तहसीलदार से विवाद में सीतापुर के MLA रामकुमार टोप्पो सहित 10 समर्थकों पर FIR
NEWS IN SHORT
- विधायक रामकुमार टोप्पो और समर्थकों पर गंभीर धाराओं में केस।
- पीड़ित महिला की शिकायत पर नायब तहसीलदार भी नामजद हुए।
- सरकारी दफ्तर से शुरू हुआ विवाद राजपुर चौराहे तक पहुंचा।
- कोतवाली पुलिस ने मामले में बीएनएस के तहत जीरो FIR की।
- घटना के विरोध में स्थानीय राजस्व कर्मचारी संघों में भारी आक्रोश।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में बुधवार को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच हुआ विवाद अब बेहद गंभीर रूप ले चुका है। राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार से मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पोसहित उनके करीब 10 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
वहीं, दूसरी ओर विधायक की चचेरी बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के विरुद्ध भी अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का काउंटर केस दर्ज हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल 'क्रॉस एफआईआर' के बाद पूरे जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मची हुई है।
दफ्तर की बहस से चौराहे के हंगामे तक का सफर
सूत्रों और पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, इस पूरे विवाद की पटकथा राजापुर उप तहसील कार्यालय से शुरू हुई। विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी किसी शासकीय कार्य के सिलसिले में उप तहसील दफ्तर पहुंची थीं। वहाँ मौजूद नायब तहसीलदार तुषार मानिक और सीमा धनकी के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह सामान्य कहासुनी एक बड़े विवाद में बदल गई।
नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी का आरोप है कि इस दफ्तर की तकरार के बाद उन्हें राजपुर चौराहा बुलाया गया। जब वे वहाँ पहुंचे, तो विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ पहले से ही वहाँ मौजूद थे। आरोप है कि चौराहे पर सार्वजनिक रूप से नायब तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई। घटना के तुरंत बाद पीड़ित अधिकारी ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराया और कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
नए कानून (BNS) के तहत जीरो FIR दर्ज
नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देश के नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता और अन्य समर्थकों के खिलाफ शासकीय सेवक पर हमला करने, दंगा भड़काने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में धारा 221, 221(1), 132 और 191(2) के तहत अपराध कायम किया है। चूंकि मामला दूसरे थाना क्षेत्र का है, इसलिए कोतवाली पुलिस ने 'जीरो एफआईआर' दर्ज कर केस डायरी को आगे की जांच के लिए संबंधित थाने को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
महिला की शिकायत पर अधिकारी भी नपे
इस पूरे मामले में मोड़ तब आया जब विधायक समर्थकों और पीड़ित महिला सीमा धनकी की ओर से भी मोर्चा खोला गया। विधायक पक्ष का साफ कहना है कि शुरुआत नायब तहसीलदार की ओर से हुई थी और उन्होंने महिला के साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया था। सीमा धनकी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने निष्पक्षता बरतते हुए नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के खिलाफ भी गाली-गलौज और दुर्व्यवहार करने का मामला दर्ज कर लिया है।
प्रशासनिक खेमे में उबाल, कामकाज प्रभावित
इस घटना के बाद से स्थानीय राजस्व अधिकारियों और कर्मचारी संघों में भारी आक्रोश है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ही मैदानी स्तर पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ इस तरह का हिंसक या अमर्यादित व्यवहार करेंगे, तो शासकीय व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।
कर्मचारी संगठनों ने इस घटना के विरोध में एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है। इस विवाद के कारण स्थानीय शासकीय कामकाज पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही पक्षों की तरफ से मामले दर्ज कर लिए गए हैं। फिलहाल घटना स्थल के आसपास के चश्मदीदों और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि निष्पक्ष जांच के आधार पर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बहरहाल, इस घटना ने सरगुजा संभाग में सियासत के पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
निष्कर्ष
जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी के बीच का यह विवाद लोकतंत्र के दोनों स्तंभों के बीच घटते तालमेल को दर्शाता है। कानून को हाथ में लेना और सरेराह मारपीट करना कतई उचित नहीं है। बहरहाल, पुलिस की निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई ही इस मामले में न्याय सुनिश्चित कर सकती है।
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