11 करोड़ के धान की शॉर्टेज: अफसर बोले- सीपेज से कर दी भरपाई

Harrison Masih | Jul 14, 2026, 17:46 IST
धमतरी धान घोटाला 2026
धमतरी जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले के 100 खरीदी केंद्रों में करीब 35 हजार क्विंटल धान की सूखत दर्ज की गई थी, जिसकी कीमत लगभग 11 करोड़ रूपए आंकी गई।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले के 100 धान खरीदी केंद्रों में करीब 35 हजार क्विंटल धान सूखत (शॉर्टेज) के नाम पर कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 11 करोड़ है।



अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में यही सूखत शून्य दिखाई जा रही है, जिससे पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।



मामले को लेकर सहकारिता विभाग, खरीदी समितियों और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी थी, तो वह अचानक समाप्त कैसे हो गई।



धान उठाव में देरी बनी बड़ी वजह

जानकारी के अनुसार, जिले में खरीदे गए धान का समय पर उठाव नहीं हो सका। मई और जून की भीषण गर्मी के दौरान बड़ी मात्रा में धान खरीदी केंद्रों में ही पड़ा रहा।



धान उठाव पर लगी रोक और राइस मिलरों की धीमी प्रक्रिया के कारण लंबे समय तक खुले या गोदामों में रखे धान का वजन कम होने लगा। इसी वजह से जिले के विभिन्न केंद्रों में कुल मिलाकर करीब 35 हजार क्विंटल धान की सूखत दर्ज की गई थी।



शुरुआती रिपोर्टों में जिला स्तर पर भी इस नुकसान को स्वीकार किया गया था।



11 करोड़ के नुकसान से बढ़ी चिंता

35 हजार क्विंटल धान की कमी का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 11 करोड़ रुपये बताया गया। इतनी बड़ी कमी सामने आने के बाद संबंधित समितियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने की आशंका बढ़ गई थी।



सूत्रों के मुताबिक, इस नुकसान का वित्तीय भार समितियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर पड़ सकता था। यही वजह है कि मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई।



जीरो शॉर्टेज बनाने का खेल?

सूत्रों का दावा है कि नुकसान का आंकड़ा सामने आने के बाद समितियों पर कमी को समाप्त दिखाने का दबाव बनाया गया। इसके बाद धान की सूखत को रिकॉर्ड में शून्य दिखाने की प्रक्रिया शुरू हुई।



बताया जा रहा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस कमी को दूर दिखाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई और रिकॉर्ड में शॉर्टेज समाप्त कर दी गई।



सीपेज धान से भरपाई का दावा

जिला नोडल अधिकारी बी.पी. गोस्वामी ने स्वीकार किया है कि केंद्रों में सामने आई 35 हजार क्विंटल धान की सूखत की भरपाई सीपेज धान के माध्यम से की गई।



सीपेज धान से आशय ऐसे धान से है जो पहले से उपलब्ध था या विभिन्न कारणों से अतिरिक्त स्टॉक के रूप में मौजूद था। इसी धान को समायोजित कर कमी को पूरा किया गया।



अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के बाद जिले में धान की शॉर्टेज शून्य हो गई।



अब उठ रहे हैं कई सवाल

हालांकि इस दावे के बाद विवाद और गहरा गया है। सवाल यह उठ रहे हैं कि:



  • 35 हजार क्विंटल धान की वास्तविक कमी कैसे हुई?
  • यदि कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
  • सीपेज धान की मात्रा कहां से आई?
  • क्या इसकी वैधानिक अनुमति थी?

11 करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान को किस प्रक्रिया से समायोजित किया गया?



निष्पक्ष जांच की मांग

किसान संगठनों और क्षेत्र के जानकारों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि धान खरीदी जैसी संवेदनशील व्यवस्था में करोड़ों रुपये के नुकसान और बाद में उसके शून्य हो जाने की स्थिति की पारदर्शी जांच जरूरी है।



माना जा रहा है कि यदि मामले की विस्तृत जांच होती है तो धान खरीदी, भंडारण और उठाव व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।



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