कार्यालय में जम्हाई लेने वाले बाबू-अधिकारियों पर सरकार की नजर, आदत दूर भगाने कोर्स करवाएगा सामान्य प्रशासन विभाग
विभागों को 3 नवंबर तक इसकी रिपोर्ट भी भेजनी होगी।
मुख्य सचिव की मंजूरी से आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को आदेश भेजा है। सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का कोर्स तय तारीख तक अधूरा नहीं रहना चाहिए।
दो कोर्स, दो घंटे से ज्यादा ट्रेनिंग
सरकारी कर्मचारियों को पहला कोर्स ‘कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन’ करना होगा। इसकी अवधि 59 मिनट है। दूसरे कोर्स का नाम ‘Stress Management through Meditation and Yog Nidra’ है। इसे पूरा करने में 1 घंटा 12 मिनट लगेंगे। यानी दोनों कोर्स मिलाकर करीब 2 घंटे 11 मिनट की ऑनलाइन ट्रेनिंग करनी होगी। यह व्यवस्था राजपत्रित और अराजपत्रित, दोनों तरह के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी।
रैंकिंग सुधारने की भी चिंता
सरकार ने इस आदेश के पीछे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, कामकाज की संस्कृति सुधारने और कर्मचारियों की क्षमता विकसित करने की बात कही है। इसके लिए केंद्र सरकार के मिशन कर्मयोगी के तहत चल रहे iGOT कर्मयोगी पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। आदेश में राज्य की इस पोर्टल पर परफॉर्मेंस और रैंकिंग सुधारने का उद्देश्य भी दर्ज है। यानी कर्मचारियों की ट्रेनिंग के साथ सरकार की नजर अपनी रैंकिंग पर भी है।
तीन नवंबर को खुलेगा हिसाब
विभागों और कार्यालय प्रमुखों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी होने की स्थिति की समीक्षा करनी होगी। इसके बाद 3 नवंबर तक पूरी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के ई-मेल DS-igotkarmayogi@cg.gov.in पर भेजनी होगी। मतलब, सिर्फ कोर्स का आदेश जारी करके जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। मंत्रालय यह भी देखेगा कि किस विभाग में कितने कर्मचारियों ने ट्रेनिंग पूरी की और कहां काम बाकी है।
सवाल: काम सुधरेगा या रैंकिंग?
सरकारी दफ्तरों में कामकाज की धीमी रफ्तार, फाइलों के अटकने और आम लोगों को चक्कर कटवाने की शिकायतें नई नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या दो घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग से दफ्तरों की कार्यसंस्कृति बदल जाएगी? क्या तनाव प्रबंधन का कोर्स करने के बाद फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी और लोगों के काम समय पर होंगे? क्या सरकार कर्मचारियों की ट्रेनिंग के साथ उनके कामकाज की गुणवत्ता भी जांचेगी? और अगर कोई कर्मचारी कोर्स पूरा कर ले, लेकिन दफ्तर में काम की रफ्तार फिर भी सुस्त रहे, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? सरकार ने कोर्स पूरा करने की तारीख तो तय कर दी है, लेकिन आम जनता को बेहतर सेवा देने का नतीजा कैसे मापा जाएगा, यह बड़ा सवाल है।
अब कोर्स पूरा करने की दौड़
फिलहाल सभी सरकारी कर्मचारियों को 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स पूरे करने हैं। कार्यालय प्रमुखों पर इसकी निगरानी और रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी है। आदेश का पालन नहीं होने पर विभागों की प्रगति सामने आएगी। हालांकि असली परीक्षा ऑनलाइन ट्रेनिंग पूरी करने की नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों में कामकाज सुधारने की होगी। जनता को राहत तभी मिलेगी, जब ट्रेनिंग का असर फाइलों की रफ्तार, कर्मचारियों के व्यवहार और समय पर होने वाले काम में भी दिखाई देगा।
कड़ा इम्तिहान बाकी
फिलहाल 31 अक्टूबर की डेडलाइन सिर पर है और मंत्रालय से लेकर ब्लॉक स्तर के दफ्तरों में ऑनलाइन सर्टिफिकेट हासिल करने की होड़ मचना तय है। लेकिन जनता यह देखने का इंतजार कर रही है कि 3 नवंबर को जब रिपोर्ट जीएडी पहुंचेगी, तब कुर्सियों पर खर्राटे भरने वाले इन साहबों की कार्यशैली में कोई रत्ती भर भी बदलाव दिखता है या फिर यह सब महज एक औपचारिकता बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा।