छत्तीसगढ़ में शिक्षा का बदलता ट्रेंड, बीएड और नर्सिंग की सीटों के लिए घटे दावेदार
NEWS IN SHORT
- बीएड आवेदकों की संख्या 1.80 लाख से घटकर 84 हजार हुई।
- कोर्स की अवधि एक से दो वर्ष होना मुख्य कारण।
- छात्र नई शिक्षा नीति के तहत अगले साल का इंतजार कर रहे।
- बीएससी नर्सिंग और फार्मेसी में भी आवेदनों में भारी गिरावट आई।
- सरकारी कॉलेजों में सीटों की कमी से छात्रों में बढ़ी उदासीनता।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों के रुझान होने के कारण इस वर्ष बीएड, डीएड और बीएससी नर्सिंग जैसे प्रमुख कोर्सेज में आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से छात्रों की बढ़ती दूरी
छत्तीसगढ़ में इस साल व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाओं के आंकड़ों ने शिक्षा जगत को चिंता में डाल दिया है। राज्य के प्रमुख प्रोफेशनल कोर्सेज में प्रवेश के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधी रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्स की अवधि में बदलाव और भविष्य की अनिश्चितताओं ने छात्रों को इन क्षेत्रों से दूर किया है।
प्रमुख पाठ्यक्रमों में आवेदनों की स्थिति
आवेदनों में सबसे बड़ी गिरावट बीएड (B.Ed) और डीएड (D.Ed) में देखी गई है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष की स्थिति निम्नलिखित है:
इसके अलावा, पॉलीटेक्निक में भी आवेदनों की संख्या 20 हजार से घटकर 13 हजार रह गई है। पीईटी (PET) और एमसीए (MCA) जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
गिरावट के मुख्य कारण
शिक्षाविद डॉ. जवाहर सूरी शेट्टी के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
1. कोर्स की अवधि का बढ़ना: छत्तीसगढ़ में पहले बीएड एक वर्ष का था, जो अब दो वर्ष का कर दिया गया है। इससे अन्य राज्यों (जैसे गुजरात, राजस्थान) से आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है।
2.नई शिक्षा नीति (NEP) का प्रभाव: एनईपी के तहत अगले साल से बीएड के फिर से एक वर्षीय होने की संभावना है। छात्र इस उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं कि अगले साल प्रवेश लेने पर उनका समय बचेगा।
3. सीटों का अभाव और निजीकरण: राज्य में बीएड की कुल 14 हजार 600 सीटों में से सरकारी कॉलेजों में केवल 350 सीटें ही उपलब्ध हैं। निजी कॉलेजों की भारी फीस और सीमित सरकारी संसाधनों के कारण छात्रों की उदासीनता बढ़ी है।
4. रोजगार की अनिश्चितता: फार्मेसी और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए कॉलेज खुलने और गुणवत्तापूर्ण प्लेसमेंट की कमी ने भी छात्रों को सोचने पर मजबूर किया है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने इसे एक चिंताजनक विषय बताया है। यदि समय रहते इन प्रोफेशनल कोर्सेज की संरचना और भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सरकार और नीति निर्माताओं को छात्रों का रुझान वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
MP उच्च शिक्षा में CR घोटाला? नियमों के खिलाफ सालों से समकक्ष ही लिख रहे गोपनीय रिपोर्ट, विभाग खामोश
कॉलेज कैंपस में जानवर दिखे तो प्राचार्य होंगे जिम्मेदार, उच्च शिक्षा विभाग ने लगाई ड्यूटी
स्कूल, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा में आरक्षण, ITI गेस्ट इंस्ट्रक्टर से पक्षपात
एमपी विधानसभा में उच्च शिक्षा पर दोहरी चर्चा : 140 पद खाली तो कहीं 27.50 करोड़ के भुगतान पर सवाल