मछली जैसी खाल और फेल हो गए किडनी-हार्ट; छत्तीसगढ़ के युवक में मिली ऐसी बीमारी, जिसे देख डॉक्टर भी रह गए दंग!
NEWS IN SHORT
- 19 साल के युवक में दुर्लभ बीमारी का पता, हार्ट और किडनी भी प्रभावित
- एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस त्वचा की बीमारी से जूझ रहा हैं युवक
- युवक का इलाज आंबेडकर अस्पताल में चल रहा हैं और डायलिसिस पर रखा गया हैं
- इस बीमारी का इलाज सिर्फ लक्षणों के आधार पर किया जा सकता है
- मेडिकल रिसर्च के लिए अहम केस, जेनेटिक टेस्ट की चल रही तैयारी
NEWS IN DETAIL
Ambikapur : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में एक 19 वर्षीय युवक में एक बेहद दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी का मामला सामने आया है। इस युवक का बचपन से ही शरीर की त्वचा मछली जैसी दिखती है
और डॉक्टरों ने उसे एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस नामक बीमारी से पीड़ित बताया है। इस बीमारी ने न केवल उसकी त्वचा को प्रभावित किया हैं बल्कि उसके दिल और किडनियों को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है।
क्या है एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस?
एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस एक बहुत ही दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से त्वचा पर असर डालती है। इसमें त्वचा अत्यधिक सूखी और खुरदरी हो जाती है
जो मछली के स्केल जैसी दिखती है। यह बीमारी शरीर में एक विशेष एंजाइम की कमी के कारण होती है, और यह आमतौर पर पुरुषों में पाई जाती है। इस बीमारी के लक्षण जन्म से ही दिखाई देते हैं और उम्र के साथ बढ़ते जाते हैं।
युवक की गंभीर स्थिति
इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि युवक की त्वचा के अलावा उसके हार्ट और किडनियां भी गंभीर रूप से डैमिज हो चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि युवक का दिल केवल 30 प्रतिशत काम कर रहा है
और दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। सामान्यतः इस बीमारी में सिर्फ त्वचा प्रभावित होती है, लेकिन इस मामले में शरीर के तीन प्रमुख अंगों पर असर पड़ा है। यही कारण है कि इसे मेडिकल साइंस में इसे रेयरस्ट ऑफ द रेयर केस माना जा रहा है।
डायलिसिस पर रखा गया युवक
युवक के गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आंबेडकर अस्पताल में डायलिसिस पर रखा गया है, ताकि शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकाले जा सकें। डॉक्टरों ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है
ताकि वह सामान्य जीवन जी सके। पिछले एक महीने से युवक का इलाज आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है, और उसकी की निरंतर निगरानी की जा रही है।
इलाज की प्रक्रिया
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। इलाज केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता है। त्वचा को नम रखने के लिए खास लोशन और क्रीम का उपयोग किया जाता है
और पपड़ी हटाने के लिए यूरिया, लैक्टिक एसिड और सैलिसिलिक एसिड जैसे तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। हार्ट और किडनी की समस्या के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों द्वारा इलाज किया जा रहा है।
मेडिकल रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण केस
यह मामला मेडिकल रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस प्रकार के संयुक्त लक्षणों वाले केस बहुत कम ही देखे जाते हैं। आंबेडकर अस्पताल की टीम इस केस की पूरी रिपोर्ट तैयार कर रही है
और बीमारी की सटीक पुष्टि के लिए विशेष जेनेटिक टेस्ट करने की योजना बनाई जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि यह केस भविष्य में इस बीमारी के इलाज के लिए एक नई दिशा दे सकता है।
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