मोदी काल में उजड़ा 2 लाख हेक्टेयर जंगल, इनमें एमपी और छत्तीसगढ़ भी शामिल
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur : देश में जंगलों की जमीन को गैर वानिकी इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने की रफ्तार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2014-15 से 2025-26 के बीच देशभर में 2,15,943 हेक्टेयर वनभूमि को गैर वानिकी उपयोग के लिए मंजूरी दी गई। इनमें करीब 62 प्रतिशत जमीन खनन, जलविद्युत, सिंचाई और सड़क जैसी परियोजनाओं के लिए स्वीकृत हुई। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में ही 45,124.64 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन को मंजूरी मिली है। इसमें मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों महत्वपूर्ण राज्य सामने आते हैं। मध्यप्रदेश में 2025-26 में वनभूमि डायवर्जन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 116 प्रतिशत बढ़ा, जबकि छत्तीसगढ़ में इसमें 94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दोनों राज्यों के साथ अरुणाचल प्रदेश और झारखंड को मिलाकर 2025-26 में देश में स्वीकृत कुल वनभूमि डायवर्जन का 57 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आया।
चार साल में मध्यप्रदेश सबसे आगे
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2025 के बीच देश में 78,135.84 हेक्टेयर वनभूमि को गैर वन उपयोग के लिए मंजूरी दी गई। इस अवधि में मध्यप्रदेश 17,393.65 हेक्टेयर के साथ देश में सबसे ऊपर रहा। वहीं छत्तीसगढ़ में 4,092.01 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन को मंजूरी मिली। इस आंकड़े से दोनों राज्यों के बीच बड़ा अंतर भी सामने आता है। चार साल की अवधि में मध्यप्रदेश में मंजूर वनभूमि डायवर्जन छत्तीसगढ़ के मुकाबले करीब 4.25 गुना रहा। मध्यप्रदेश अकेले ही करीब 22.3 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि छत्तीसगढ़ का हिस्सा करीब 5.2 प्रतिशत बैठता है।
2025-26 में रफ्तार और तेज
रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में देश में कुल 26,858 हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए मंजूरी मिली, जो 2024-25 की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक और पिछले 12 वर्षों में सबसे ज्यादा है। इसी साल मध्यप्रदेश में डायवर्जन 116 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 94 प्रतिशत बढ़ा। यानी दोनों राज्यों में केवल वनभूमि डायवर्जन का स्तर ही बड़ा नहीं है, बल्कि हालिया रफ्तार भी चिंता बढ़ाने वाली है। राष्ट्रीय स्तर पर 2024-25 और 2025-26 में औसतन हर साल करीब 22,562 हेक्टेयर, यानी लगभग 61 हेक्टेयर वनभूमि प्रतिदिन गैर-वानिकी उपयोग के लिए मंजूर हुई।
मध्यप्रदेश में जंगलों पर दोहरा दबाव
मध्यप्रदेश देश के सबसे बड़े वनक्षेत्र वाले राज्यों में है। जानकारी के अनुसार राज्य में करीब 94,689 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। ऐसे में बड़ी मात्रा में वनभूमि का गैर-वानिकी इस्तेमाल होना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राज्य में खनन, सड़क, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन की मांग लगातार बनी हुई है। चार साल के आधिकारिक आंकड़ों में 17,393.65 हेक्टेयर वनभूमि डायवर्जन के साथ मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। इसके बाद 2025-26 में 116 प्रतिशत की सालाना वृद्धि चिंताजनक है।
छत्तीसगढ़ में खनन बड़ा कारण
छत्तीसगढ़ की स्थिति भी अलग नहीं है। राज्य की करीब 44 प्रतिशत भौगोलिक भूमि वन क्षेत्र के रूप में दर्ज है। कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की प्रचुरता के कारण यहां खनन परियोजनाओं के साथ-साथ सड़क, रेल और बिजली से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वनभूमि के इस्तेमाल का दबाव बना रहता है। केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2021 से मार्च 2025 के बीच छत्तीसगढ़ में 4,092.01 हेक्टेयर वनभूमि गैर-वन उपयोग के लिए मंजूर हुई। इसके बाद 2025-26 में डायवर्जन में 94 प्रतिशत की छलांग दर्ज होना बताता है कि राज्य में विकास परियोजनाओं और वन संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती और गंभीर हुई है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में कितनी वनभूमि गैर-वानिकी उपयोग के लिए मंजूर हुई?
अप्रैल 2021 से मार्च 2025 तक मध्यप्रदेश में 17,393.65 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन को मंजूरी मिली। - छत्तीसगढ़ में कितनी वनभूमि का डायवर्जन हुआ?
अप्रैल 2021 से मार्च 2025 के बीच छत्तीसगढ़ में 4,092.01 हेक्टेयर वनभूमि गैर-वन उपयोग के लिए मंजूर हुई। - वनभूमि का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किन परियोजनाओं में हुआ?
वनभूमि का बड़ा हिस्सा खनन, जलविद्युत, सिंचाई, सड़क और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए मंजूर किया गया।
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