LPG संकट ; गैस बुकिंग का आंकड़ा 40 हजार पार, वितरण 25% भी नहीं

Aishwarya Dwivedi | Apr 09, 2026, 13:32 IST
Gas Crisis CG RAIPUR Bookings Cross 40000 Mark Deliveries Fall
रायपुर में गैस सिलेंडर की किल्लत और वितरण में देरी से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। बुकिंग बढ़ने के बावजूद, सिलेंडर की डिलीवरी में 30-35 दिन लग रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर की डिलीवरी का काम धीमा है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों गैस सिलेंडर के लिए मची त्राहि-त्राहि मची हुई हैं। शासन-प्रशासन के 'सुशासन' दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक ओर जहां खाद्य विभाग के अधिकारी फाइलों में 'पर्याप्त स्टॉक' का आंकड़ा दिखा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राजधानी की हजारों रसोइयों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। आलम यह है कि उपभोक्ता बुकिंग के बाद हफ्तों नहीं, बल्कि महीनों इंतजार करने को मजबूर हैं।



दावों का मायाजाल

संबंधित विभाग के आला अफसरों की मानें तो जिले में गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। लेकिन अगर हकीकत देखनी है, तो किसी भी गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर लगी लंबी कतारों को देखा जा सकता है। अधिकारियों के सब ठीक है वाले बयान उन उपभोक्ताओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा काम कर रहे हैं। जो सुबह से अपना काम-धंधा छोड़कर खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर भटक रहे हैं।



आंकड़ों की जुबानी

जिले में लंबित बुकिंग के आंकड़े चीख-चीखकर अव्यवस्था की कहानी बयां कर रहे हैं



  • लंबित बुकिंग: लगभग 40,000 (और हर घंटे बढ़ रही है)।
  • वितरण दर: कुल बुकिंग का 25% से भी कम।
  • प्रशासन का तर्क: स्टॉक पर्याप्त है, वितरण में कोई समस्या नहीं।
  • जमीनी स्थिति: इंडेन और भारत जैसी बड़ी कंपनियों की एजेंसियां 12 से 15 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं दे पा रही हैं।

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता 'खेला'

हैरानी की बात यह है कि शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद गैस एजेंसियों की मनमानी जारी है। जब स्टॉक पर्याप्त है, तो वितरण 'कछुआ गति' से क्यों हो रहा है? क्या यह कृत्रिम किल्लत किसी बड़े 'खेल' का हिस्सा है? जिले में हर दिन बुकिंग का ग्राफ जिस तेजी से ऊपर जा रहा है, वितरण की सुस्त रफ्तार ने प्रशासन की मॉनिटरिंग क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



सिस्टम की लाचारी या मिलीभगत

शहर से लेकर गांव तक स्थिति भयावह है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति यह है कि 50 दिन के बाद उपभोक्ता को दूसरा LPG सिलेंडर नसीब हो रहा है। प्रशासन का अपने ही दावों पर कायम रहना और जमीनी स्तर पर समाधान न निकाल पाना यह दर्शाता है कि या तो सिस्टम लाचार है या फिर कहीं न कहीं वितरण प्रक्रिया में बड़ी सेंध लगी है।



निष्कर्ष

रायपुर की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जब तक गोदामों से निकलकर ऐलपीजी सिलेंडर रसोई तक नहीं पहुंचता, तब तक प्रशासन के "स्टॉक फुल" वाले दावे केवल कागजी हवाई किले ही नजर आएंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से कब जागता है और आम जनता को इस 'गैस संकट' से कब निजात मिलती है।



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