हाथी-मानव संघर्ष: 26 साल, 972 की मौत, जानिए झारखंड से आए 400 हाथियों का पूरा सच

Aishwarya Dwivedi | Aug 12, 2026, 13:11 IST
हाथी के हमले और माइनिंग से जुड़ी रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में खनन के कारण झारखंड से आए 400 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी 16 जिलों में दर्ज है। बीते 26 वर्षों में हाथी-मानव संघर्ष के कारण 972 लोगों की मौत हो चुकी है।

समझें क्या है पूरा मामला

विश्व हाथी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर स्थिति सामने आई है। राज्य में पिछले 26 वर्षों में हाथियों के हमलों से 972 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 60 साल तक गायब रहने के बाद 1988 में हाथी फिर लौटे। पड़ोसी राज्यों में खनन बढ़ने से हाथियों ने छत्तीसगढ़ का रुख किया। अब राज्य के 16 जिलों में लगभग 400 हाथी मौजूद हैं।



छत्तीसगढ़ में हाथियों की वापसी

छत्तीसगढ़ में 20वीं सदी की शुरुआत में स्थानीय हाथी खत्म हो गए थे। लगभग 60 साल तक राज्य में कोई हाथी नहीं था। वर्ष 1988 में हाथियों का पहला दल सरगुजा के रास्ते आया। अविभाजित बिहार के पलामू और सिंहभूम में खनन बढ़ गया था। खदानों के कारण हाथियों ने अपना पुराना इलाका छोड़ दिया।



इसके बाद हाथियों की आवाजाही लगातार जारी रही। वर्ष 1995 के बाद उनका आना नियमित हो गया। हाथी झारखंड से ओडिशा के बीच आने-जाने लगे। जशपुर को राज्य में हाथियों का प्रवेश द्वार कहा जाता है। सरगुजा, रायगढ़ और जशपुर इनके मुख्य रास्ते बने। धीरे-धीरे हाथी राज्य के दूसरे जिलों में फैल गए।



विश्व हाथी दिवस


16 जिलों में 400 हाथी

वर्तमान में राज्य के 16 जिलों में करीब 400 हाथी मौजूद हैं। इनका दायरा अब बिलासपुर और रायपुर के पास तक पहुंच गया है। हाथियों की आवाजाही के लिए नौ कॉरिडोर बनाए गए हैं। सरगुजा और बिलासपुर संभाग में हाथी स्थाई रूप से रह रहे हैं।



देश के कुल हाथियों में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी केवल 1 से 2 प्रतिशत है। इसके बावजूद हमलों में होने वाली मौतों में राज्य का हिस्सा 12 से 15 प्रतिशत है। वर्ष 2001 से 2026 तक हादसों में 972 आम लोगों की जान गई है। इस दौरान 262 हाथियों की भी मौत हुई है। इनमें से 62 हाथियों की जान करंट लगने से गई है।



विश्व हाथी दिवस


बचाव और जागरूकता के प्रयास

छत्तीसगढ़ में लंबे समय बाद हाथी लौटे हैं। इस कारण स्थानीय लोगों को बचाव की सही जानकारी नहीं थी। केरल जैसे राज्यों में लोग पीढ़ियों से हाथियों के साथ रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ के लोगों को भी यह सीखना होगा।



हल्ला पार्टी बनाकर हाथियों को खदेड़ना गलत तरीका है। हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में भीड़ को रोकना जरूरी है। जंगलों में पानी और चारे का इंतजाम किया जा रहा है। सरकार ने प्रभावित गांवों में हाथी मित्र दल बनाए हैं।



रेडियो और ऐप के जरिए लोगों को रियल टाइम अलर्ट दिए जाते हैं। बिजली की लाइनों को ठीक करके करंट से मौतें रोकने की कोशिश हो रही है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में हाथी किस राज्य से और क्यों आए?
    उत्तर: हाथी मुख्य रूप से झारखंड के पलामू और सिंहभूम के जंगलों से आए। वहां खदानें और औद्योगिक प्रोजेक्ट बढ़ने के कारण हाथियों ने छत्तीसगढ़ के सरगुजा और जशपुर के जंगलों में शरण ली।
  2. छत्तीसगढ़ में हाथियों के हमलों में अब तक कितने लोगों की जान गई है?
    उत्तर: वर्ष 2001 से 2026 के बीच हाथियों के हमलों में 972 लोगों की मौत हुई है। वहीं 1988 से अब तक का कुल आंकड़ा करीब 1100 मौतों का है।
  3. सरकार हाथियों के हमलों से बचाव के लिए क्या कदम उठा रही है?
    उत्तर: सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में हाथी मित्र दल बनाए हैं और 9 कॉरिडोर चिह्नित किए हैं। इसके अलावा 'गज संकेत' ऐप, वॉट्सऐप और कॉल के जरिए लोगों को अलर्ट भेजा जाता है।

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