छत्तीसगढ़ में फायर स्टेशन के लिए जमीन आवंटन में देरी, 17 कलेक्टरों को हाईकोर्ट ने दी अंतिम चेतावनी
NEWS IN SHORT
- हाईकोर्ट ने 17 जिला कलेक्टरों को अंतिम अवसर प्रदान किया।
- फायर स्टेशन निर्माण हेतु भूमि आवंटन में देरी पर नाराजगी।
- प्रदेश के 145 ब्लॉकों में एक भी दमकल वाहन नहीं।
- मुख्य सचिव को कोर्ट के आदेश का पालन कराने के निर्देश।
- मामले की अगली सुनवाई अब 23 जून को निर्धारित है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में अग्नि सुरक्षा के संसाधनों की भारी कमी और प्रशासनिक सुस्ती पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम न होने पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य के 17 जिलों के कलेक्टरों द्वारा फायर स्टेशनों के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया में सहयोग न करने और पत्रों का जवाब न देने को अत्यंत गंभीर माना है।
प्रशासनिक उदासीनता पर कोर्ट की फटकार
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अग्नि सुरक्षा निदेशक ने 17 मार्च 2026 को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के पालन में 25 मार्च को संबंधित कलेक्टरों को पत्र लिखकर फायर स्टेशन निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की मांग की थी। आश्चर्यजनक रूप से, एक महीने से अधिक समय बीत जाने और 27 अप्रैल को रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद किसी भी जिला कलेक्टर ने इसका जवाब देना उचित नहीं समझा।
हाईकोर्ट ने इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए सभी 17 कलेक्टरों को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। साथ ही, अदालत ने इस आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि जमीनी स्तर पर आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।
इन 17 जिलों के कलेक्टरों को नोटिस
जिन जिलों के कलेक्टरों को पत्र का जवाब देने और जमीन आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
-रायपुर, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर, और कोण्डागांव।
-नवनिर्मित जिले: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, और खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई।
-अन्य जिले: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बलरामपुर, सूरजपुर, गरियाबंद, मुंगेली, बालोद और बेमेतरा।
-निदेशक ने विशेष रूप से 'जिला सेनानी कार्यालय' के समीप सुगम पहुंच मार्ग वाली भूमि को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।
संसाधनों का भारी अभाव
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र (Amicus Curiae) अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने प्रदेश में अग्नि सुरक्षा की जर्जर स्थिति का खाका पेश किया। आंकड़ों के अनुसार:
-प्रदेश के 200 से अधिक ब्लॉक मुख्यालयों में से 145 से अधिक ऐसे स्थान हैं जहां आग बुझाने के लिए एक भी वाहन उपलब्ध नहीं है।
-राजधानी रायपुर में केवल 22 और न्यायधानी बिलासपुर में मात्र 10 अग्निशमन वाहन मौजूद हैं, जो बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के लिहाज से बेहद कम हैं।
अधिनियम लागू, पर नियुक्ति नदारद
उल्लेखनीय है कि 2018 के बाद राज्य विधानसभा ने एक नया अधिनियम पारित कर 'निदेशक अग्नि सुरक्षा कार्यालय' का गठन किया था। इस कानून के तहत हर जिले में एक 'जिला अग्नि सुरक्षा अधिकारी' की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान में मैनपावर और विशेषज्ञ अधिकारियों की भारी कमी बनी हुई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जनसुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को निर्धारित की गई है।
निष्कर्ष
राज्य में अग्नि सुरक्षा संसाधनों की कमी जनजीवन के लिए बड़ा खतरा है। हाईकोर्ट द्वारा कलेक्टरों को दी गई चेतावनी प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में आवश्यक कदम है। यदि जमीन आवंटन और बुनियादी ढांचे में तेजी नहीं आई, तो आपातकालीन स्थितियों में भारी नुकसान की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी।
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