सड़क से सोशल मीडिया तक जेन-जी की बुलंद आवाज, पर संसद और विधानसभाओं में सिर्फ 26
Rajesh Lahoti | Aug 07, 2026, 16:52 IST
जेन जी की राजनीति में भागीदारी
भारत की कुल आबादी का 25.8% हिस्सा होने के बावजूद जेन जी की राजनीतिक भागीदारी अभी बेहद सीमित है। देश में केवल 6 जेन जी सांसद और 20 विधायक हैं।
सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक जेन जी (Gen Z) की आवाज सबसे बुलंद सुनाई देती है, लेकिन जब बात देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं की आती है, तो यह आवाज महज एक हल्की सी गूंज बनकर रह जाती है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भले ही जेन जी देश की कुल आबादी का एक-चौथाई से ज्यादा हिस्सा हैं, लेकिन पूरे भारत में इनकी राजनीतिक नुमाइंदगी सिर्फ 26 जनप्रतिनिधियों तक सिमटी हुई है- जिनमें से 6 लोकसभा सांसद (MPs) और 20 विधायक (MLAs) हैं। भारत में चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल है, जो वैसे भी इस पूरी पीढ़ी के एक बहुत बड़े हिस्से को चुनावी दौड़ से बाहर कर देती है।
वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे (यानी 14 से 29 वर्ष की आयु वर्ग वाले) लोगों को जेन जी कहा जाता है। 2011 की जनगणना के अनुमानों के मुताबिक, 2026 में भारत की 142.6 करोड़ आबादी में से 36 करोड़ 74 लाख यानी 25.8% लोग जेन जी श्रेणी के हैं। केवल 25 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले जेन जी ही देश की आबादी का लगभग 8.9% हिस्सा बनाते हैं।
अगर इस उम्र के दायरे को थोड़ा बढ़ाकर 40 साल तक कर दिया जाए, तो युवा जनप्रतिनिधियों का यह आंकड़ा बढ़कर 397 विधायकों और 40 सांसदों तक पहुंच जाता है।
2024 में चुनी गई 18वीं लोकसभा ने जेन जी के प्रतिनिधियों को पहली बार देश के इस सबसे बड़े सदन में कदम रखने का सुनहरा मौका दिया। इसमें कांग्रेस के सबसे ज्यादा 3 जेन जी सांसद हैं, जिसके बाद समाजवादी पार्टी (SP) के 2 और लोजपा (रामविलास) का 1 सांसद है। राज्यवार देखें तो यूपी और कर्नाटक से 2-2 जेन जी सांसद हैं, जबकि बिहार और राजस्थान से 1-1 सांसद हैं।
![राजनीति में जेन जी]()
2024 के आम चुनाव में उतरे कुल 8,360 उम्मीदवारों में से महज 98 उम्मीदवार (1.2%) ही जेन जी थे, और जीत का परचम लहराने में केवल यही 6 सफल रहे।
इन छह सांसदों की खासियत यह है कि इनमें चार महिलाएं हैं, चार ग्रेजुएट हैं और दो पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। चुनावी हलफ़नामों के मुताबिक, प्रिया सरोज, सागर खांद्रे और संजना जाटव पेशेवर वकील हैं, शांभवी ने समाजशास्त्र (Sociology) में एम.ए. किया है, प्रियंका जरकीहोली एमबीए हैं, और पुष्पेंद्र सरोज ने लंदन की यूनिवर्सिटी से अकाउंटिंग एवं मैनेजमेंट में डिग्री ली है।
इनमें से पांच सांसद स्थापित राजनीतिक घरानों से ताल्लुक रखते हैं, केवल दलित समाज से आने वालीं संजना जाटव ही इकलौती ऐसी सांसद हैं, जिनका कोई राजनीतिक पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं है।
