सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध प्लाटिंग, पहली बार जांच रिपोर्ट में बसंत अग्रवाल का नाम

VINAY VERMA | Mar 25, 2026, 11:41 IST
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राजधानी के धरसींवा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और प्लाटिंग का बड़ा मामला सामने आया है। जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल सहित कई लोगों पर चारागाह, निस्तारी और जल स्रोत की जमीन पर अतिक्रमण कर प्लॉट काटने के आरोप हैं।

Raipur. राजधानी के धरसींवा क्षेत्र से जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी जमीनों पर कथित रूप से कब्जा कर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इस पूरे मामले में जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। बसंत पर चारागाह, निस्तारीकरण और जल क्षेत्र की भूमि पर बेजा कब्जा कर प्लाटिंग करने के आरोप लगे हैं। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट ने भू-माफियाओं और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग

आरोप है कि चारागाह और निस्तारी जमीन पर कब्जा किया गया। जल स्रोत वाली जमीन को भी नहीं छोड़ा गया। इन जमीनों को समतल कर प्लॉट काटे गए, फिर सड़कों का निर्माण कर उन्हें बेचने की तैयारी की गई।



आरटीआई से खुलीं परतें

आरटीआई के जरिए जांच रिपोर्ट सामने आई है। ग्राम गिरौद में कई खसरा नंबरों में गड़बड़ी मिली है। खसरा 644, 636, 634, 511/5 और 638 में अतिक्रमण मिला। ये सभी जमीनें शासकीय श्रेणी में दर्ज हैं। इनका उपयोग आम जनता के लिए होना था।



Land grabbing


कौन है बसंत अग्रवाल?

वैसे तो बसंत अग्रवाल खुद को युवा नेता बताते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में उनकी पहचान एक भू-माफिया के रूप में है। बसंत प्रदेश में एक बड़े कॉलोनाइजर के रूप में उभर रहे हैं। इनकी अधिकतर प्लाटिंग रायपुर ग्रामीण, धरसींवा क्षेत्र में ही है।



हाल ही में एक और जमीन घोटाला सामने आया था, जिससे बसंत अग्रवाल को भी जोड़ा गया था। हालांकि किसी रूप से बसंत अग्रवाल का नाम सामने नहीं आया था। हर साल गुड़ियारी में होने वाले धार्मिक आयोजन में इनकी बड़ी भूमिका रहती है।



ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से शिकायत कर रहे थे। किसानों ने कब्जे और प्लाटिंग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सड़क बनाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। लगातार दबाव के बाद प्रशासन हरकत में आया।



जांच में चौंकाने वाले खुलासे

तहसीलदार की जांच में कई बड़े तथ्य सामने आए। खसरा 511/5 में 6.39 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। इसमें से करीब 4.51 हेक्टेयर पर मुरूम डाल दिया गया, फिर वहां रास्ता बनाकर प्लाटिंग की तैयारी की गई।



60 फीट सड़क, किनारे प्लॉट

कई जगह 60 फीट चौड़ी सड़क बनाई गई। सड़क के दोनों ओर प्लॉट काटे गए। यह पूरा काम योजनाबद्ध तरीके से हुआ। जल स्रोत की जमीन को भी समतल किया गया।



सिर्फ एक नाम नहीं, पूरा नेटवर्क

मामले में भू-माफिया बसंत अग्रवाल के अलावा और भी नाम सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में पूनम चौधरी, ओमप्रकाश सरवैया, कसलाल साहू, पुष्पा पटेल, दर्शना पटेल पर भी आरोप हैं। उन्होंने बाउंड्री वॉल बनाकर कब्जा किया। इससे संगठित गिरोह की आशंका बढ़ी है।



प्रशासन की कार्रवाई शुरू

मामले में एसडीएम नंदकुमार चौबे ने सख्ती दिखाई है। तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई के अनुसार संबंधित लोगों को नोटिस जारी होंगे। तीन बार नोटिस के बाद भी अगर कोई जवाब नहीं मिलेगा, तो कार्रवाई की जाएगी।



सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी

इतने बड़े स्तर पर कब्जा कैसे हुआ? प्रशासन को पहले जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या प्रशासनिक मिलीभगत से यह खेल चलता रहा? स्थानीय पटवारी को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी?



आगे क्या

अब इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। अगर सख्ती हुई तो कई बड़े नाम फंस सकते हैं, वरना यह मामला भी फाइलों में दब सकता है। धरसींवा का यह खुलासा पूरे सिस्टम पर सवाल है।



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