सक्ती धान घोटाला : टॉयलेट सफाई का फर्जी वीडियो बनाकर फंसा आरोपी

Aishwarya Dwivedi | Aug 12, 2026, 16:30 IST
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शक्ति पैडी स्कैम के आरोपी को गिरफ़्तार किया गया
शक्ति पैडी स्कैम के आरोपी को गिरफ़्तार किया गया

सक्ती जिले में 89 लाख के धान घोटाले का आरोपी गिरफ्तार हो गया है। आरोपी ने बचने के लिए टॉयलेट साफ करने का फर्जी वीडियो बनाकर प्रशासन पर झूठे आरोप लगाए थे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सक्ती जिले के पुटीडीह में 89 लाख रुपए का धान घोटाला हुआ।
  • संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत पर घोटाला करने का मुख्य आरोप है।
  • आरोपी ने बचने के लिए टॉयलेट साफ करते वीडियो बनाया।
  • उसने मानवाधिकार आयोग में सक्ती कलेक्टर की शिकायत भी कर दी।
  • पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा।

करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तारी

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक अजीब मामला सामने आया है। यहां धान खरीदी में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ था। इस घोटाले का आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है।

आरोपी का नाम शशिकांत महंत बताया जा रहा है। वह प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS – Primary Agricultural Credit Society) में पदस्थ था। उस पर 89 लाख रुपए के धान घोटाले का आरोप है।

घोटाला उजागर होने के बाद कार्रवाई शुरू हुई। प्रशासन ने अप्रैल में ही एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज करा दी थी। इसके बाद से ही आरोपी लगातार बचने के रास्ते खोज रहा था।

टॉयलेट सफाई के वीडियो का षड्यंत्र

आरोपी शशिकांत महंत ने मानवाधिकार आयोग (NHRC – National Human Rights Commission) में एक शिकायत दर्ज कराई। उसने 6 अगस्त 2026 को यह पत्र भेजा था। इसमें सक्ती कलेक्टर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे।

उसने दावा किया कि उससे टॉयलेट साफ कराया गया। इसके सबूत के तौर पर उसने एक वीडियो भी पेश किया। वीडियो में वह खुद टॉयलेट की सफाई करता दिख रहा था। कोई अन्य व्यक्ति उसका वीडियो बना रहा था।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो सामने आते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मीडिया ने तुरंत इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया।

सक्ती कलेक्टर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा आरोप है। आरोपी भ्रष्टाचार से बचने के लिए नाटक कर रहा है।

कलेक्टर ने सीधे तौर पर कहा कि यह एक षड्यंत्र है। आरोपी खुद कहीं भी जाकर ऐसा वीडियो बना सकता है। प्रशासन उसकी हर हरकत पर चौबीसों घंटे निगरानी नहीं रख सकता।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी चल रही है। अगर प्रशासन ने ऐसा कराया होता तो वीडियो आरोपी के पास कैसे मिलता।

दो महीने बाद हुई पुलिस कार्रवाई

पुटीडीह केंद्र में 89 लाख रुपए का धान कम पाया गया था। जांच के दौरान सहकारी समितियों के सहायक पंजीयक ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने 29 जून 2026 को एक नया आदेश पत्र जारी किया।

इस पत्र में अन्य दोषियों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने को कहा गया। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर द्रोण प्रताप शांडिल्य का नाम भी शामिल था। इसके अलावा प्राधिकृत अधिकारी श्याम बाई पर भी कार्रवाई के निर्देश थे।

निर्देश के बाद भी पुलिस कार्रवाई में देरी होती रही। आरोप है कि पुलिस दो महीने तक टालमटोल करती रही। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही थी। जब वरिष्ठ अधिकारियों का भारी दबाव बना तब पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। कोर्ट के आदेश के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। फर्जी वीडियो बनाकर जांच को भटकाने की कोशिश सफल नहीं होगी।

FAQ

  1. सक्ती धान घोटाले में कितने रुपए की हेराफेरी हुई थी?
    उत्तर: सक्ती जिले के पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में कुल 89 लाख रुपए के धान का घोटाला हुआ था। इसमें संस्था प्रबंधक समेत कई अन्य कर्मचारी शामिल थे।
  2. प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (PACS) का मुख्य कार्य क्या होता है?
    उत्तर: PACS (Primary Agricultural Credit Society) ग्राम स्तर पर किसानों को कृषि ऋण, उर्वरक, बीज उपलब्ध कराने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी का कार्य करती है।
  3. भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
    उत्तर: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत की गई थी।

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