शराब बंदी का नया मॉडल : बेचने वाले पर 50 हजार का दंड, मुखबिर को मिलेगा 25 हजार का इनाम

Umeshwari Baghel | May 10, 2026, 20:18 IST
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धमतरी में नशे के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया है। लगभग 1500 की आबादी वाला यह गांव कच्ची शराब के अवैध कारोबार से जूझ रहा था। एसडीओपी विपिन रंगारी की पहल पर पुलिस प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नशामुक्ति अभियान की शुरुआत की।

NEWS IN SHORT

  • हिंछापुर में नशामुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम
  • एसडीओपी विपिन रंगारी की पहल ने गांव को किया नशामुक्त
  • महिला स्व-सहायता समूहों का रहा अहम योगदान
  • ग्राम सभा के फैसले ने दिखाया सामूहिक संघर्ष का महत्व
  • हिंछापुर के उदाहरण से अन्य गांवों को मिल रही प्रेरणा

NEWS IN DETAIL

Dhamtari। छत्तीसगढ़धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक स्थित हिंछापुर गांव इन दिनों अपने नशामुक्ति अभियान के कारण चर्चा में है। लगभग 1500 की आबादी वाला यह गांव, जो पहले कच्ची शराब के अवैध कारोबार से जूझ रहा था, अब नशे के खिलाफ निर्णायक कदम उठा रहा है। (शराब बंदी) यह कदम पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन गया है, जिससे अन्य गांवों और शहरों को भी नशे के खिलाफ जागरूकता और संघर्ष की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।



कच्ची शराब के कारोबार से थी परेशानी

हिंछापुर में पिछले कई वर्षों से कच्ची शराब का अवैध निर्माण और विक्रय हो रहा था। इसके कारण गांव के युवाओं की जीवनशैली प्रभावित हो रही थी और पारिवारिक विवाद भी बढ़ रहे थे। कच्ची शराब के कारोबार के कारण गांव में न केवल युवा वर्ग, बल्कि महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। इस बुराई के प्रभाव से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि पूरे समाज में एक नकारात्मक माहौल पैदा हो रहा था।



एसडीओपी विपिन रंगारी की पहल

इस समस्या के समाधान के लिए नगरी एसडीओपी विपिन रंगारी ने कदम उठाया। उन्होंने न केवल पुलिस प्रशासन की ताकत का इस्तेमाल किया, बल्कि ग्रामीणों में जन-जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रयास किए। उन्होंने बताया कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि समग्र समाज को नुकसान पहुंचाता है। उनका मानना था कि समाज के प्रत्येक सदस्य को इस जड़ से (शराब बंदी) जूझने के लिए एकजुट होना होगा।



कठोर फैसले से बनी मिसाल

हिंछापुर में पुलिस प्रशासन ने ग्राम सभा का आयोजन किया, जिसमें सभी ग्रामीणों ने मिलकर अवैध शराब के खिलाफ कठोर फैसले लिए। इस विशेष ग्राम सभा में महिला, युवा और बुजुर्ग सभी ने अवैध शराब को गांव से हटाने का संकल्प लिया। निर्णय के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कच्ची शराब बनाते या बेचते हुए पाया जाता है, तो उस पर शराब बेचने पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा, अवैध शराब के कारोबार की जानकारी देने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा।



महिला शक्ति का योगदान

(शराब बंदी) इस नशा मुक्ति अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं ने घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने का काम किया। इसके साथ ही, गांव के सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इस फैसले का पूरी तरह से समर्थन किया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से यह मुहिम और भी सफल हो पाई है।



पुलिस प्रशासन का समर्थन

एसडीओपी विपिन रंगारी ने बताया कि पुलिस प्रशासन गांव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उनका मानना है कि यह गांव सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। हिंछापुर के ग्रामीणों की एकजुटता ने साबित कर दिया है कि जब समाज एकजुट होता है, तो किसी भी बुराई को जड़ से उखाड़ फेंकना मुमकिन है।



नशामुक्त गांव की दिशा में एक नया अध्याय

हिंछापुर ने जो कदम उठाए हैं, वे न केवल नशे के खिलाफ एक बड़ा संदेश दे रहे हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नई दिशा भी खोल रहे हैं। इस सफलता के बाद, अब अन्य गांव और क्षेत्र भी नशे के खिलाफ इस प्रकार की मुहिम चला सकते हैं, जिससे समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। हिंछापुर के इस संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि यदि सच्ची इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी बुराई मिटाई जा सकती है।



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सकारात्मक परिवर्तन की ओर एक नया कदम

हिंछापुर का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि जब एक पूरा समुदाय नशे के खिलाफ खड़ा हो जाता है, तो उसकी ताकत बहुत बड़ी होती है। यह गांव इस वक्त पूरे क्षेत्र में (liquor ban)नशामुक्ति की दिशा में सबसे प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। अब हिंछापुर न केवल एक शांतिपूर्ण और सुखी गांव के रूप में जाना जाएगा, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बनेगा।



FAQ

1. हिंछापुर में नशामुक्ति अभियान कब शुरू हुआ?


यह अभियान हाल ही में शुरू किया गया है, जिसमें पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर नशे के खिलाफ संघर्ष किया।



2. ग्राम सभा ने क्या निर्णय लिया?


ग्राम सभा ने अवैध शराब बनाने और बेचने पर 50,000 रुपये का दंड लगाने का निर्णय लिया।



3. महिलाओं की क्या भूमिका रही?


महिला स्व-सहायता समूहों ने जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई।



4. पुलिस ने कैसे मदद की?


पुलिस प्रशासन ने इस अभियान को पूरी तरह से समर्थन दिया और ग्रामीणों को जागरूक किया।



5. हिंछापुर में क्या बदलाव आए हैं?


अब हिंछापुर नशामुक्त गांव बन चुका है और कच्ची शराब का कारोबार समाप्त हो गया है।



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