खाने की थाली पर बड़ा खतरा: फॉर्च्यून मैदा के एक बैच पर रोक, गौरेला में पनीर भी फेल, बाजार के खाने पर उठे सवाल
ऐसे में सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि बाजार में जांच से पहले कितनी ऐसी खाद्य सामग्री लोगों तक पहुंच रही है, इसका भी है।
मैदा के बैच पर सीधी रोक
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फॉर्च्यून मैदा के बैच की GPM में बिक्री और वितरण रोकने का आदेश जारी किया है। कारोबारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि इस बैच का माल न बेचें और न ही आगे सप्लाई करें। हालांकि आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बैच में किस गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी के आधार पर रोक लगाई गई है।
पनीर में वेजिटेबल फैट ज्यादा
गौरेला में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पनीर का नमूना लेकर प्रयोगशाला भेजा था। जांच रिपोर्ट में पनीर में वेजिटेबल फैट निर्धारित सीमा से 77 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। इसके बाद खाद्य विश्लेषक ने इसे असुरक्षित घोषित किया। विभाग अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई कर रहा है।
लोगों की थाली तक पहुंचा तो?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पनीर को जांच में असुरक्षित पाया गया, उसका कितना हिस्सा पहले ही बाजार में बिक चुका था। नमूना जांच के बाद गड़बड़ी सामने आई, लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके ऐसे खाद्य पदार्थों का क्या हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। खाद्य सुरक्षा की असली चुनौती यहीं दिखाई देती है।
सिर्फ मैदा-पनीर तक मामला नहीं
जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान कई दूसरे उत्पादों के नमूने भी लिए गए हैं। गृहस्थी सुपर बाजार से मैगी और साबूदाना के नमूने लिए गए। इसके अलावा 786 बिरयानी सेंटर और हरी कन्फेक्शनरी से भी खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
रिपोर्ट आएगी, फिर कार्रवाई होगी
इन नमूनों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया है। अब इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि इनमें से कौन से उत्पाद तय मानकों पर खरे उतरते हैं। यानी फिलहाल कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का जवाब लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगा।
कारोबारियों पर निगरानी का दावा
विभाग ने खाद्य कारोबारियों को निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के दौरान तय सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। जांच में अमानक या असुरक्षित खाद्य सामग्री मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि नियमित जांच कितनी हो रही है और बाजार में मौजूद हर बैच तक निगरानी कितनी पहुंच पा रही है।
पैकिंग देखकर खरीदें, फिर भी सवाल
उपभोक्ताओं से पैकेट की निर्माण और एक्सपायरी तारीख, लेबल और पैकेजिंग जांचने की अपील की गई है। लेकिन सिर्फ लेबल देखकर हर खाद्य पदार्थ की असल गुणवत्ता का पता नहीं चलता। पनीर के मामले ने यही सवाल खड़ा किया है कि पैकेट या दुकान पर ठीक दिखने वाला सामान अंदर से कितना सुरक्षित है।
कार्रवाई के बाद अगली चुनौती
फॉर्च्यून मैदा के संबंधित बैच पर रोक और पनीर को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद अब निगाह आगे की कार्रवाई पर है। मैदा के प्रतिबंधित बैच का कितना स्टॉक बाजार में था, कितना जब्त या वापस कराया गया और पनीर मामले में जिम्मेदारकारोबारी पर क्या कार्रवाई होती है—इन सवालों के जवाब कार्रवाई पूरी होने के बाद ही साफ होंगे। फिलहाल जांच ने बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
FAQ
- फॉर्च्यून मैदा के बैच पर रोक क्यों लगाई गई है?
फॉर्च्यून मैदा के बैच की बिक्री और वितरण पर रोक खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी आदेश के कारण लगाई गई है, हालांकि आदेश में इस रोक के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। - पनीर में मिले हैवी वेजिटेबल फैट के परिणाम क्या हैं?
पनीर में निर्धारित सीमा से 77 प्रतिशत अधिक वेजिटेबल फैट पाया गया, जिसके बाद इसे असुरक्षित घोषित किया गया और विभाग अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई कर रहा है। - खाद्य सामग्री की नियमित जांच कैसे सुनिश्चित की जाती है?
खाद्य कारोबारियों को निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के दौरान तय सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन यह सवाल बाकी है कि नियमित जांच कितनी होती है और सभी बैचों की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाती है।