कमेटी गठन पर छत्तीसगढ़ सरकार सख्त, GAD ने बदले नियम
RAIPUR : छत्तीसगढ़ सरकार ने विभागों की ओर से बनने वाली अधिकारी स्तरीय अंतर्विभागीय समितियों पर नई लगाम कसने तैयार है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने समिति गठन की पूरी प्रक्रिया बदल दी है। अब बिना तय नियमों और प्रशासनिक मंजूरी के कोई भी राज्य स्तरीय समिति नहीं बन सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे फाइलों की देरी रुकेगी और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
शासन की होती थी किरकिरी
अब तक कई विभाग समिति गठन के प्रस्ताव भेज देते थे। लेकिन उनमें समिति बनाने का कारण, कार्यक्षेत्र और सदस्यों की जानकारी स्पष्ट नहीं होती थी। नतीजा, फाइलें महीनों तक अटकती थीं। इसी व्यवस्था को बदलने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। निर्णय को लेकर भी लोगों में नाराजगी रहती थी। कई बार तो समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठते थे। आरोपियों को बचाने का आरोप लगते थे। जिसके बाद शासन की किरकिरी होती थी। इससे बचने ये कड़ा कदम उठाया गया है।
अब सिर्फ GAD जारी करेगा आदेश
नई व्यवस्था के तहत राज्य स्तरीय किसी भी अंतर्विभागीय समिति का गठन केवल सामान्य प्रशासन विभाग करेगा। इसके लिए संबंधित विभाग को पहले प्रशासनिक मंजूरी लेनी होगी। प्रस्ताव केवल ई-ऑफिस के माध्यम से भेजा जाएगा। समिति में सचिव स्तर के अधिकारी का शामिल होना भी अनिवार्य कर दिया गया है। यानी अब कागजी औपचारिकताओं में कोई ढिलाई नहीं चलेगी।
जिला और संभाग स्तर पर बदले नियम
सरकार ने जिला और संभाग स्तर की समितियों के लिए अलग व्यवस्था बनाई है। अब ऐसे प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित प्रशासनिक विभाग ही उनका अनुमोदन करेगा। इससे छोटे स्तर की समितियों के गठन में तेजी आएगी। वहीं राज्य स्तर की समितियों पर सीधा नियंत्रण सरकार के पास रहेगा।
CM की मंजूरी बिना नहीं होगा मनोनयन
नई गाइडलाइन में गैर-सरकारी सदस्यों को लेकर भी सख्ती दिखाई गई है। यदि किसी समिति में अशासकीय सदस्य शामिल करना है तो पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। विभागीय मंत्री से समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र का अनुमोदन भी जरूरी होगा। बिना अनुमति किसी बाहरी सदस्य की नियुक्ति कार्यपालिक नियमों का उल्लंघन मानी जाएगी।
हर प्रस्ताव में बतानी होगी जरूरत
अब विभागों को केवल समिति बनाने का प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि समिति क्यों जरूरी है और यह काम विभागीय कार्यदल से क्यों नहीं हो सकता। प्रस्ताव में अध्यक्ष, सदस्य सचिव, सदस्यों के नाम, जिम्मेदारियां, अधिकार और निर्णय की सीमा स्पष्ट लिखनी होगी। अधूरी या अस्पष्ट फाइलों पर अब आगे कार्रवाई नहीं होगी।
बोर्ड, निगम और जांच समितियां बाहर
सरकार ने साफ कर दिया है कि बोर्ड, निगम, मंडल, प्राधिकरण, जांच समिति और खरीद या वित्तीय समितियों के गठन के प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग नहीं देखेगा। ऐसे मामलों का फैसला संबंधित विभाग ही करेगा। राज्य स्तरीय समितियों के प्रस्ताव मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास भेजे जाएंगे। अंतिम मंजूरी के बाद ही GAD औपचारिक आदेश जारी करेगा। सरकार का संदेश साफ है—अब समिति गठन में मनमानी नहीं, बल्कि तय नियमों का पालन होगा।
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