नए PCCF के चयन पर ब्रेक, DPC रद्द होने से बढ़ा सस्पेंस
Raipur. छत्तीसगढ़ के वन महकमे में नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और वन बल प्रमुख के चयन पर अचानक ब्रेक लग गया है। गुरुवार को होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बहुप्रतीक्षित बैठक ऐन वक्त पर रद्द कर दी गई। इस बैठक में प्रदेश के नए फॉरेस्ट बॉस के नाम पर चर्चा होनी थी, लेकिन प्रशासनिक फेरबदल ने पूरी प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि इस बात पर भी चर्चा है कि जब DPC पहले से तय थी तो एक दिन बाद भी ट्रांसफर आदेश निकाला जा सकता था।
सूत्रों के मुताबिक डीपीसी टलने की सबसे बड़ी वजह बुधवार देर शाम जारी हुआ अफसरों का ट्रांसफर आदेश माना जा रहा है। इसी आदेश में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के ACS का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज पिंगुआ को विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि बताया जा रहा है कि पिंगुआ ने अभी विभाग का औपचारिक चार्ज भी नहीं लिया है और वे फिलहाल “सुशासन तिहार” की तैयारियों में व्यस्त हैं। ऐसे में डीपीसी में उनकी मौजूदगी संभव नहीं थी, जिसके बाद बैठक आगे बढ़ा दी गई।
महत्वपूर्ण बैठक होने वाली थी
वन विभाग (CG Forest Department) में यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही थी क्योंकि मौजूदा PCCF और वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव 31 मई को रिटायर हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि उन्हें एक्सटेंशन मिलने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में सरकार रिटायरमेंट से पहले ही नए प्रमुख के चयन की प्रक्रिया पूरी करना चाहती है। बैठक को अगले सप्ताह होने की संभावना जताई जा रही है
सस्पेंस गहरा गया है
अब डीपीसी टलने से वन महकमे में नए मुखिया को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है। विभाग के भीतर कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन सबसे आगे 1994 बैच के IFS अधिकारी अरुण कुमार पांडे का नाम माना जा रहा है। वर्तमान में वे पीसीएफ (डेवलपमेंट एंड प्लानिंग) के पद पर हैं और इको टूरिज्म व क्लाइमेट चेंज के मामलों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। राज्य में इको टूरिज्म साइट्स विकसित करने में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है।
कौशलेंद्र कुमार भी मजबूत दावेदार
वहीं 1992 बैच के IFS अधिकारी कौशलेंद्र कुमार भी मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। निगरानी एवं मूल्यांकन से जुड़े कामों का लंबा अनुभव उनके पक्ष में माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर उन्हें शांत लेकिन प्रभावी अधिकारी की छवि वाला अफसर माना जाता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि नई तारीख कब तय होती है। क्योंकि PCCF का चयन सिर्फ एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य की वन नीति, इको टूरिज्म और जलवायु रणनीति की दिशा तय करने वाला फैसला भी माना जा रहा है।
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