मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी छीनने वाले जेन जी क्या वाकई 2029 के किंगमेकर बनेंगे?

CHAKRESH | Jul 31, 2026, 15:15 IST
Share
genz voter bloc 2029 election india
genz voter bloc 2029 election india

नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर जेन-जी (Gen Z) युवाओं के उग्र प्रदर्शन के बाद राजनीति की पूरी दिशा बदलती दिख रही है। इस प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जेन-जी साल 2029 तक भारत का सबसे ताकतवर वोट बैंक बन पाएगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

समझें क्या है मामला

  • NEET पेपर लीक विवाद पर छात्र हफ्तों से जंतर मंतर पर डटे रहे।
  • कॉकरोच जनता पार्टी नाम के युवा संगठन ने इस आंदोलन की अगुवाई की।
  • इसके इंस्टाग्राम पेज को तीन महीने से कम समय में 2.7 करोड़ फॉलोअर्स मिल गए।
  • दबाव बढ़ता गया और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
  • अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यही ऊर्जा 2029 के चुनाव तक वोटिंग बूथ तक पहुंचेगी।

यह आपसे क्यों जुड़ा है?

अगर आप 18 से 29 साल के हैं, तो यह खबर सीधे आप पर लागू होती है। देश में इस उम्र के करीब 21.7 करोड़ वोटर रजिस्टर्ड हैं। लेकिन असल जनसंख्या इससे कहीं ज्यादा है। मतलब साफ है, बड़ी संख्या में युवा अभी वोटर लिस्ट में हैं ही नहीं। जब तक नाम लिस्ट में नहीं, तब तक किसी नेता को आपकी परवाह करने की मजबूरी भी नहीं।

पहले क्या था

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में करीब 2 करोड़ नए युवा जोड़े थे। उस समय 18-29 उम्र के वोटरों की संख्या करीब 21.7 करोड़ थी। लेकिन 18-19 साल के नए वोटरों का हाल अलग था। देश में इस उम्र के करीब 4.9 करोड़ लोग हैं, मगर सिर्फ लगभग 1.85 करोड़ ने ही रजिस्ट्रेशन कराया।

यानी करीब 3 करोड़ योग्य युवा वोटर लिस्ट से बाहर रह गए। यह लगभग 62 प्रतिशत का आंकड़ा है। बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह रजिस्ट्रेशन दर 20 प्रतिशत के आसपास ही रही।

gen z votebank 2029
gen z votebank 2029


क्या हुआ और क्यों- Core Explanation

जेन जी की राजनीति अब मोबाइल स्क्रीन से शुरू होती है। रील, पॉडकास्ट, मीम और इंफ्लुएंसर। अखबार और टीवी न्यूज इस मिश्रण में कहीं दूर पीछे रह गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र जोंधले कहते हैं कि युवा वोटर अब संस्थाओं से पहले मुद्दों से जुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक यह जुड़ाव अलग तरीके का है, लेकिन है असली।

यहीं से मामला पलटता है। NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे, जो खुद जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल थे, कहते हैं कि अब होर्डिंग और विज्ञापन का जमाना गया। लोग अब नेताओं से सीधी बातचीत चाहते हैं।

लेकिन एक बात साफ समझ लीजिए। जंतर मंतर पर बैठा हर छात्र किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं था। लंदन के SOAS यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव के मुताबिक भीड़ में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी जो प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक माने जाते हैं। रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि असली जीत यह है कि अब सरकार से सवाल पूछने वालों का दायरा पहले से कहीं बड़ा हो गया है।

genz vote bank
genz vote bank


तो क्या एक प्रदर्शन में शामिल होने भर से कोई भाजपा समर्थक विपक्षी वोटर बन जाता है? बिल्कुल नहीं। बस इतना हुआ है कि समर्थन अब उतना बिना शर्त नहीं रहा। रोजगार, शिक्षा, आर्थिक मौके और सरकारी डिलीवरी अब कसौटी बनते जा रहे हैं।

एक और वजह है जो इस बेचैनी को समझाती है। देश की आबादी में 18 से 40 साल वालों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है, लेकिन लोकसभा में इनकी सीटें सिर्फ 11 प्रतिशत के आसपास हैं। 1950 के दशक में यह हिस्सेदारी दोगुने से भी ज्यादा थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की औसत उम्र आज भी करीब 56 साल है।

देश जवान है। लेकिन उसकी राजनीतिक संस्थाएं जवान नहीं हैं।

कौन-कौन involved है

छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी जैसे नए डिजिटल-फर्स्ट समूह इस आंदोलन के केंद्र में रहे। इनका मकसद जवाबदेही तय करना था, किसी एक पार्टी को सत्ता में लाना नहीं। दूसरी तरफ राजनीतिक दल इस ऊर्जा को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश में हैं, क्योंकि 2029 तक जेन जी देश की सबसे बड़ी वयस्क जनरेशन बनने जा रही है।

