बिलासपुर हाई कोर्ट : वन भूमि पर कब्जा करने वालों की याचिका खारिज

Aishwarya Dwivedi | May 27, 2026, 17:54 IST
Share
Bilaspur High Court
Bilaspur High Court

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महामाया पहाड़ और डबरीपानी आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कब्जा करने वाले 197 लोगों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ठोस दस्तावेजों के अभाव में कोर्ट ने बेदखली नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 197 कब्जाधारियों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • महामाया पहाड़ और डबरीपानी आरक्षित वन क्षेत्र का यह मामला है।
  • जस्टिस एन.के. व्यास की वेकेशन बेंच ने फैसला सुनाया।
  • याचिकाकर्ता जमीन पर अपना कानूनी अधिकार साबित नहीं कर पाए।
  • वन विभाग के लिए अब बेदखली का रास्ता साफ हो गया।

NEWS IN DETAIL

उत्तर छत्तीसगढ़ के जंगलों में सरकारी और आरक्षित भूमि (रिजर्व फॉरेस्ट) पर अवैध कब्जे का खेल सालों से चल रहा है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिलासपुर हाई कोर्टकी वेकेशन बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महामाया पहाड़ और डबरीपानी क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जा करने वाले 197 कब्जाधारियों की याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।

जस्टिस एन.के. व्यास की वेकेशन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया कि आरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।

वन विभाग के बेदखली नोटिस को दी गई थी चुनौती

पूरा मामला तब गरमाया जब जिला प्रशासन और वन विभाग ने आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से मकान बनाकर रह रहे लोगों को बेदखली का अल्टीमेटम दिया। मुख्य याचिकाकर्ता रशीदा खातून और अन्य कब्जाधारियों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिका में बताया गया कि वन विभाग ने 17 मार्च 2026.को उन्हें एक नोटिस जारी किया था, जिसमें 7 दिनों के भीतर जंगल की जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया, तो विभाग बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करेगा।

20 साल से रह रहे हैं, बिना पुनर्वास हटाना गलत

कब्जाधारियों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं और वहां उनके पक्के व स्थाई मकान बन चुके हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने पैरवी करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या समुचित व्यवस्थापन (पुनर्वास) के हटाना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने यह भी दलील दी कि जनवरी 2025 में डीएफओ (DFO) के समक्ष जरूरी दस्तावेज भी पेश किए गए थे, जिसे वन विभाग ने अमान्य कर दिया था।

पुख्ता दस्तावेजों के अभाव में कोर्ट सख्त

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने कब्जाधारियों को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस एन.के. व्यास ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता डीएफओ या अदालत के समक्ष ऐसा कोई भी ठोस और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिससे आरक्षित वन भूमि पर उनका कानूनी अधिकार साबित हो सके।

कोर्ट का रुख:.पुख्ता सबूतों के अभाव में आरक्षित वन क्षेत्र (Reserve Forest) में अवैध कब्जे को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।

इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने सभी 197 याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे अब वन विभाग के लिए बेदखली की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

निष्कर्ष

आरक्षित वन भूमि पर अवैध निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच कोर्ट का यह फैसला एक कड़ा संदेश देता है। बिना वैध दस्तावेजों के सालों से रह रहे कब्जाधारियों को राहत न देकर, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कानूनन रिजर्व फॉरेस्ट की सुरक्षा और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त रखना सर्वोपरि है।

यह खबरें भी पढ़ें...

सरकार ने उद्योग लगाने के लिए कर दिया जंगल की जमीन का डायवर्सन, 18 इंडस्ट्री को दी 2200 एकड़ वन भूमि, 25 फीसदी जिंदल को

बालाघाट में 62 हेक्टेयर वन भूमि पर बॉक्साइट खनन प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोका

नक्शों में कैद सच, जमीन पर उलझी हकीकत; 70 साल से राजस्व और वन भूमि पर विवाद, हे सरकार! कब होगा समाधान?

जोधपुर में वन भूमि पर बसी बस्ती पर एक्शन की तैयारी, 9,500 घरों पर चलेगा बुलडोजर

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • वन विभाग
  • पर्यावरण संरक्षण
  • बिलासपुर हाई कोर्ट
  • डीएफओ
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा