किराए के हेलीकॉप्टर-विमानों से उड़ेगी सरकार, एयर एंबुलेंस के लिए भी नया टेंडर

VINAY VERMA | Sept 26, 2026, 17:05 IST
एयर एंबुलेंस के लिए भी नया टेंडर
छत्तीसगढ़ सरकार VIP-VVIP मूवमेंट और एयर एंबुलेंस के लिए फिर से किराए पर हेलीकॉप्टर और विमान लेने जा रही है। विमानन निदेशालय ने तीन साल के लिए निजी ऑपरेटरों का पैनल बनाने टेंडर जारी किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर किराए के हेलीकॉप्टर और एयरोप्लेन से उड़ान भरने जा रही है। विमानन निदेशालय ने VIP-VVIP मूवमेंट और एयर एंबुलेंस के लिए तीन साल का टेंडर जारी किया है। जरूरत पड़ने पर निजी ऑपरेटर से विमान या हेलीकॉप्टर लिया जाएगा और इसका भुगतान सरकारी खजाने से होगा।



तीन साल का इंतजाम

विमानन निदेशालय ने Ref No./DoA/Ops/tender/2026/887 के जरिए पात्र ऑपरेटरों से RFP मांगा है। चयनित ऑपरेटरों का पैनल बनेगा। इसके बाद सरकार जब चाहेगी, जरूरत के हिसाब से पैनल में शामिल कंपनियों से हेलीकॉप्टर या विमान लिया जा सकेगा। विभाग ने इसे As-and-When-Required Basis पर रखा है।



22 सितंबर से प्रक्रिया शुरू

टेंडर से जुड़े दस्तावेज 22 सितंबर 2026 से राज्य के e-Procurement पोर्टल पर उपलब्ध हैं। प्री-बिड सवाल 1 अक्टूबर शाम 5 बजे तक ऑनलाइन भेजे जा सकेंगे। 5 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे महानदी भवन में प्री-बिड मीटिंग रखी गई है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से शामिल होने की व्यवस्था है।



एक घंटे का किराया लाखों

निजी विमान किराए पर लेने का खर्च भी बड़ा है। छोटे और हल्के प्राइवेट जेट का किराया करीब 1.5 लाख से 4 लाख रुपए प्रति घंटा तक बताया जाता है। बड़े VIP विमान के लिए यह रकम और ज्यादा हो सकती है। असल किराया विमान के प्रकार, रूट, उड़ान के समय और ऑपरेटर की शर्तों पर तय होता है।



264 करोड़ पहले ही जा चुके

चार्टर सेवाओं पर सरकार पहले भी करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है। विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले पांच साल में किराए के हेलीकॉप्टर और विमानों पर 264 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए। अकेले 2021 से जनवरी 2025 तक हेलीकॉप्टर किराए के लिए 249 करोड़ 15 लाख रुपए का भुगतान किया गया।



अब तीन साल का नया पैनल

मुख्यमंत्री और राज्यपाल के दौरे से लेकर आपदा राहत और मेडिकल इमरजेंसी तक चार्टर सेवाओं का इस्तेमाल होता रहा है। इन परिस्थितियों में विमान की जरूरत हो सकती है, लेकिन बड़ा सवाल खर्च का है। पुराने खर्च का आंकड़ा 264 करोड़ पार कर चुका है। अब तीन साल के नए पैनल के बाद यह खर्च कहां तक पहुंचेगा, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।



जरूरत पर उड़ान, खजाने से भुगतान

नए पैनल से जरूरत के समय ऑपरेटर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। VIP-VVIP मूवमेंट हो या मेडिकल इमरजेंसी, सरकार पैनल में शामिल कंपनियों से विमान या हेलीकॉप्टर ले सकेगी। यानी उड़ान जरूरत के मुताबिक होगी, लेकिन हर उड़ान का बिल सरकारी खजाने पर ही आएगा।



ये खबरें भी पढ़ें…

छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा में अफसरों की मौज, मंत्री के नाम पर किराए की 12 लग्जरी गाड़ियां



छत्तीसगढ़ पुलिस के वाहनों पर सालभर में 350 करोड़ खर्च, किराए की गाड़ियों पर ही 130 करोड़ रुपए



छत्तीसगढ़ पुलिस ने 5 जिलों में दौड़ा दीं किराए की 56 हजार गाड़ियां, 135 करोड़ चुकाया किराया



CG News | छत्तीसगढ़ सरकार की माली हालत खस्ता और पुलिस कर रही फिजूलखर्ची !



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • छत्तीसगढ़ सरकार
  • हेलीकॉप्टर
  • टेंडर
  • एयर एंबुलेंस