हथकरघा संघ यूनिफॉर्म घोटाला: थान कपड़े के बदले आई कतरन, कंपनी से वसूली का आदेश

Aishwarya Dwivedi | Aug 14, 2026, 12:57 IST
हैंडलूम यूनिफ़ॉर्म घोटाले पर कार्रवाई
छत्तीसगढ़ हथकरघा संघ में स्कूल यूनिफॉर्म रंगाई के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ। हैदराबाद की कंपनी ने थान की जगह कतरन कपड़ा भेजा। लापरवाही पर गोदाम प्रभारी निलंबित हुए और 22 लाख वसूली का आदेश जारी हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • हथकरघा संघ ने यूनिफॉर्म रंगाई का काम दिया था।
  • हैदराबाद की कंपनी को लाखों मीटर कपड़ा भेजा गया।
  • कंपनी ने थान की जगह कतरन कपड़ा वापस भेजा।
  • अफसरों ने बिना बंडल खोले फर्जी रिपोर्ट तैयार की।
  • जांच के बाद गोदाम प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।

कैसे उजागर हुआ फर्जीवाड़ा

छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ में बड़ा घोटाला सामने आया है। यह मामला स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म से जुड़ा हुआ है। संघ ने कपड़े की रंगाई का काम दिया था। हैदराबाद की एक निजी कंपनी को काम सौंपा गया था। कंपनी को लाखों मीटर कपड़ा रंगने के लिए भेजा गया। वहां से कपड़ा वापस गोदाम में आ गया।



गोदाम में आए कपड़ों की सही जांच नहीं हुई। अधिकारियों ने बंडल खोलकर देखने की जहमत नहीं उठाई। लगभग छह महीने तक यह गड़बड़ी दबी रही। बाद में गोदाम प्रभारी ने अधिकारियों को सूचना दी। उन्होंने बताया कि कपड़ा हथकरघा संघ का नहीं है। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।तत्काल एक जांच कमेटी का गठन किया गया। जांच में कतरन कपड़ा होने की पुष्टि हो गई।



जिम्मेदारों पर गिरी गाज

मामले की पुष्टि होते ही कड़ी कार्रवाई की गई। तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर दिया गया। एक तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।



हाथकरघा संघ ने कंपनी को वसूली का नोटिस दिया। मारुति कोटेक्स लिमिटेड से 22.42 लाख रुपए वसूले जाएंगे। यह फर्जीवाड़ा शैक्षणिक सत्र 2025-26 की यूनिफॉर्म में हुआ। जेम पोर्टल के जरिए टेंडर जारी किया गया था।



कंपनी को कुल 65.06 लाख मीटर कपड़ा भेजा गया। कंपनी ने 63.16 लाख मीटर कपड़ा वापस किया। इसके साथ 1.90 लाख मीटर कटपीस भी भेजा गया। करीब 60 हजार मीटर कपड़ा बिल्कुल कतरन निकला।



करोड़ों का है यूनिफॉर्म बजट

राज्य के सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म बांटी जाती है। करीब 39 हजार स्कूलों के बच्चे इसमें शामिल हैं। हर साल 50 लाख से अधिक छात्रों को यूनिफॉर्म मिलती है। इस योजना पर करीब 140 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। कपड़ा तैयार करने में लंबा समय लगता है। संघ पहले धागे की खरीदारी करता है।



यह धागा बुनकर समितियों को सौंपा जाता है। राज्य की 345 समितियां कपड़ा तैयार करती हैं। समितियां करीब 60 लाख मीटर थान बनाती हैं। शुरुआती कपड़ा ग्रे रंग का होता है। इसे तय रंग में रंगने के लिए भेजा जाता है। हैदराबाद की कंपनी सालों से यह काम कर रही थी।



कंपनी ने पल्ला झाड़ा

हैदराबाद की एजेंसी ने पेनाल्टी देने से मना कर दिया। उसने संघ के आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का दावा है कि उसने सही कपड़ा भेजा था। कंपनी के अनुसार गड़बड़ी गोदाम के अंदर हुई है। संघ के अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है।



पेनल्टी नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। जांच अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है। तकनीकी जांच किए बिना रिपोर्ट बना दी गई थी। कतरन कपड़े से यूनिफॉर्म की सिलाई नहीं हो सकती। इससे पैंट और शर्ट की फिनिशिंग खराब होती है।



डिजाइन वाले कपड़ों का लुक भी बिगड़ जाता है। इसी कारण कतरन कपड़े की कीमत बहुत कम होती है। अब पूरे मामले की परतें खोली जा रही हैं। आने वाले दिनों में और कार्रवाई हो सकती है।



FAQ

  1. हथकरघा संघ घोटाला किस राज्य से संबंधित है?
    उत्तर: यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य के हथकरघा संघ से जुड़ा हुआ है। इसमें स्कूल यूनिफॉर्म की रंगाई के दौरान कतरन कपड़ा जमा कराने का फर्जीवाड़ा हुआ है।
  2. छत्तीसगढ़ में स्कूली छात्रों की यूनिफॉर्म तैयार करने की प्रक्रिया क्या है?
    उत्तर: हथकरघा संघ सबसे पहले धागा खरीदता है, जिसे राज्य की 345 बुनकर समितियां थान (ग्रे कपड़ा) में बदलती हैं। इसके बाद इस कपड़े को तय रंग में रंगने (Dyeing) के लिए भेजा जाता है।
  3. छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग कितने छात्रों को सरकारी यूनिफॉर्म बांटी जाती है?
    उत्तर: राज्य के लगभग 39 हजार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 50 लाख से अधिक छात्रों को हर साल यूनिफॉर्म बांटी जाती है, जिस पर करीब 140 करोड़ रुपये का बजट खर्च होता है।

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