को ढाल की तरह आगे कर दिया। महिलाओं को आगे रखकर ग्रामीणों की भारी भीड़ ने वन अमले को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और ग्रामीणों ने टीम पर हमला बोल दिया। इस झूमाझटकी और हाथापाई में कुछ महिला वनकर्मियों को भी गंभीर चोटें आई हैं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाने की कोशिश की जा रही है।
166 अतिक्रमणकारियों पर है केस दर्ज
यह पूरा विवाद उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित कोर एंगेजमेंट एरिया में अवैध रूप से पेड़ काटने और वन भूमि पर कब्जा करने से जुड़ा है। प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कुल 166 ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें नोटिस जारी किया था।
कार्रवाई का मुख्य कारण: कुछ ग्रामीणों ने नोटिस का जवाब तो दिया था, लेकिन उनके बयान दर्ज नहीं हो पाए थे। इसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सोमवार को वन विभाग की विशेष टीम जैतपुरी गांव पहुंची थी।
4 आरोपी गिरफ्तार, बाकी 5 दिन में करेंगे सरेंडर
डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि शुरुआती कार्रवाई में टीम ने मौके से 4 मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद ही ग्रामीण भड़क गए और शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। हालांकि, इस भारी हंगामे और तनाव के बीच वन विभाग ने सूझबूझ से काम लिया।
अधिकारियों के मुताबिक, हमले के बाद हुए समझौते और दबाव के चलते बाकी बचे 162 अतिक्रमणकारियों ने आगामी 5 दिनों के भीतर खुद सरेंडर करने की बात कही है। फिलहाल, वन विभाग की शिकायत पर सिहावा थाने में शासकीय कार्य में बाधा डालने, मारपीट और बलवा करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
निष्कर्ष
जैतपुरी की घटना यह दर्शाती है कि वन संरक्षण और अतिक्रमण विरोधी अभियानों में सुरक्षा कितनी संवेदनशील है। कानूनी कार्रवाई के दौरान महिलाओं को ढाल बनाकर शासकीय टीम पर हमला करना बेहद चिंताजनक है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को कड़े रुख और पुख्ता सुरक्षा बल के साथ कदम उठाना होगा।
FAQ
- घटना कहाँ और कब हुई?
धमतरी जिले के जैतपुरी गांव में, सोमवार को। - वन विभाग की टीम पर हमला क्यों हुआ?
अवैध कब्जाधारियों को गिरफ्तार करने और बयान दर्ज करने गई टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। - ग्रामीणों ने हमले के लिए क्या रणनीति अपनाई?
कार्रवाई रोकने के लिए ग्रामीणों ने महिलाओं को ढाल बनाकर आगे कर दिया। - इस हमले में किसे चोटें आईं?
डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन से धक्का-मुक्की हुई और कुछ महिला वनकर्मी घायल हुईं।
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