डीएमएफ घोटाला: ईडी की रेड में 1 करोड़ से ज्यादा कैश जब्त, बड़े नामों पर खतरा!
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाले में ED को बड़ी सफलता मिली है। 5 जिलों के 9 ठिकानों पर छापेमारी में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश जब्त हुआ है। यह कार्रवाई करीब 575 करोड़ रुपए के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई। कोरबा और धमतरी के ठिकानों से सबसे ज्यादा पैसा मिला है। गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
9 ठिकानों पर पड़े छापे
ED यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED - Enforcement Directorate) की टीमों ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर में एक साथ छापेमारी की। कुल 9 ठिकानों पर दबिश दी गई।
इनमें 4 आवासीय परिसर और 5 कारोबारियों के व्यापारिक ठिकाने शामिल थे। सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF (CRPF - Central Reserve Police Force) के जवान भी तैनात रहे। सबसे ज्यादा कैश कोरबा और धमतरी के ठिकानों से बरामद हुआ है।
किन-किन के यहां हुई जांच
रायपुर के वल्लभ नगर में कारोबारी शाश्वत लुणावत के घर पर छापा पड़ा। किशोर एग्रो से जुड़े लुणावत के अन्य ठिकाने भी खंगाले गए। धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के निवास पर ED की टीम पहुंची। रायपुर में कारोबारी प्रकाश सालुंके के यहां भी जांच हुई।
अंबिकापुर में मानसून एग्रो के प्रमोटर और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के फर्म पर छापा पड़ा। राकेश गुप्ता कृषि विभाग के बड़े सप्लायर बताए जाते हैं। पूर्व भूपेश सरकार के कार्यकाल में उनके फर्म से हुई सप्लाई की भी जांच हो रही है।
क्या है DMF घोटाला?
जिला खनिज न्यास यानी DMF (DMF - District Mineral Foundation) वह फंड है जो खनन से होने वाली आय का हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए रखा जाता है।
EOW यानी आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW - Economic Offences Wing) ने ED की रिपोर्ट के आधार पर धारा 120-बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है।
आरोप है कि कोरबा जिले के DMF फंड में अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं हुईं। ठेकेदारों को अवैध फायदा पहुंचाया गया।
40 फीसदी तक कमीशन का आरोप
ED की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को ठेके की राशि का 25 से 40 फीसदी तक कमीशन दिया।
रिश्वत की रकम की एंट्री आवास खर्च यानी अकोमोडेशन के रूप में दिखाई गई थी। ED को आशंका है कि DMF फंड को ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों के जरिए डायवर्ट किया गया।
किन नामों पर ED की नजर
ED के तथ्यों के अनुसार टेंडर भरने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल और ऋषभ सोनी शामिल हैं। बिचौलियों में मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर के नाम आए हैं।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
DMF मामले में पहले भी बड़े नाम जांच के दायरे में आ चुके हैं। पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी के नाम पहले भी जांच में शामिल किए गए थे।
2024 और 2025 में भी ED ने DMF घोटाले में छत्तीसगढ़ के कई ठिकानों पर छापे मारे थे। उन कार्रवाइयों में करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
आगे क्या होगा
ED अब बरामद दस्तावेजों, बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य की फोरेंसिक जांच कर रही है। एजेंसी पूरे मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और उसके लाभार्थियों का पता लगाना चाहती है।
बरामद सबूतों के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। 16 जून की कार्रवाई पर ED की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है।
FAQ
- DMF घोटाला क्या है?
DMF यानी जिला खनिज न्यास फंड है जो खनन क्षेत्रों के विकास के लिए होता है। इस मामले में कोरबा जिले के DMF फंड में टेंडर आवंटन में अनियमितताओं का आरोप है। EOW ने ED की रिपोर्ट के आधार पर 575 करोड़ रुपए के घोटाले का केस दर्ज किया है। - DMF मामले में अब तक किन पर कार्रवाई हो चुकी है?
पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी पहले जांच में आ चुके हैं। 2024-25 में भी ED ने करोड़ों की संपत्तियां अटैच की थीं। अब राकेश गुप्ता, शाश्वत लुणावत और दीपेश गांधी के ठिकाने भी जांच के दायरे में हैं।
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