स्कूल लौटो मिशन पर शिक्षा विभाग: राजनीतिक संरक्षण वाले अटैच शिक्षकों पर शिकंजा
Ramanand Tiwari | Jul 21, 2026, 20:42 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. मध्यप्रदेश आयुक्त अभिषेक सिंह अलर्ट मोड पर हैं। कलेक्टरों से सीधे बातचीत में उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए भर्ती हुए हैं, दफ्तरों में बैठने के लिए नहीं।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त।
- 16 जिलों में कार्रवाई।
- आयुक्त अभिषेक सिंह खुद कर रहे मॉनिटरिंग।
- कलेक्टरों को जल्द रिलीव करने के निर्देश।
- शिक्षक अब अपने मूल विद्यालयों में लौटेंगे।
- विभाग का फोकस: बच्चों की पढ़ाई, दफ्तरों की ड्यूटी नहीं।
शिक्षकों की घर वापसी का अभियान तेज
इनमें कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जिन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलने की चर्चा है और वे स्कूल लौटने से बच रहे हैं। इसी वजह से विभाग अब जिला प्रशासन के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से सभी अटैचमेंट खत्म करने की कार्रवाई कर रहा है।
आयुक्त अभिषेक सिंह अलर्ट मोड पर
आयुक्त का स्पष्ट कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है, न कि दूसरे कार्यालयों में काम करना।
आयुक्त का बयान
कई जिलों में तेजी से हो रही कार्रवाई
विदिशा, देवास, इंदौर और मुरैना समेत कई जिलों में कार्रवाई जारी है। जिन जिलों में संख्या ज्यादा है, वहां 50% से अधिक शिक्षकों को पहले ही मूल स्कूलों में भेजा जा चुका है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने 16 जिलों के 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिक्षकों को तत्काल उनके मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराया जाए।
किन जिलों में मिले सबसे ज्यादा अटैच शिक्षक?
समीक्षा में जिन जिलों का नाम सामने आया, उनमें प्रमुख हैं-
- उज्जैन
- देवास
- नीमच
- शहडोल
- दतिया
- ग्वालियर
- भिंड
- श्योपुर
- गुना
- रीवा
- सीधी
- कटनी
- सिंगरौली
- सतना
- राजगढ़
- मंडला
स्कूल छोड़ आखिर कहां कर रहे थे ड्यूटी?
- विधायक कार्यालय (पीए/निजी सहायक)
- कलेक्टर कार्यालय
- जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
- जिला पंचायत
- जनपद पंचायत
- एसडीएम कार्यालय
- जिला निर्वाचन कार्यालय
- समग्र शिक्षा कार्यालय
- जनशिक्षा केंद्र
- बीईओ/बीआरसी कार्यालय
- मंत्रालय, भोपाल
- अन्य प्रशासनिक कार्यालय
विधानसभा में सवाल के बाद बढ़ी कार्रवाई
क्यों अहम है यह फैसला?
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