पुष्पेंद्र सरोज के पिता इंद्रजीत सरोज यूपी के पूर्व मंत्री और सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं, जबकि प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज खुद मौजूदा सपा विधायक और तीन बार के सांसद रह चुके हैं।
कांग्रेस के सागर खांद्रे के पिता ईश्वर खांद्रे कर्नाटक सरकार में मंत्री हैं और उनके दादा भी चार बार विधायक रहे। प्रियंका जरकीहोली के पिता सतीश जरकीहोली चार बार के विधायक और कर्नाटक के कद्दावर नेता हैं।
लोजपा (आर) की शांभवी चौधरी के पिता अशोक चौधरी बिहार की एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
543 सदस्यों वाली लोकसभा में अगर 40 साल या उससे कम उम्र के कुल नेताओं को देखें, तो यह आंकड़ा सिर्फ 40 (7.3%) तक ही पहुंच पाता है। इनमें सबसे ज्यादा 10 सांसद यूपी से हैं, इसके बाद कर्नाटक व आंध्र प्रदेश (5-5) और पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र (4-4) का नंबर आता है।
देश की 28 विधानसभाओं और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 4,131 विधायकों में से केवल 20 विधायक जेन जी हैं। इनमें से 6 अनुसूचित जाति (SC) और 3 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों से चुनकर आए हैं।
चूंकि जेन जी का कोई भी युवा 2022 से पहले चुनाव लड़ने की कानूनी उम्र (25 वर्ष) तक नहीं पहुंचा था, इसलिए इनमें से ज्यादातर विधायक पिछले दो सालों में ही चुने गए हैं - जिनमें से अकेले 9 विधायक 2026 में निर्वाचित हुए हैं।
![विधानसभाओं में Gen Z विधायक]()
तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सबसे ज्यादा 4 जेन जी विधायक हैं (3 टीवीके और 1 अन्नाद्रमुक से)। पश्चिम बंगाल में 3 विधायक हैं (तीनों भाजपा से)। इसके अलावा बिहार, मेघालय और तेलंगाना में 2-2 विधायक हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, पुडुचेरी और राजस्थान में 1-1 जेन जी विधायक है।
पार्टी के हिसाब से देखें तो भाजपा 5 जेन जी विधायकों के साथ सबसे आगे है, कांग्रेस के पास 4 और टीवीके (TVK) के पास 3 विधायक हैं।
इन 20 विधायकों में से 16 कम से कम ग्रेजुएट हैं (जिनमें 5 पोस्ट-ग्रेजुएट भी शामिल हैं)। 8 महिलाएं हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से 12 विधायक एकदम न्यूकमर हैं- यानी राजनीति में बिना किसी पारिवारिक बैकग्राउंड के आए हैं!
अगर 40 साल या उससे कम उम्र के सभी विधायकों को मिला लें, तो यह संख्या 397 हो जाती है। प्रतिशत के मामले में छत्तीसगढ़ की विधानसभा सबसे युवा है, जहां 35.6% विधायक 40 या उससे कम उम्र के हैं। इसके बाद तमिलनाडु (20.9%), मेघालय (16.7%), पश्चिम बंगाल (15.7%) और बिहार (15.6%) का स्थान है।
ये आंकड़े इसलिए बेहद अहम हैं क्योंकि 2029 के लोकसभा चुनावों तक जेन जी भारत के वोटरों का सबसे बड़ा समूह बन जाएगा। 2031 तक देश की कुल आबादी में जेन जी की हिस्सेदारी लगभग 26.3% होगी, जबकि मिलैनियल्स (Millennials) घटकर 21.7% रह जाएंगे। यानी आने वाले वक्त में भारत की सियासत का रुख और किस्मत तय करने की असली चाबी इसी जेन जी पीढ़ी के हाथों में होगी!