दोनों तरफ की बात

एक तर्क यह है कि जेन-जी सड़क पर उतरना जानता है, इसलिए वोटिंग में भी बदलाव लाएगा। महिला वोटरों के साथ यही हुआ था। 2019 में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से आगे निकला और यह बढ़त 2024 में भी बनी रही। इसके बाद पार्टियों ने महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर और वेलफेयर स्कीम की झड़ी लगा दी।

दूसरा तर्क थोड़ा सतर्क करने वाला है। जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर सुमीत म्हस्कर के मुताबिक राजनीतिक चेतना आना एक बात है और किसी पार्टी को एकजुट होकर वोट देना बिल्कुल अलग बात है। उनका मानना है कि जेन जी नतीजों को प्रभावित तो करेगा, लेकिन एकतरफा वोट बैंक बनना अभी दूर की बात है।

MP, RJ, CG कनेक्शन

चुनाव आयोग के 2024 इलेक्टोरल एटलस के मुताबिक 18 से 29 साल के वोटरों की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से इन तीनों राज्यों में ज्यादा है। राजस्थान में यह हिस्सेदारी करीब 27.78 प्रतिशत है, मध्य प्रदेश में करीब 27.18 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में करीब 26.12 प्रतिशत। राष्ट्रीय औसत सिर्फ 22.78 प्रतिशत है।

आप पूछेंगे, इसका मतलब क्या है? मतलब साफ है। मध्य प्रदेश में 2028 का विधानसभा चुनाव और राजस्थान की आने वाली सियासी लड़ाई, दोनों में युवा वोटर औसत से ज्यादा असर डाल सकते हैं। जो पार्टी इस जनरेशन को नजरअंदाज करेगी, उसे इन तीनों राज्यों में सबसे पहले कीमत चुकानी पड़ सकती है।

आगे क्या होगा

2029 के लोकसभा चुनाव तक जेन जी की आबादी करीब 38 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो मिलेनियल्स की करीब 35.7 करोड़ आबादी को पीछे छोड़ देगी। लेकिन एक विरोधाभास भी है। देश की आबादी बूढ़ी हो रही है, इसलिए मतदाताओं में युवाओं का हिस्सा घटता जा रहा है। 1988 में 18-29 उम्र के वोटर कुल मतदाताओं का 38.3 प्रतिशत थे। 2024 तक यह घटकर 30.1 प्रतिशत रह गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि 2029 तक यह और गिरकर 27.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

एक बात जो आप नहीं जानते थे

संख्या घटने का मतलब ताकत घटना नहीं होता। असल ताकत इस बात में है कि कोई समूह वोट डालने कितनी बार जाता है और पार्टियों को जवाबदेह कितना ठहराता है। महिलाओं ने यही किया और आज हर घोषणापत्र में उनके लिए अलग पन्ना होता है। जेन जी के साथ भी यही प्रयोग अभी शुरू हुआ है।

अब आप क्या करें

  • अब आप क्या करें: अपना नाम वोटर लिस्ट में जरूर चेक करें और अगर नहीं है तो आज ही रजिस्टर करें
  • क्यों अभी: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में युवा वोटर हिस्सेदारी पहले से राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है
  • आगे देखें: 2028 का मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव

यह खबर क्यों जरूरी है?*

संविधान हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार तभी असर दिखाता है जब मतदाता सूची में नाम दर्ज हो। तीन करोड़ युवाओं का लिस्ट से बाहर रहना लोकतांत्रिक भागीदारी में एक बड़ा गैप दिखाता है। डिजिटल माध्यमों से राजनीतिक जागरूकता बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे वास्तविक मतदान में बदलना ही असली नागरिक जिम्मेदारी है।

ये भी पढ़ें...

चीन की यूनिवर्सिटी क्रांति और भारत की अधूरी तैयारी

एक धुन कैसे बदल देती है हमारा मूड.... जानिए संगीत का अद्भुत विज्ञान

पेपर लीक से बड़ा संकट.... परीक्षा पास करने के बाद नौकरी कहां है?

NCP में नया संग्राम, जानिए पार्थ ने कैसे बदल दी महाराष्ट्र की पूरी सियासी बिसात?



Tags:
  • लोकसभा चुनाव
  • मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव
  • NCP
  • इंस्टाग्राम
  • धर्मेंद्र प्रधान
  • NEET पेपर लीक
  • कॉकरोच जनता पार्टी
  • जेन-जी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

By Umeshwari Baghel

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान

By Ashish Bhardwaj

RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?

By Arohi Raj

वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड

By Umeshwari Baghel

हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड
बंटी नागर सुसाइड केस: रियल एस्टेट कारोबारी की मौत पर तीन महिलाएं पुलिस के राडार पर

By Sanjay Gupta

बंटी नागर सुसाइड केस: रियल एस्टेट कारोबारी की मौत पर तीन महिलाएं पुलिस के राडार पर