बिलासपुर में बड़ा साइबर अटैक : सेंट्रल यूनिवर्सिटी का समर्थ पोर्टल हैक
NEWS IN SHORT
- समर्थ पोर्टल हैक से छात्रों के डेटा पर खतरा
- पेपर लीक की आशंका, परीक्षा प्रभावित हो सकती है
- फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई, 7 दिन में रिपोर्ट तय
- छात्र और अभिभावक चिंतित, सुरक्षा मजबूत करने की मांग
- यूनिवर्सिटी में प्रश्नपत्र और डेटा सुरक्षा पर सवाल
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित गुरुघासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के समर्थ पोर्टल के हैक होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। इस घटना के बाद परीक्षा और डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ छात्रों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुँच गए थे, जिससे पेपर लीक होने की आशंका और बलवती हो गई है। यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है, जो 7 दिन में रिपोर्ट पेश करेगी।
समर्थ पोर्टल हैक और उसके प्रभाव
समर्थ पोर्टल का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया, परीक्षा प्रबंधन, छात्रों के दस्तावेज और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है। पोर्टल हैक होने के साथ ही छात्रों के निजी डेटा जैसे आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और शैक्षणिक दस्तावेज लीक होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी स्तर की परीक्षाएं चल रही हैं, और लगभग 32 विभागों के प्रश्नपत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज इस घटना से प्रभावित हो सकते हैं।
छात्रों ने कहा है कि प्रश्नपत्र और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का यह लीक उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि अभी तक प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों तक पहुंचे प्रश्नपत्र वास्तविक थे या नकली।
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार, 29 मई की शाम अधिकारियों की बैठक में स्थिति की समीक्षा की। प्रबंधन ने कहा कि तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पोर्टल कैसे हैक हुआ। प्रबंधन के अनुसार, पोर्टल हैक से परीक्षा से जुड़ा प्रशासनिक डेटा और छात्रों के व्यक्तिगत जानकारी पर असर पड़ सकता है।
प्रो. मनीष श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी, ने बताया कि पूरे मामले की समीक्षा के बाद पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई है। कमेटी में विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट 7 दिन में पेश करनी अनिवार्य है।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं। इस कमेटी के सदस्य हैं प्रो. एस.सी. श्रीवास्तव, जो निदेशक, अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रकोष्ठ हैं प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रॉक्टर और अनुशासन प्रभारी, प्रो. खेमचंद देवांगन, रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. भारती अहिरवार, विशेष कार्याधिकारी (विकास) और टी.पी. सिंह, सहायक कुलसचिव (शैक्षणिक)।
यह कमेटी 7 दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसमें पोर्टल हैक होने का कारण और संभावित प्रभाव की जानकारी शामिल होगी। कमेटी को 7 दिन में रिपोर्ट पेश करनी है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पोर्टल हैक कब और कैसे हुआ।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ती चिंता
छात्रों और अभिभावकों ने पोर्टल हैक होने के बाद चिंता जताई है। लॉगिन डिटेल्स सार्वजनिक होने से छात्रों के डेटा के दुरुपयोग का खतरा है। छात्रों का कहना है कि समर्थ पोर्टल पर परीक्षा, एडमिशन और शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। ऐसे में यदि पोर्टल की सुरक्षा में चूक होती है, तो यह हजारों छात्रों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
कई छात्रों ने यूनिवर्सिटी से पोर्टल की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रबंधन ने तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी है कि पोर्टल कैसे हैक हुआ और डेटा लीक की संभावना कितनी है।
प्रश्नपत्र लीक का दावा
कुछ छात्रों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुँचने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि यह प्रश्नपत्र परीक्षा में उपयोग किए गए प्रश्नों के समान थे। हालांकि विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अभी तक प्रश्नपत्र लीक होने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि प्रश्नपत्र वास्तविक थे या नकली।
32 विभागों के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले प्रभावित होने की आशंका ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पोर्टल की सुरक्षा को मजबूत नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे मामले बार-बार सामने आ सकते हैं। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने यह भी कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी किए बिना निष्पक्ष और तकनीकी रूप से मजबूत जांच की जाएगी।
जांच की प्रक्रिया
रात में अधिकारियों की बैठक बुलाई गई और स्थिति का आकलन किया गया।
पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया।
कमेटी में विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
रिपोर्ट 7 दिन में तैयार कर प्रस्तुत की जाएगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने तक छात्रों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
FAQ
- समर्थ पोर्टल हैक कब हुआ?
अभी तक तारीख स्पष्ट नहीं है। जांच के बाद ही पता चलेगा। - क्या प्रश्नपत्र लीक हुआ है?
अभी तक पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। दावा किया गया है कि कुछ छात्रों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचे। - कितने विभाग प्रभावित हो सकते हैं?
यूनिवर्सिटी में 32 विभागों की परीक्षा प्रभावित हो सकती है। - छात्रों की कौन सी जानकारी लीक हो सकती है?
आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल, शैक्षणिक दस्तावेज और लॉगिन डिटेल्स।
यह खबरें भी पढ़े...
NEET पेपर लीक पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- बच्चों की फीस माफ करें...
NSUI ने घेरा गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी, कुलपति का पुतला फूंका
बिलासपुर हाई कोर्ट : वन भूमि पर कब्जा करने वालों की याचिका खारिज
छत्तीसगढ़ में बड़ा आंदोलन : ग्रामीणों ने दफ्तरों में जड़ा ताला, कर्मचारियों को बनाया बंधक