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इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भले ही जेन जी देश की कुल आबादी का एक-चौथाई से ज्यादा हिस्सा हैं, लेकिन पूरे भारत में इनकी राजनीतिक नुमाइंदगी सिर्फ 26 जनप्रतिनिधियों तक सिमटी हुई है- जिनमें से 6 लोकसभा सांसद (MPs) और 20 विधायक (MLAs) हैं। भारत में चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल है, जो वैसे भी इस पूरी पीढ़ी के एक बहुत बड़े हिस्से को चुनावी दौड़ से बाहर कर देती है।
वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे (यानी 14 से 29 वर्ष की आयु वर्ग वाले) लोगों को जेन जी कहा जाता है। 2011 की जनगणना के अनुमानों के मुताबिक, 2026 में भारत की 142.6 करोड़ आबादी में से 36 करोड़ 74 लाख यानी 25.8% लोग जेन जी श्रेणी के हैं। केवल 25 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले जेन जी ही देश की आबादी का लगभग 8.9% हिस्सा बनाते हैं।
अगर इस उम्र के दायरे को थोड़ा बढ़ाकर 40 साल तक कर दिया जाए, तो युवा जनप्रतिनिधियों का यह आंकड़ा बढ़कर 397 विधायकों और 40 सांसदों तक पहुंच जाता है।
लोकसभा में 6 युवा चेहरे
राजनीति में जेन जी
2024 के आम चुनाव में उतरे कुल 8,360 उम्मीदवारों में से महज 98 उम्मीदवार (1.2%) ही जेन जी थे, और जीत का परचम लहराने में केवल यही 6 सफल रहे।
इन छह सांसदों की खासियत यह है कि इनमें चार महिलाएं हैं, चार ग्रेजुएट हैं और दो पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। चुनावी हलफ़नामों के मुताबिक, प्रिया सरोज, सागर खांद्रे और संजना जाटव पेशेवर वकील हैं, शांभवी ने समाजशास्त्र (Sociology) में एम.ए. किया है, प्रियंका जरकीहोली एमबीए हैं, और पुष्पेंद्र सरोज ने लंदन की यूनिवर्सिटी से अकाउंटिंग एवं मैनेजमेंट में डिग्री ली है।
इनमें से पांच सांसद स्थापित राजनीतिक घरानों से ताल्लुक रखते हैं, केवल दलित समाज से आने वालीं संजना जाटव ही इकलौती ऐसी सांसद हैं, जिनका कोई राजनीतिक पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं है।
पुष्पेंद्र सरोज के पिता इंद्रजीत सरोज यूपी के पूर्व मंत्री और सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं, जबकि प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज खुद मौजूदा सपा विधायक और तीन बार के सांसद रह चुके हैं।
कांग्रेस के सागर खांद्रे के पिता ईश्वर खांद्रे कर्नाटक सरकार में मंत्री हैं और उनके दादा भी चार बार विधायक रहे। प्रियंका जरकीहोली के पिता सतीश जरकीहोली चार बार के विधायक और कर्नाटक के कद्दावर नेता हैं।
लोजपा (आर) की शांभवी चौधरी के पिता अशोक चौधरी बिहार की एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
543 सदस्यों वाली लोकसभा में अगर 40 साल या उससे कम उम्र के कुल नेताओं को देखें, तो यह आंकड़ा सिर्फ 40 (7.3%) तक ही पहुंच पाता है। इनमें सबसे ज्यादा 10 सांसद यूपी से हैं, इसके बाद कर्नाटक व आंध्र प्रदेश (5-5) और पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र (4-4) का नंबर आता है।
राज्यों की विधानसभाओं में 20 जेन जी विधायक
चूंकि जेन जी का कोई भी युवा 2022 से पहले चुनाव लड़ने की कानूनी उम्र (25 वर्ष) तक नहीं पहुंचा था, इसलिए इनमें से ज्यादातर विधायक पिछले दो सालों में ही चुने गए हैं - जिनमें से अकेले 9 विधायक 2026 में निर्वाचित हुए हैं।
विधानसभाओं में Gen Z विधायक
तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सबसे ज्यादा 4 जेन जी विधायक हैं (3 टीवीके और 1 अन्नाद्रमुक से)। पश्चिम बंगाल में 3 विधायक हैं (तीनों भाजपा से)। इसके अलावा बिहार, मेघालय और तेलंगाना में 2-2 विधायक हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, पुडुचेरी और राजस्थान में 1-1 जेन जी विधायक है।
पार्टी के हिसाब से देखें तो भाजपा 5 जेन जी विधायकों के साथ सबसे आगे है, कांग्रेस के पास 4 और टीवीके (TVK) के पास 3 विधायक हैं।
इन 20 विधायकों में से 16 कम से कम ग्रेजुएट हैं (जिनमें 5 पोस्ट-ग्रेजुएट भी शामिल हैं)। 8 महिलाएं हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से 12 विधायक एकदम न्यूकमर हैं- यानी राजनीति में बिना किसी पारिवारिक बैकग्राउंड के आए हैं!
- डॉ. दिलीपन जयशंकर (तमिलनाडु) - एक पेशेवर डॉक्टर।
- संतु पान (पश्चिम बंगाल) - पूर्व पत्रकार।
- मैथिली ठाकुर (बिहार) - देश की जानी-मानी लोक और पार्श्व गायिका।
- कीर्तना एस. - तमिलनाडु की नई टीवीके सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्री, जो पहले I-PAC में पॉलिटिकल कंसल्टेंट थीं।
- रविंद्र सिंह भाटी - राजस्थान से निर्दलीय विधायक, जो छात्र राजनीति से निकले हैं।
40 से कम उम्र का दायरा
2029 का भविष्य: जेन जी का दबदबा
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