होटल में जबरन घुसी पुलिस, मालिक को बिना FIR भेजा जेल, हाईकोर्ट ने ठोका 1 लाख का जुर्माना

Harrison Masih | Jan 24, 2026, 12:10 IST
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दुर्ग जिले के एक होटल में बिना FIR जबरन घुसकर होटल मालिक को गिरफ्तार करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।

NEWS IN SHORT

  • दुर्ग के होटल में बिना FIR पुलिस की जबरन एंट्री और होटल मालिक की गिरफ्तारी का मामला सामने आया।
  • गुमशुदा लड़की की तलाश के नाम पर पुलिस ने होटल स्टाफ से बदतमीजी और मारपीट की।
  • बिना महिला पुलिस के कमरे में घुसकर महिला-पुरुष को बाहर निकाला गया।
  • हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए पुलिस पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।
  • सरकार को दोषी पुलिस अफसरों के वेतन से रकम वसूलने की छूट दी गई।

NEWS IN DETAIL

होटल में जबरन घुसी पुलिस

Durg.जिले के कोहका क्षेत्र स्थित एक होटल में 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारियों ने जबरदस्ती प्रवेश किया। पुलिस गुमशुदा लड़की की तलाश में होटल पहुंची थी। इस दौरान होटल मैनेजर से बदतमीजी की गई और बिना महिला पुलिस बल के एक कमरे में घुसकर वहां ठहरे महिला-पुरुष को बाहर निकाल दिया गया।



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बिना FIR गिरफ्तारी और मारपीट

पुलिस ने होटल कर्मचारियों पर आभूषण चोरी का झूठा आरोप लगाया। CCTV जांच के बजाय पुलिस ने तलाशी के नाम पर होटल मैनेजर की पिटाई की। बाद में होटल मालिक आकाश कुमार साहू को बुलाया गया, जिनके साथ गाली-गलौज, मारपीट कर बिना FIR के जेल भेज दिया गया।पुलिस का कहना था कि आकाश साहू ने सरकारी कार्य में बाधा डाली, पुलिस वाहन की चाबी छीनी और ड्राइवर से हाथापाई की। इसी आधार पर BNS की धारा 170 के तहत हिरासत में लिया गया।



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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध दर्ज नहीं था। महज संदेह और कहासुनी के आधार पर गिरफ्तारी को कोर्ट ने असंवैधानिक (Illegal arrest) बताया। कोर्ट ने कहा कि बिना कारण गिरफ्तारी अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने SDM की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी की तरह काम करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने पुलिस रिपोर्ट पर आंख बंद कर मुहर लगा दी।



मुआवजा और जिम्मेदारी तय

कोर्ट ने सभी आपराधिक कार्रवाई रद्द करते हुए राज्य सरकार को 4 सप्ताह में ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। देरी पर 9% ब्याज देना होगा। सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों से यह राशि वसूल सकती है।



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Sootr Knowledge

  • बिना FIR किसी व्यक्ति को जेल भेजना असंवैधानिक है।
  • होटल में तलाशी के लिए वैधानिक प्रक्रिया और महिला पुलिस की मौजूदगी जरूरी है।
  • गिरफ्तारी के समय लिखित कारण बताना कानूनी अनिवार्यता है।
  • मजिस्ट्रेट की भूमिका न्यायिक संतुलन बनाए रखने में अहम होती है।
  • अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट सीधे मुआवजा दे सकता है।

Sootr Alert

  • होटल, लॉज और गेस्ट हाउस संचालकों को अपने अधिकारों की जानकारी रखना जरूरी है।
  • अवैध पुलिस कार्रवाई पर तुरंत कानूनी सहायता लें।

IMP FACTS

  • मामला: दुर्ग जिला, कोहका
  • पीड़ित: आकाश कुमार साहू (होटल संचालक)
  • जुर्माना: ₹1,00,000
  • ब्याज: 9% वार्षिक (देरी पर)
  • बेंच: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल

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आगे क्या

  • गृह विभाग दोषी पुलिस अधिकारियों की जांच करेगा।
  • दोष सिद्ध होने पर वेतन से मुआवजा वसूला जाएगा।
  • पुलिस को मानवाधिकारों पर प्रशिक्षण देने के निर्देश।

निष्कर्ष

यह मामला पुलिसिया अत्याचार और शक्तियों के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। हाईकोर्ट का फैसला न केवल पीड़ित को राहत देता है, बल्कि पुलिस और प्रशासन के लिए कड़ा संदेश भी है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। ऐसे फैसले लोकतंत्र और संविधान पर जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं।



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