अफीम कांड से चर्चा में आए समोदा सरपंच बर्खास्त; हत्या के प्रयास जैसे गंभीर केस छिपाने पर गिरी गाज
NEWS IN SHORT
- दुर्ग अफीम कांड के सरपंच अरुण गौतम का निर्वाचन रद्द
- कोर्ट ने शपथ-पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने का आरोप लगाया
- पंचायत निर्वाचन नियमों का उल्लंघन, रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय गलत
- अरुण गौतम के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत गंभीर आपराधिक मामले
- उप-चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश, रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी
NEWS IN DETAIL
Durg। अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद चर्चा में आए दुर्ग जिले के समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम को कोर्ट ने बर्खास्त कर दिया है। कोर्ट ने उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया है। अरुण गौतम पर आरोप था कि उन्होंने अपने शपथ-पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी, जो पंचायत निर्वाचन नियमों का उल्लंघन था।
पंचायत निर्वाचन नियमों का उल्लंघन
5 मई 2026 को जारी आदेश में कोर्ट ने पाया कि अरुण गौतम ने अपने नामांकन पत्र के साथ जो शपथ-पत्र दिया था, उसमें अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की सही जानकारी नहीं दी थी। इसे पंचायत निर्वाचन नियमों का उल्लंघन माना गया।
आपराधिक मामलों का खुलासा
याचिका में भुनेश्वरी देशमुख ने यह आरोप लगाया था कि अरुण गौतम ने चुनाव में अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि को छुपाया था। पुलगांव थाने में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इन मामलों में धारा 147, 148, 149, 307, 323, 294, 506 भा.दं.वि. जैसे गंभीर आरोप शामिल थे, जिनमें हत्या के प्रयास की धारा 307 भी शामिल है।
कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गलत ठहराया
कोर्ट ने सुनवाई के बाद यह भी माना कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस तरह से आपत्ति को खारिज किया, वह नियमों के खिलाफ था। इसके साथ ही, अरुण गौतम का सरपंच के रूप में निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया गया।
उप-चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश
कोर्ट ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग को उप-चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने को भी कहा गया है।
परिणाम: अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि उनकी प्रतिद्वंदी भुनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे।
क्या है अफीम कांड
CG NDPS Act case :दुर्ग के समोदा में मक्के की फसल की आड़ में करीब 5 से 6 एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी, जिसकी कीमत लगभग 8 करोड़ रुपए आंकी गई थी. इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने भाजपा नेता विनायक ताम्रकर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि जोधपुर का मुख्य आरोपी अचला राम जाट फरार चल रहा है. प्रशासन की मौजूदगी में इन पौधों को नष्ट किया गया और पुलिस ने (NDPS Act) एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी की तलाश तेज कर दी थी।
निष्कर्ष
यह फैसला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो चुनाव प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करते और अपने आपराधिक मामलों को छिपाते हैं।
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