फर्जी जाति मामला पहुंचा हाईकोर्ट, आबकारी अफसर की 35 साल की नौकरी खतरे में

Harrison Masih | May 20, 2026, 15:11 IST
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फर्जी एसटी जाति प्रमाणपत्र के जरिए 35 साल से सरकारी नौकरी करने के आरोपों में घिरे आबकारी अधिकारी का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। आरोप लगाया है कि बिलासपुर से जारी कथित प्रमाणपत्र के रिकॉर्ड तहसील दस्तावेजों में मौजूद नहीं हैं।

Raipur. छत्तीसगढ़ और मध्यप्र देश में प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा देने वाला फर्जी जाति प्रमाणपत्र से जुड़ा मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी राजेश हेनरी पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति प्रमाणपत्र के आधार पर पिछले लगभग 35 वर्षों से सरकारी नौकरी हासिल की और लाभ उठाते रहे।



इस मामले में भोपाल निवासी प्रभात पांडे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बिलासपुर में तैयार किए गए संदिग्ध जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अधिकारी ने सेवा में प्रवेश किया और अब भी उच्च पद पर कार्यरत हैं।



जांच समिति को तेज कार्रवाई के निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने बिलासपुर जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति को निर्देश दिया है कि वह मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है, तो उसे तय समय सीमा के भीतर निपटाया जाना चाहिए।



1990-91 के रिकॉर्ड में नहीं मिला कोई प्रमाण

याचिका में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। इसमें दावा किया गया है कि कथित जाति प्रमाणपत्र पर बिलासपुर तहसील के सील और हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन जब 1990-91 के तहसील रिकॉर्ड की जांच की गई तो उस प्रकरण का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। यह तथ्य इस मामले को और गंभीर बना देता है और प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़े करता है।



दो साल से लंबित है जांच

याचिकाकर्ता का आरोप है कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने इस मामले को आगे की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति को भेजा था, लेकिन पिछले दो वर्षों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी देरी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की गई है।



आरक्षण लाभ और कार्रवाई की मांग

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, संबंधित अधिकारी को आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाए। साथ ही अगर प्रमाणपत्र फर्जी (fake Caste certificate) पाया जाता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और सेवा लाभों की समीक्षा की जाए।



कोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाए।



मामला बना चर्चा का विषय

इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ आबकारी विभाग बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।



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