छत्तीसगढ़ प्लेसमेंट विवाद : ऑफर लेटर मिला पर नहीं मिली नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के निजी कॉलेजों में प्लेसमेंट के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हजारों छात्रों को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी जॉइनिंग नहीं दी गई। कंपनियों ने महीनों इंतजार कराने के बाद ई-मेल भेजकर भर्ती रद्द कर दी। दूसरी नौकरियों के मौके गंवाने से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। आईआईटी की तरह सख्त नियम और जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
प्लेसमेंट मिला पर जॉइनिंग नहीं
छत्तीसगढ़ के युवाओं के साथ एक बड़ा छल सामने आया है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैंपस ड्राइव आयोजित हुई थी। इसमें करीब 16 हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। कॉलेजों ने दावा किया कि आठ हजार छात्रों का चयन हुआ है। लेकिन चयनित युवाओं को महीनों बाद भी जॉइनिंग नहीं मिली। लंबे इंतजार के बाद कंपनियों ने भर्ती रद्द कर दी। कंपनियों ने छात्रों को ई-मेल भेजकर यह जानकारी दी। इससे कॉलेजों की प्लेसमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दूसरे अवसर भी हाथ से निकले
छात्रों ने ऑफर लेटर मिलने के बाद दूसरी जगह आवेदन नहीं किया। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही जॉइनिंग की तारीख आएगी। कंपनी के फैसले से उनके कई बेहतर मौके हाथ से निकल गए। इससे उनकी करियर की शुरुआत पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
दुर्ग के एक निजी कॉलेज के छात्र रोहित की कहानी दुखद है। कंप्यूटर साइंस के रोहित का चयन एक आईटी कंपनी में हुआ था। छह महीने इंतजार के बाद कंपनी ने भर्ती प्रक्रिया ही रद्द कर दी।
रायपुर की छात्रा नेहा का चयन इलेक्ट्रॉनिक्स शाखा से हुआ था। कंपनी ने प्रोजेक्ट रुकने का बहाना बनाकर नियुक्ति टाल दी। लंबे इंतजार के बाद उन्हें दूसरी जगह नौकरी खोजनी पड़ी।
मैकेनिकल के छात्र अमन ने भी दूसरा इंटरव्यू नहीं दिया। कंपनी ने भर्ती अगले वित्तीय वर्ष तक टाल दी। इस वजह से अमन आठ महीने तक बेरोजगार रहे।
आईआईटी ने दिखाई सख्ती
देश के आईआईटी (IIT – Indian Institute of Technology) संस्थानों ने ऐसी कंपनियों पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। कुछ कंपनियों को कैंपस से ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ के निजी कॉलेजों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए नियम नहीं बने हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ चयन का आंकड़ा काफी नहीं है।
तकनीकी शिक्षा विभाग को जॉइनिंग का भी रिकॉर्ड रखना चाहिए। भर्ती रद्द करने वाली कंपनियों को बैन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रभावित छात्रों को हर्जाना मिलना चाहिए।
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