30 साल पुराने भ्रष्टाचार की फाइलें खुलीं, EOW-ACB ने शुरू की बड़ी कार्रवाई
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के करीब सवा सौ मामले वर्षों से फाइलों में दबे पड़े थे। कई मामलों में आरोपियों की मौत हो चुकी थी, फिर भी संबंधित विभाग ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी EOW और एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने अब इन धूल चढ़ी फाइलों को खोला है। एक महीने में 50 मामलों में चालान या खात्मा रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। इनमें 12 केस साल 1995-96 यानी राज्य गठन से पहले के हैं।
राजधानी रायपुर से सामने आई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कई मामले किसी न किसी वजह से वर्षों तक अटके रहे। कुछ मामले राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ पाए।
इसके बावजूद न तो चालान पेश किया गया और न ही खात्मा रिपोर्ट। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि राज्य बनने के बाद पहली बार पुराने लंबित मामलों की अलग से समीक्षा की जा रही है।
पांच अधिकारियों की मौत, केस फिर भी जिंदा
सबसे चौंकाने वाला मामला दुर्ग जिले का है। यहां एक सरकारी स्कूल भवन में इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित करने की अनुमति देने से जुड़े भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया था।
इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालक सहित पांच अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। समय के साथ सभी पांचों आरोपियों की मौत हो गई। लेकिन मामला फिर भी बंद नहीं हुआ। अब अदालत में इसकी खात्मा रिपोर्ट पेश करने की तैयारी है।
बिजली विभाग के इंजीनियर का पुराना मामला
एक और पुराना केस बिजली विभाग से जुड़ा है। EOW ने साल 2012 में बिजली विभाग के एक इंजीनियर को बिल पास करने के बदले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था।
जांच पूरी होने के बाद गिरफ्तारी और अभियोजन की अनुमति के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन विभाग ने अब तक इस पर मंजूरी नहीं दी। इसी वजह से बाद में खात्मा रिपोर्ट पेश करने का फैसला हुआ और इसे लंबित रखा गया। अब इसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सहकारी संघ में 186 फर्जी ऋण का मामला
मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से जुड़ा एक बड़ा मामला भी सामने आया है। इसमें गृह निर्माण और भूमि विकास के नाम पर 186 फर्जी ऋण प्रकरण तैयार किए गए थे।
अस्तित्वहीन समितियों के नाम पर करीब 1.86 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए गए थे। वर्तमान बाजार मूल्य और ब्याज के आधार पर यह रकम अब 20 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है। करीब 30 साल पुराने इस मामले में अब जाकर चालान पेश हुआ है।
126 से घटकर 90 हुए लंबित केस
छह महीने पहले तक EOW में 126 मामले लंबित थे। लंबे समय से इनकी संख्या में कोई खास बदलाव नहीं हो रहा था। समीक्षा शुरू होने के बाद अब यह संख्या घटकर 90 रह गई है।
राज्य गठन से पहले के 12 मामलों में अब केवल एक या दो ही बचे हैं। बाकी में चालान पेश किया जा चुका है। अधिकारियों ने अगस्त के दूसरे सप्ताह तक लंबित मामलों की संख्या आधी करने का लक्ष्य रखा है।
हर केस की रिपोर्ट अदालत भेजी जाएगी
EOW-ACB के डायरेक्टर अमरेश मिश्रा के मुताबिक वर्षों से अटके मुकदमे अब खत्म किए जा रहे हैं। उनके अनुसार नए मामलों को भी जल्द निपटाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्षों से अटके हर मामले का परीक्षण किया जा रहा है। जिन मामलों में केस दर्ज किया जा सकता है, उनमें प्रकरण पंजीबद्ध किए जा रहे हैं। खात्मा योग्य मामले बंद किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने भी इसके लिए इशारा दिया था। हर केस की रिपोर्ट अदालत भेजी जा रही है। ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिससे नए मामले भी जल्दी निपटें।
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