जांच के नाम पर चल रही हीला हवाली पर सख्त सरकार, अब मामला निपटाने 6 महीने की डेडलाइन,अफसर के आदेश पर घमासान

Arun Tiwari | Apr 22, 2026, 10:39 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने विभागीय जांच में देरी पर सख्त कदम उठाया है। अब छह महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, वित्तीय गड़बड़ी में सख्ती बढ़ाई गई है।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में चल रही विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर सरकार अब सख्त हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी ताजा निर्देश में साफ कहा गया है कि अब जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को समय-सीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। DPI ने पाया है कि विभागीय जांच से जुड़े कई प्रस्ताव अधूरे और नियमों के विपरीत भेजे जा रहे हैं। इसमें आरोपों का स्पष्ट विवरण, साक्ष्य और गवाहों की सूची तक शामिल नहीं होती।



इस वजह से न सिर्फ फैसला लेने में देरी हो रही है। बल्कि कई मामलों में दोषी कर्मचारियों को इसका फायदा भी मिल रहा है। संचालनालय ने यह भी कहा कि इन गलतियों के कारण कई कर्मचारी मामलों को अदालत में चुनौती दे रहे हैं जिससे निपटारा और लंबा खिंच रहा है।



जांच के लिए डेडलाइन :

नए निर्देश के तहत अब विभागीय जांच को तय समय में पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश में साफ लिखा है कि जो आदेश मेजर पेनाल्टी वाले हैँ उनकी जांच छह महीने में पूरी करनी होगी। वहीं माइनर पेनाल्टी वाले मामलों को छह महीने में निपटाना होगा। इससे साफ है कि DPI अब लंबित मामलों को तेजी से खत्म करना चाहता है। DPI ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम का सख्ती से पालन करें।



अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव में आरोप पत्र, आरोपों का विवरण, साक्ष्य सूची और गवाहों की सूची स्पष्ट रूप से शामिल करना अनिवार्य किया गया है। यदि कोई कर्मचारी सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है तो उसकी अनुपस्थिति दर्ज कर उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी ताकि मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।



स्पष्ट अभिमत के साथ भेजना होगा प्रस्ताव :

संचालनालय ने निर्देश दिया है कि शासन या DPI स्तर पर भेजे जाने वाले हर प्रस्ताव में डीटेल रिपोर्ट, संबंधित दस्तावेज और स्पष्ट अभिमत होना चाहिए। अगर मामला जिला या संभाग स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है, तो वहीं पर कार्रवाई कर उसकी जानकारी संचालनालय को देना जरूरी होगा। शासन या संचालनालय से प्राप्त शिकायतों पर भी निर्धारित समय-सीमा में जांच कर स्पष्ट अनुशंसा के साथ रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।



निलंबन और जांच प्रस्ताव के लिए जरूरी दस्तावेज :

DPI ने साफ किया है कि निलंबन या विभागीय जांच के प्रस्ताव के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसमें शामिल हैं



  • आरोप पत्र और उसका स्पष्ट विवरण
  • प्रमाण और गवाहों की सूची
  • संबंधित नियमों का उल्लेख
  • फैक्ट की जानकारी

वित्तीय अनियमितता के मामलों में सख्ती :

वित्तीय गड़बड़ी या गबन के मामलों में DPI ने विशेष सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में सभी प्रमाणिक दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां भेजना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया न जाए और सभी पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण कर ही प्रस्ताव भेजा जाए। जिस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है उसका पूरा सेवा विवरण निर्धारित प्रारूप में प्रस्ताव के साथ देना होगा। इससे जांच प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।



जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर घमासान :

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में एक तरफ प्रशासनिक सख्ती बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। दूसरी तरफ बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निजी स्कूलों की किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म को लेकर देर से जारी आदेश पर पालकों में नाराजगी देखी जा रही है।



ऐसे आदेश का क्या मतलब :

इसी बीच बिलासपुर में निजी स्कूलों द्वारा किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म को लेकर पालकों पर बढ़ते बोझ के बीच जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश सामने आया है। इस आदेश के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि अधिकांश स्कूलों में एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और पालक पहले ही महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीद चुके हैं। DEO ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल किसी भी छात्र या अभिभावक को किसी एक दुकान से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।



साथ ही स्कूल केवल मान्यता प्राप्त बोर्ड जैसे CBSE, ICSE, CGBSE के निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें ही लागू कर सकेंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी बैग, कॉपी या किताब पर स्कूल का नाम प्रिंट नहीं किया जाएगा और स्कूल दो से अधिक यूनिफॉर्म निर्धारित नहीं करेंगे। पालकों को 15 जून तक अपनी सुविधा के अनुसार किताबें खरीदने की छूट दी गई है। इस आदेश के बाद पालकों ने नाराजगी जताई है।



उनका कहना है कि जब एडमिशन और खरीदारी दोनों लगभग पूरी हो चुकी है, तब इस आदेश का क्या मतलब है। पालकों के मुताबिक यदि यह निर्देश समय पर जारी होते, तो उन्हें निजी स्कूलों और पब्लिशर्स की मनमानी से राहत मिल सकती थी। एक ओर DPI जांच में देरी को लेकर सख्ती दिखा रहा है, तो दूसरी ओर जिला स्तर पर आदेशों के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग के अंदर प्रशासनिक अनुशासन और जमीनी अमल के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।



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