गढ़चिरौली में 11 हार्डकोर नक्सलियों ने डाले हथियार, 68 लाख का था इनाम
NEWS IN SHORT
- गढ़चिरौली में 11 वरिष्ठ नक्सलियों का आत्मसमर्पण।
- सभी पर कुल 68 लाख रूपए का इनाम घोषित था।
- सरेंडर करने वालों में DVCM, कमांडर जैसे बड़े पद शामिल।
- 2025 से अब तक 123 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके।
- सरकार की नीति के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी।
NEWS IN DETAIL
गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। यहां 11 वरिष्ठ नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 68 लाख रूपए का इनाम घोषित था।
संगठन के बड़े पदों पर थे सक्रिय
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के अहम पदों पर कार्यरत नक्सली शामिल हैं। इनमें 1 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 1 एरिया कमेटी सचिव, 1 PPCM, 1 कमांडर, 1 असिस्टेंट कमेटी सदस्य (ACM) और 6 अन्य सदस्य शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय थे।
नक्सल विरोधी अभियान को मिल रही लगातार सफलता
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक 123 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं 2005 से अब तक कुल 794 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि गढ़चिरौली में नक्सल गतिविधियां अब सीमित होकर मुख्य रूप से भामरागढ़ क्षेत्र तक सिमट गई हैं।
पहले भी लगा था बड़ा झटका
इससे पहले 15 अक्टूबर 2025 को शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (भूपति उर्फ सोनू) समेत 61 नक्सलियों ने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था, जिससे नक्सल आंदोलन को बड़ा झटका लगा था।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। इसमें 4 लाख से 8.5 लाख रूपए तक आर्थिक मदद, समूह में आत्मसमर्पण पर 10 लाख रूपए अतिरिक्त और पति-पत्नी नक्सलियों को 1.5 लाख रूपए अतिरिक्त सहायता शामिल है।
IMP FACTS
- 11 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
- कुल इनाम: 68 लाख रूपए
- 2025 में अब तक 123 सरेंडर
- 2005 से अब तक 794 नक्सली मुख्यधारा में लौटे
- गढ़चिरौली में गतिविधियां अब सीमित
आगे क्या
सुरक्षा बल नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन और तेज करेंगे। साथ ही आत्मसमर्पण नीति के जरिए और नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश जारी रहेगी।
निष्कर्ष
गढ़चिरौली में 11 नक्सलियों का आत्मसमर्पण (Naxal surrender) नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ी सफलता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सुरक्षा दबाव और पुनर्वास नीति के चलते नक्सल आंदोलन कमजोर पड़ रहा है और मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
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