छत्तीसगढ़ में दो साल में एसटी एसटी के महज 6 हजार युवाओं को मिला काम, रोजगार मंत्री के क्षेत्र में सिर्फ 55 लोगों की ट्रेनिंग
हम बात कर रहे हैं पिछले दो साल में स्किल डेवलपमेंट के जरिए अनुसूचित जाति और जनजाति के युवाओं को मिले रोजगार की। साल 2024 से 2026 जनवरी तक के यानी दो साल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 6 हजार युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार के जरिए काम दिया गया। अब इतने बड़े प्रदेश में दो साल में सिर्फ 6 हजार को काम मिलने का आंकड़ा कुछ ठीक नहीं कहा जा सकता। इसमें रोजगार मंत्री विधानसभा क्षेत्र आरंग में ये स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग लेने वाले युवा 55 हैं। प्रदेश में 15 लाख से ज्यादा बेरोजगार हैं तो इनका क्या होगा।
दो साल का रोजगार रिपोर्ट कार्ड
हम आपको यहां पर दो साल का रिपोर्ट कार्ड दिखा रहे हैं। खास तौर पर यह रिपोर्ट कार्ड अनुसूचित जाति और जनजाति का ही है। रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के रोजगार विभाग के ही यह आंकड़े हैं। सरकारी नौकरी की बात तो छोड़िए ये आंकड़े स्किल डेवलपमेंट और उससे मिले रोजगार के हैं। साल 2023-24 से जनवरी 2026 तक के हैं। इस दौरान एससी एसटी के 9760 युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी। इनमें से 5966 युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया। सवाल यहां पर यह है कि एक तो इतने कम लोगों को स्किल्ड किया गया और जिनको किया गया उन सभी को काम भी नहीं मिल पाया।
इन मंत्रियों के क्षेत्र में इतनों को ट्रेनिंग
- सीएम का क्षेत्र कुनकुरी - 18
- डिप्टी सीएम विजय शर्मा,कवर्धा - 82
- डिप्टी सीएम अरुण साव, लोरमी - 11
- वित्त मंत्री ओपी चौधरी,रायगढ़ - 113
- टंकराम वर्मा - 71
- रामविचार नेताम, रामानुजगंज - 37
- केदार कश्यप,नारायणपुर - 300
- श्याम बिहारी जायसवाल,मनेंद्रगढ़ - 14
- दयालदास बघेल,नवागढ़ - 21
- लखनलाल देवांगन,कोरबा - 220
- गुरु खुशवंत साहेब,आरंग - 55
- गजेंद्र यादव,दुर्ग - 255
- राजेश अग्रवाल,अंबिकापुर - 368
- लक्ष्मी रजवाड़े,भटगांव - 77
रोजगार सबसे बड़ी चुनौती
सरकार के सामने रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार का रोजगार मॉडल निवेश पर आधारित है। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में नवंबर 2024 से अब तक 18 क्षेत्रों में 7.83 लाख करोड़ रूपए के 219 निवेश प्रस्ताव मिले है। जिनसे 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे। लेकिन सवाल यह है कि निवेश प्रस्ताव तो मिल रहे हैं लेकिन ये जमीन पर कब उतरेंगे। जब उद्योग लगेंगे तभी रोजगार हासिल होगा। सरकार महतारी वंदन पर अब तक करोड़ों राशि बांट चुकी है। इससे कहीं ज्यादा किसानों को मुफ्त सुविधाएं और बोनस की राशि पर खर्च हो रहा है।
अब आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। औद्योगिक निवेश की धीमी गति, सरकारी भर्तियों में देरी, निजी क्षेत्र में नए अवसरों की कमी और कौशल विकास योजनाओं का अपेक्षित परिणाम न दे पाना प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार की घोषणाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं दिख रहे। सरकार अब रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात तो कर रही है लेकिन कोई ठोस रोजगार मॉडल खड़ा नहीं हो पा रहा है। सरकार को इस रोजगार फंड को रोजगार देने में खर्च करना होगा।
- पिछले दो साल में अनुसूचित जाति और जनजाति के युवाओं को कितने रोजगार मिले हैं?
साल 2024 से 2026 जनवरी तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित जाति और जनजाति के करीब 6 हजार युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार के जरिए काम दिया गया है। - कौशल विकास की ट्रेनिंग कितने युवाओं को दी गई थी, कितनों को रोजगार मिला?
इस दौरान एससी एसटी के 9760 युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी गई थी, जिनमें से 5966 युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया। - छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी के बढ़ने के पीछे कौन से प्रमुख कारण हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे औद्योगिक निवेश की धीमी गति, सरकारी भर्तियों में देरी, निजी क्षेत्र में नए अवसरों की कमी और कौशल विकास योजनाओं का अपेक्षित परिणाम न दे पाना मुख्य कारण हैं।