शहरी सड़क ग्राम पंचायत में बनी, बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय को फायदा पहुंचाने का आरोप

Amresh Kushwaha | May 16, 2026, 15:06 IST
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alot kayakalp yojana road bjp mla chintamani malviya land controversy
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रतलाम के आलोट में कायाकल्प योजना 2.0 के तहत बनी सड़क विवादों में है। आरोप है कि नगरीय सीमा की शर्त के बावजूद ग्राम पंचायत क्षेत्र में सड़क बनाई गई, जहां BJP विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके करीबियों की जमीन है।

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...

  • रतलाम के आलोट में कायाकल्प योजना 2.0 में करोड़ों की सड़क बनी है।
  • सड़क नगरीय सीमा की बजाय ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनाई गई है।
  • सड़क के किनारे BJP विधायक और उनके करीबियों की जमीन है।
  • सड़क बनने के बाद उस इलाके में जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ गईं हैं।
  • मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। साथ ही, CBI और लोकायुक्त जांच की मांग भी हुई है।

सड़क बनी, विवाद भी बना

रतलाम जिले के आलोट में कायाकल्प योजना 2.0 के तहत बनी एक सड़क इन दिनों बड़े विवाद की वजह बन गई है। शिकायतकर्ता संजय जैन का आरोप है कि शहरी क्षेत्र के लिए मंजूर यह सड़क ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनाई गई है। वहीं, सबसे बड़ी बात यह है कि उसी इलाके में बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके करीबियों की जमीनें हैं। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि इन जमीनों को फायदा पहुंचाने के लिए ही यह सड़क बनाई गई है।

यह मामला आलोट नगर परिषद से जुड़ा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने कायाकल्प अभियान 2.0 के तहत शहरों में सीमेंट-कंक्रीट सड़कें बनाने की योजना शुरू की थी। योजना की एक अहम शर्त यह थी कि सड़कें केवल नगरीय सीमा के भीतर ही बनेंगी।

23 फरवरी को मंजूरी, दिसंबर में जमीन खरीद

शिकायतकर्ता के मुताबिक, 23 फरवरी 2024 को आलोट नगर परिषद ने महादेव मंदिर से आगर-बड़ौद लिंक रोड तक सड़क निर्माण की मंजूरी दी थी। इसके बाद 27 दिसंबर 2024 को विधायक चिंतामणि मालवीय ने उसी सड़क के किनारे 0.0744 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। इसके अलावा एक अन्य खसरे में भी मालवीय की हिस्सेदारी बताई जा रही है। शिकायत के मुताबिक इस इलाके में विधायक और उनके करीबियों के पास कुल 13.168 हेक्टेयर जमीन है।

यानी मंजूरी फरवरी 2024 में मिली, जमीन की रजिस्ट्री दिसंबर 2024 में हुई और सड़क का निर्माण 2025 में किया गया था। इस क्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

980 मीटर सड़क पर 1 करोड़ रुपए

धरोला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनी इस सड़क की लंबाई 980 मीटर है। इस पर एक करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जो शासन ने स्वीकृत किए हैं। सड़क निर्माण की जमीन नगर परिषद की बताई जाती है, लेकिन उसके आसपास विधायक और उनके करीबियों की जमीन है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क बनने से पहले इस इलाके में जमीन की कीमत 50 से 60 लाख रुपए प्रति एकड़ थी। सड़क बनने के बाद यही जमीन 1.25 से 1.50 करोड़ रुपए प्रति एकड़ तक पहुंच गई है। यानी कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सड़क बनने के बाद आसपास की जमीनों पर प्लॉटिंग भी शुरू हो गई है।

सीएमओ बोले, भोपाल से आया प्रस्ताव

आलोट के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (Chief Municipal Officer) सीताराम चौहान का कहना है कि कायाकल्प योजना के तहत जो सड़क बनी है, वह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में है। यह इलाका आलोट नगर से करीब 500 मीटर दूर है। उनका कहना है कि सड़क का प्रस्ताव नगर परिषद ने नहीं बनाया था, यह नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से आया था।

विधायक बोले, यहां का हूं तो जमीन लेना स्वाभाविक

विधायक चिंतामणि मालवीय ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि कायाकल्प योजना में बनी सड़क नगरीय सीमा में है। वे यहां के विधायक हैं इसलिए यहां जमीन लेना उन्हें स्वाभाविक लगता है। उन्होंने कहा कि वहां और किसकी जमीन है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। मालवीय ने यह भी कहा कि उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र में 70 सड़कों की मांग की है और उन्हें किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।

शिकायत की, कार्रवाई नहीं हुई

शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रमुख सचिव, कलेक्टर और लोकायुक्त पुलिस से की थी। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर करने के लिए तैयार कर ली है। याचिका में मामले की सीबीआई (Central Bureau of Investigation) या लोकायुक्त जांच की मांग की गई है।

नेता प्रतीक्षा ने सरकार पर उठाए सवाल

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विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा किमध्यप्रदेश में अब कायाकल्प योजना विकास से ज्यादा नेताओं की जमीन चमकाने का जरिया बनती दिख रही है।रतलाम के आलोट में करोड़ों की सड़क ऐसी जगह बना दी गई, जहां भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके करीबियों की जमीनें हैं।

सड़क बनते ही खेतों के भाव आसमान छूने लगे और प्लॉट करोड़ों में बिकने की चर्चा शुरू हो गई है।सवाल ये है कि सरकारी योजनाएं जनता की जरूरत देखकर बनेंगी या नेताओं की प्रॉपर्टी के रेट बढ़ाने के लिए?भाजपा राज में सड़क हो, जमीन हो, खनन हो या पानी… हर जगह जनता का पैसा लग रहा है और फायदा नेताओं को मिलता दिख रहा है।प्रदेश की जनता को असली विकास चाहिए, भाजपा प्रॉपर्टी मॉडल नहीं।

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