दिलीप बिल्डकॉन को दिए बड़े टेंडर पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

Arun Tiwari | Aug 03, 2026, 14:39 IST
दिलीप बिल्डकॉन का टेंडर ववाद
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद की दो हजार 549 करोड़ 86 लाख की पैरी लिंक नहर परियोजना के टेंडर को लेकर विवाद गहरा गया है। दिलीप बिल्डकॉन को टेंडर दिए जाने पर आरोप लगे हैं। मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है।

समझें क्या है पूरा मामला :

  • छत्तीसगढ़ के गरियाबंद की पैरी परियोजना पर विवाद
  • दिलीप बिल्डकॉन के टेंडर पर उठे सवाल
  • 2500 करोड़ की पाइपलाइन बिछाने की परियोजना
  • टेंडर की शर्तें पूरी नहीं करती कंपनी
  • किस अफसर ने किया सीएम को गुमराह

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद की एक परियोजना के टेंडर पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामला सीएम को गुमराह कर चहेती कंपनी को टेंडर देने का है। यह टेंडर दिलीप बिल्डकॉन को दिया गया है जिसकी पात्रता पर सवाल खड़े हुए हैं।



आरोप यह है कि नियमों की शर्तें पूरी न करने के बाद भी इस कंपनी को टेंडर दे दिया गया। टेंडर 27 जुलाई 2026 को रात 10 बजकर 16 मिनट पर खोला गया। टेंडर की शर्तों को लेकर यह पूरा मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। इस टेंडर को रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा है।



क्या है मामला :

यह जल संसाधन विभाग का प्रोजेक्ट है। यह सिकासार जलाशय गरियाबंद से कोडर जलाशय महासमुंद तक पाइपलाइन निर्माण की इस परियोजना है। इसकी कुल अनुमानित लागत दो हजार 549 करोड़ 86 लाख रूपए है। टेंडर की शर्तों के अनुसार इस कार्य के लिए किसी भी जॉइंट वेंचर की अनुमति नहीं थी। और टेंडर भरने वाली कंपनी को प्राइम कॉन्ट्रैक्टर के रूप में स्वयं के नाम पर अनुभव होना अनिवार्य था। लेकिन हो गया इन सब शर्तों के उलट काम वो भी रातों-रात। अब सवाल यही है कि ऐसा क्यों हुआ, किसने किया और कौन-कौन इसमें शामिल थे। किसकी दिलचस्पी इस कंपनी को टेंडर देने में थी।



पात्रता पर उठे चार बड़े सवाल :

जॉइंट वेंचर अनुभव का अवैध उपयोग:

शिकायत के मुताबिक दिलीप बिल्ड कॉन ने पात्रता साबित करने के लिए गांधी सागर 2 मल्टी विलेज स्कीम का अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया है। दस्तावेजों से पता चलता है कि यह कार्य उन्होंने अकेले नहीं बल्कि DBL-SIPL (JV) के तहत पूरा किया था। नियमों के मुताबिक इस टेंडर में केवल प्राइम कांट्रैक्टर का अनुभव ही मान्य है ज्वाइंट वेंचर का नही।



वित्तीय पात्रता में बड़ी चूक:

टेंडर की शर्तों के अनुसार ठेकेदार के पास कुल प्रोजेक्ट लागत का कम से कम 50 फीसदी यानी 1274.93 करोड़ रूपए के बराबर काम का अनुभव होना चाहिए।



दिलीप बिल्डकॉन ने एक हजार 302 करोड़ 29 लाख की लागत के जिस गांधी सागर प्रोजेक्ट का अनुभव दिखाया उसमें उनकी हिस्सेदारी केवल 65 फीसदी थी।



इस हिसाब से उनका व्यक्तिगत अनुभव मात्र 846 करोड़ 48 लाख रूपए का होता है जो निर्धारित पात्रता सीमा से 428 करोड़ रूपए कम है।



टेंडर प्रक्रिया में जल्दबाजी:

दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि इस बड़े टेंडर की दरें 27 जुलाई 2026 को रात 10:16 बजे खोली गईं। अरविंद कुमार कोशल द्वारा रात के समय ही टेंडर ओपन करने और तत्काल मूल्यांकन करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।



नियमों की अनदेखी:

टेंडर में स्पष्ट लिखा है कि ठेकेदार को उसी नाम और शैली में अनुभव होना चाहिए जिससे उसने बोली लगाई है। दिलीप बिल्डकॉन ने प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में बोली लगाई, जबकि उनका अनुभव प्रमाणपत्र एक जॉइंट वेंचर के नाम पर है।



विभाग की भूमिका पर सवाल :

हैरानी की बात यह है कि इन स्पष्ट खामियों और शर्तों के उल्लंघन के बावजूद जल संसाधन विभाग ने दिलीप बिल्डकॉन को टेंडर दे दिया। विभाग के अफसरों ने इन दस्तावेजों को एप्रूव भी कर दिया गया।



रात के अंधेरे में खुली वित्तीय बिड:

इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इन तकनीकी खामियों के बावजूद विभाग ने दिलीप बिल्डकॉन को अयोग्य घोषित करने के बजाय उसकी वित्तीय बिड खोल दी। रिपोर्ट के अनुसार 27 जुलाई 2026 को रात 10:16 बजे असामान्य रूप से बिड की दरों को ओपन किया गया फाइनेंशियल बिड कंपेरिजन शीट के अनुसार दिलीप बिल्डकॉन को सबसे कम बोली लगाने वाला घोषित किया गया है।



टेंडर प्रक्रिया में हुई इस कूट रचना ने जल संसाधन विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर दिया है। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि दिलीप बिल्ड कॉन मुख्य शर्तों को पूरा नहीं कर रहा है, इसके बावजूद उसे टेंडर दिया गया।



हाईकोर्ट पहुंचा मामला :

टेंडर के नियमों को लेकर यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस याचिका में टेंडर क नियम और शर्तों पर सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें पात्रता पूरी करने वाली कंपनी को बाहर करने का भी आरोप लगाया गया है। इस पूरे टेंडर को रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



महत्वपूर्ण बिंदु :

  • परियोजना:पैरी लिंक नहर (30 महीने का निर्माण समय)।
  • विभाग: जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।
  • प्रमुख कंपनियां: दिलीप बिल्डकॉन और एनसीसी लिमिटेड

निष्कर्ष :

शिकायत पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड निविदा की मुख्य शर्तों को पूरा नहीं करती है। ऐसे में इतने 2500 करोड़ वाले बड़े प्रोजेक्ट को एक अपात्र ठेकेदार को सौंपना विभाग की कार्यप्रणाली और नियत पर सवाल खड़े करता है।



FAQ

  1. गरियाबंद पैरी लिंक परियोजना क्या है?
    यह छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की करीब 2,549.86 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना है, जिसके तहत सिकासार जलाशय (गरियाबंद) से कोडर जलाशय (महासमुंद) तक पाइपलाइन बिछाई जानी है।
  2. दिलीप बिल्डकॉन के टेंडर पर विवाद क्यों हुआ?
    याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने टेंडर की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं किया, फिर भी उसे योग्य मानते हुए टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया और वित्तीय बोली खोली गई।


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