जांजगीर में महिला हेड मास्टर निलंबित, धर्मांतरण और सरकारी फंड के गबन का आरोप
NEWS IN SHORT
- धर्मांतरण और ईसाई धर्म प्रचार के आरोप में हेड मास्टर निलंबित।
- बच्चों को राष्ट्रगान के बजाय धार्मिक नारे सिखाने का आरोप।
- कलेक्टर की फटकार के बाद डीईओ ने जारी किया आदेश।
- वर्ष 2021-24 के बीच सरकारी राशि के गबन का खुलासा।
- पुलिस ने बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज की एफआईआर।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा स्थित पीएमश्री कन्या प्राथमिक शाला में एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल की हेड मास्टर लक्ष्मी देवी भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर स्कूली बच्चों को हिंदू संस्कृति के खिलाफ भड़काने, ईसाई धर्म का प्रचार करने और धर्मांतरण की कोशिश करने जैसे संगीन आरोप लगे हैं।
ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर का सख्त एक्शन
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि हेड मास्टर बच्चों को राष्ट्रगान "जन गण मन" के स्थान पर "गॉड इज ग्रेट" जैसे धार्मिक वाक्य सिखा रही थीं। बार-बार बीईओ और डीईओ कार्यालय में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने 'जनसमस्या निवारण शिविर' में कलेक्टर के समक्ष यह मुद्दा उठाया। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीईओ को कड़ी फटकार लगाई, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
धर्मांतरण के साथ फर्जीवाड़े का खेल
जांच में केवल धार्मिक गतिविधियां ही नहीं, बल्कि भारी वित्तीय अनियमितताएं भी पाई गई हैं। हेड मास्टर पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2021 से 2024 के बीच स्कूल अनुदान राशि का दुरुपयोग किया। उन्होंने फर्जी बिल-वाउचर लगाकर अपने रिश्तेदारों के नाम पर पीपीओ जारी किए और सरकारी राशि का गबन किया।
कानूनी और विभागीय कार्रवाई
पुलिस ने लोक शांति भंग होने की आशंका में बीएनएसएस की धारा 126 और 135(3) के तहत मामला दर्ज किया है। डीईओ के आदेशानुसार, हेड मास्टर का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय बलौदा तय किया गया है।
FAQ
1. हेड मास्टर का नाम क्या है और उन्हें क्यों निलंबित किया गया
उनका नाम लक्ष्मी देवी भारद्वाज है। उन्हें धर्मांतरण के प्रयास और वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप में निलंबित किया गया है।
2. स्कूल में क्या सिखाया जा रहा था?
आरोप है कि बच्चों को हिंदू संस्कृति के विरुद्ध भड़काया जा रहा था और राष्ट्रगान की जगह धार्मिक वाक्य सिखाए जा रहे थे।
3. वित्तीय अनियमितता क्या है?
सरकारी अनुदान राशि में फर्जी बिल लगाकर रिश्तेदारों के नाम पर पैसे निकालने का आरोप है।
निष्कर्ष
यह घटना शिक्षा के मंदिर में वैचारिक और वित्तीय भ्रष्टाचार के गंभीर संकट को दर्शाती है। शासन द्वारा की गई त्वरित निलंबन की कार्रवाई समाज में यह संदेश देती है कि सरकारी संस्थानों में धार्मिक तटस्थता और पारदर्शिता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई भविष्य के लिए नजीर बनेगी।
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